बिहार में सफाई मजदूरों की हड़ताल को मिला भाकपा-माले का समर्थन

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Ajit Kumar

बिहार
बिहार में सफाई मजदूरों की हड़ताल का समर्थन करते हुए भाकपा-माले के राज्य सचिव कुणाल

सफाई मजदूरों की हड़ताल पर भाकपा-माले का समर्थन, सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग

तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना : बिहार में 30 जुलाई से जारी सफाई मजदूरों की हड़ताल को अब राजनीतिक समर्थन भी मिलने लगा है. भाकपा-माले ने हड़ताल का समर्थन करते हुए राज्य सरकार से सफाई कर्मचारियों की मांगों पर तत्काल सकारात्मक निर्णय लेने की मांग की है. पार्टी का कहना है कि हड़ताल शुरू हुए कई दिन बीत चुका हैं, लेकिन सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है, जिससे कर्मचारियों में असंतोष बढ़ता जा रहा है.

भाकपा-माले के राज्य सचिव कुणाल ने कहा कि सफाई कर्मचारियों की समस्याओं को लंबे समय से नजरअंदाज किया जा रहा है.उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार स्थायी नियुक्तियों की जगह आउटसोर्सिंग व्यवस्था को बढ़ावा दे रही है, जिससे मजदूरों के अधिकार प्रभावित हो रहा हैं.

आउटसोर्सिंग व्यवस्था पर उठाए सवाल

कुणाल ने कहा कि बिहार में सफाई कर्मचारियों की स्थायी बहाली लगभग समाप्त हो चुकी है और अधिकांश नियुक्तियां निजी आउटसोर्सिंग कंपनियों के माध्यम से की जा रही हैं. उनके अनुसार, कई स्थानों पर कर्मचारियों को न्यूनतम मजदूरी से भी कम भुगतान किया जा रहा है, जो श्रमिक अधिकारों के खिलाफ है.

उन्होंने आरोप लगाया कि इस व्यवस्था के कारण कर्मचारियों को नौकरी की सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा और अन्य सेवा संबंधी सुविधाओं से भी वंचित रहना पड़ रहा है. भाकपा-माले का मानना है कि सफाई व्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में स्थायी रोजगार और बेहतर कार्य परिस्थितियां सुनिश्चित की जानी चाहिए.

सफाई मजदूरों की प्रमुख मांगें क्या हैं?

हड़ताल पर बैठे सफाई कर्मचारी कई महत्वपूर्ण मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं. इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं,

कर्मचारियों का नियमितीकरण और सेवा सुरक्षा सुनिश्चित करना.
ठेका एवं आउटसोर्सिंग व्यवस्था को समाप्त करना.
एसीपी/एमएसीपी योजना का पूर्ण क्रियान्वयन.
लंबित वेतन एवं अन्य बकाया राशि का भुगतान.
श्रमिकों को कानून के अनुसार सभी सेवा लाभ उपलब्ध कराना.

भाकपा-माले ने कहा कि ये मांगें कर्मचारियों के अधिकारों से जुड़ी हैं और सरकार को इन्हें गंभीरता से लेकर समाधान निकालना चाहिए.

आंदोलन तेज करने की चेतावनी

भाकपा-माले ने स्पष्ट किया है कि यदि राज्य सरकार जल्द ही सफाई कर्मचारियों की मांगों पर सकारात्मक फैसला नहीं लेती है, तो पार्टी अपने संबद्ध ट्रेड यूनियन संगठनों के साथ पूरे बिहार में आंदोलन को व्यापक रूप देगी.

पार्टी का कहना है कि कर्मचारियों के समर्थन में राज्यव्यापी जनसंघर्ष चलाया जाएगा और विभिन्न जिलों में विरोध कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे. उनका दावा है कि सरकार की उदासीनता के कारण कर्मचारियों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है.

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सरकार से समाधान निकालने की अपील

भाकपा-माले ने सरकार से अपील की है कि सफाई व्यवस्था जैसी आवश्यक सार्वजनिक सेवा से जुड़े कर्मचारियों की समस्याओं का जल्द समाधान निकाला जाए। पार्टी का कहना है कि बातचीत के माध्यम से कर्मचारियों की मांगों पर सहमति बनाकर हड़ताल समाप्त कराने का प्रयास किया जाना चाहिए, ताकि आम जनता को भी राहत मिल सके.

हालांकि, सरकार की ओर से इस प्रेस विज्ञप्ति में उठाए गए आरोपों और मांगों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.

निष्कर्ष

बिहार में सफाई मजदूरों की हड़ताल अब राजनीतिक बहस का भी विषय बनती जा रही है.भाकपा-माले ने आंदोलन को खुला समर्थन देते हुए सरकार पर कर्मचारियों की मांगों की अनदेखी करने का आरोप लगाया है.आने वाले दिनों में सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच बातचीत होती है या आंदोलन और तेज होता है, इस पर सभी की नजर रहेगी.फिलहाल सफाई कर्मचारियों की मांगों और सरकार के संभावित रुख को लेकर स्थिति महत्वपूर्ण बनी हुई है.

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