पीपी एक्ट के तहत बस्तियों के नियमितीकरण समेत आवास, रोजगार, राशन और मजदूरी की मांग
तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना,14 अगस्त 2026:बिहार में दलित, गरीब, भूमिहीन मजदूरों और महिलाओं के अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर अखिल भारतीय खेत एवं ग्रामीण मजदूर सभा (खेग्रामस) का दो दिवसीय अनशन एवं सत्याग्रह आंदोलन शुक्रवार को समाप्त हो गया.संगठन के अनुसार, 13 और 14 अगस्त को राज्य के करीब 150 प्रखंडों और अंचलों में आयोजित इस आंदोलन में लगभग 50 हजार गरीब ग्रामीणों ने भाग लिया. आंदोलन के समापन पर राष्ट्रपति और मुख्यमंत्री को विभिन्न मांगों से संबंधित स्मारपत्र भेजे गए.
खेग्रामस ने आंदोलन के जरिए ग्रामीण गरीबों के वास-आवास, जमीन, रोजगार, राशन, मजदूरी और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े सवालों को प्रमुखता से उठाया.संगठन का कहना है कि खास तौर पर दलित और वंचित समुदायों की पुरानी बस्तियों को नियमित करने तथा भूमिहीन परिवारों को आवासीय अधिकार देने की दिशा में सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए.
पीपी एक्ट 1947 के तहत बस्तियों को नियमित करने की मांग
आंदोलन की प्रमुख मांगों में पूर्व से बसी तमाम बस्तियों को पीपी एक्ट 1947 के तहत नियमित करना शामिल है.संगठन ने कहा कि लंबे समय से रह रहे दलित और वंचित परिवारों को उनके वास-आवास की सुरक्षा मिलनी चाहिए.
खेग्रामस ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार इन मांगों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं करती है तो आंदोलन को आगे और व्यापक किया जाएगा. संगठन के राष्ट्रीय महासचिव धीरेंद्र झा ने कहा कि दलितों के वास, आवास और जीविका से जुड़े सवालों को लेकर यह आंदोलन की शुरुआत है.
उनके मुताबिक, यदि पीपी एक्ट के तहत दलित और वंचित समुदायों की पुरानी बस्तियों को नियमित नहीं किया गया तथा वास-आवास की गारंटी सुनिश्चित नहीं हुई, तो आगे जिला मुख्यालयों पर अनशन और सत्याग्रह किया जाएगा.इसके बाद राजधानी में ग्रामीण गरीबों का महाजुटान आयोजित करने की चेतावनी भी दी गई है.
भूमिहीन परिवारों के लिए 5 डिसमिल जमीन और पक्के मकान की मांग
खेग्रामस ने सभी भूमिहीन परिवारों को 5 डिसमिल जमीन उपलब्ध कराने और पक्का मकान देने की मांग रखी है.इसके साथ ही संगठन ने प्रत्येक ग्राम पंचायत में भूमिहीन परिवारों के लिए आवासीय कॉलोनी विकसित करने की मांग भी उठाई.
संगठन का तर्क है कि जमीन और आवास का सवाल ग्रामीण गरीब परिवारों की सामाजिक एवं आर्थिक सुरक्षा से सीधे जुड़ा हुआ है। इसलिए केवल आवास योजना तक सीमित रहने के बजाय भूमिहीन परिवारों को जमीन और स्थायी आवास दोनों उपलब्ध कराने की आवश्यकता है.
रोजगार और न्यूनतम मजदूरी भी आंदोलन के केंद्र में
आवास और जमीन के अलावा आंदोलन में रोजगार और मजदूरी का मुद्दा भी प्रमुख रहा। खेग्रामस ने ग्रामजी कानून के तहत गरीबों को काम उपलब्ध कराने तथा दैनिक न्यूनतम मजदूरी बढ़ाकर 700 रुपये करने की मांग की.
आंदोलन के दौरान मजदूरी मांगने पर कथित हत्या और बलात्कार की घटनाओं को लेकर भी आक्रोश व्यक्त किया गया. संगठन ने दलित और वंचित समुदायों पर बढ़ते हमलों के खिलाफ प्रतिरोध खड़ा करने का संकल्प दोहराया.
राशन सूची और पेयजल की समस्या पर भी उठी आवाज
ग्रामीण गरीबों की खाद्य सुरक्षा को लेकर खेग्रामस ने राशन सूची में सभी जरूरतमंद परिवारों को शामिल करने की मांग की.संगठन के अनुसार, पात्र परिवारों को सरकारी खाद्य सुरक्षा व्यवस्था से बाहर नहीं रहना चाहिए.
इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल को लेकर उत्पन्न समस्याओं को दूर करने की मांग भी आंदोलन में उठाई गई.संगठन ने ग्रामीण इलाकों में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने पर जोर दिया.
प्लस-2 स्कूलों में कमरों की कमी का मुद्दा
आंदोलन में शिक्षा से जुड़ा मुद्दा भी शामिल रहा। खेग्रामस ने ग्रामीण क्षेत्रों के प्लस-2 विद्यालयों में आवश्यक कमरों का निर्माण कराने की मांग की. संगठन का कहना है कि ग्रामीण बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने के लिए विद्यालयों में पर्याप्त आधारभूत संरचना जरूरी है.
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महिलाओं की भागीदारी रही उल्लेखनीय
खेग्रामस के मुताबिक, दो दिवसीय आंदोलन में करीब 50 हजार दलित और गरीब लोगों की भागीदारी रही। इसमें महिलाओं की भागीदारी को विशेष रूप से उल्लेखनीय बताया गया.
राज्य के विभिन्न हिस्सों में आंदोलन का नेतृत्व संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सत्यदेव राम सहित शिवनाथ राम, बिरेंद्र गुप्ता, शत्रुघ्न सहनी, जिबछ पासवान, सत्य नारायण पासवान, गोपाल रविदास, सत्यनारायण प्रसाद, प्रदीप कुमार, रामधारी दास, मदन सिंह, हरि पासवान, शनिचरि देवी और आशा देवी समेत अन्य नेताओं ने किया.
आंदोलन समाप्त, लेकिन संघर्ष जारी रखने का ऐलान
दो दिवसीय अनशन-सत्याग्रह के समाप्त होने के बावजूद खेग्रामस ने स्पष्ट किया है कि उसकी मांगों को लेकर संघर्ष आगे भी जारी रहेगा. संगठन ने सरकार से पीपी एक्ट के तहत पुरानी बस्तियों के नियमितीकरण, भूमिहीनों को जमीन और मकान तथा ग्रामीण गरीबों की आजीविका से जुड़े सवालों पर ठोस कार्रवाई की मांग की है.
इस आंदोलन के जरिए खेग्रामस ने बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन, आवास, रोजगार, मजदूरी, राशन, पेयजल और शिक्षा जैसे मुद्दों को एक साथ सामने रखा है.अब आंदोलनकारियों की नजर इस बात पर रहेगी कि सरकार इन मांगों पर क्या कदम उठाती है और ग्रामीण गरीबों से जुड़े इन मुद्दों पर आगे क्या निर्णय लिए जाते हैं.
मुख्य मांगें एक नजर में
पूर्व से बसी तमाम बस्तियों को पीपी एक्ट 1947 के तहत नियमित किया जाए.
सभी भूमिहीनों को 5 डिसमिल जमीन और पक्का मकान दिया जाए.
सभी ग्राम पंचायतों में भूमिहीनों के लिए आवासीय कॉलोनी बनाई जाए.
ग्रामजी कानून के तहत गरीबों को रोजगार उपलब्ध कराया जाए.
दैनिक न्यूनतम मजदूरी 700 रुपये की जाए.
सभी जरूरतमंद परिवारों को राशन सूची में शामिल किया जाए.
ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की समस्या का समाधान किया जाए.
ग्रामीण प्लस-2 विद्यालयों में आवश्यक कमरों का निर्माण कराया जाए.

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