BPSC, BSSC, पुलिस भर्ती, TRE-4 और नल-जल कर्मियों की मांगों पर माले ने सरकार से संवाद की अपील की
तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना, 18 अगस्त 2026 :पटना के गर्दनीबाग धरनास्थल पर विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे छात्रों और अभ्यर्थियों के बीच मंगलवार को भाकपा माले के महासचिव कॉमरेड दीपंकर भट्टाचार्य पहुंचे.उन्होंने आंदोलनकारियों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं और भाकपा माले की ओर से उनके आंदोलन को समर्थन देने की घोषणा की है.
धरनास्थल पर दीपंकर भट्टाचार्य ने BPSC, BSSC, पुलिस भर्ती, TRE-4 और नल-जल अनुरक्षण कर्मियों से जुड़े आंदोलनों में शामिल लोगों से बातचीत की.आंदोलनकारियों ने अपनी मांगों और समस्याओं से संबंधित ज्ञापन भी उन्हें सौंपा.इस दौरान परीक्षा, भर्ती प्रक्रिया और रोजगार से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई.

छात्रों की मांगों पर सरकार को संवाद की सलाह
आंदोलनकारियों को संबोधित करते हुए दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि छात्र अपनी जायज मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं. उनके अनुसार, कई छात्र कई दिनों से भूख हड़ताल पर हैं, लेकिन सरकार की ओर से उनकी समस्याओं के समाधान के लिए अपेक्षित संवेदनशीलता दिखाई नहीं जा रही है.
उन्होंने कहा कि युवाओं के लिए परीक्षा और भर्ती केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि उनके भविष्य और रोजगार से सीधे जुड़ा विषय है. ऐसे में परीक्षा प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी, भर्ती में देरी या लंबित मामलों का सीधा असर अभ्यर्थियों के भविष्य पर पड़ता है.

परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया में सुधार की मांग
दीपंकर भट्टाचार्य ने परीक्षा व्यवस्था में सामने आ रही गड़बड़ियों और भर्ती प्रक्रियाओं में देरी का मुद्दा उठाते हुए पारदर्शी तथा समयबद्ध व्यवस्था की आवश्यकता पर जोर दिया.उन्होंने कहा कि अभ्यर्थियों को स्पष्ट प्रक्रिया, समय पर परीक्षा और परिणाम तथा निष्पक्ष भर्ती व्यवस्था मिलनी चाहिए.
माले महासचिव के मुताबिक, सरकार को आंदोलन कर रहे छात्रों और अभ्यर्थियों की शिकायतों को गंभीरता से सुनना चाहिए. उनका कहना है कि समस्याओं का समाधान बातचीत और संस्थागत प्रक्रिया के जरिए किया जाना चाहिए, न कि आंदोलनकारियों की आवाज को नजरअंदाज करके.
आंदोलनकारियों को लेकर बयानबाजी पर भी सवाल
दीपंकर भट्टाचार्य ने आंदोलनकारी छात्रों को लेकर की जा रही कथित आपत्तिजनक बयानबाजी पर भी सवाल उठाया. प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, उन्होंने कहा कि भाजपा की ओर से आंदोलनकारी छात्रों के लिए दिमागी नक्सल और गटर जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया जा रहा है.
उन्होंने इसे युवाओं और लोकतांत्रिक आंदोलनों के प्रति असंवेदनशील रवैये का उदाहरण बताया. माले महासचिव ने कहा कि छात्रों की मांगों पर बहस और समाधान होना चाहिए, लेकिन आंदोलन कर रहे युवाओं को अपमानित करने से उनकी समस्याएं समाप्त नहीं होंगी.
शिक्षा और रोजगार के सवाल पर व्यापक संघर्ष की घोषणा
दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि बिहार में परीक्षा और शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की जरूरत है. उन्होंने पारदर्शी परीक्षा प्रणाली, समयबद्ध भर्ती प्रक्रिया और अभ्यर्थियों के अधिकारों की सुरक्षा को महत्वपूर्ण बताया.
भाकपा माले ने स्पष्ट किया कि वह परीक्षा, शिक्षा और रोजगार से जुड़े मुद्दों को लेकर चल रहे लोकतांत्रिक आंदोलनों के साथ खड़ी रहेगी. पार्टी ने इन मुद्दों पर संघर्ष को आगे बढ़ाने और इसे व्यापक रूप देने की भी घोषणा की.
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सरकार के सामने क्या चुनौती है?
गर्दनीबाग में अलग-अलग परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रियाओं से जुड़े अभ्यर्थियों का एक साथ आंदोलन करना सरकार के सामने रोजगार और भर्ती व्यवस्था से जुड़े कई सवाल रखता है.ऐसे आंदोलनों में शामिल अभ्यर्थियों की मुख्य अपेक्षा परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया में स्पष्टता, समयबद्धता तथा उनकी शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई की होती है.
ऐसे में सरकार के लिए सबसे महत्वपूर्ण कदम आंदोलनकारियों के साथ संवाद स्थापित करना और प्रत्येक मांग की स्थिति स्पष्ट करना हो सकता है. यदि किसी प्रक्रिया में तकनीकी, प्रशासनिक या कानूनी बाधा है, तो उसकी जानकारी अभ्यर्थियों तक पहुंचाना भी जरूरी है.
माले ने आंदोलन को आगे समर्थन देने की बात कही
गर्दनीबाग धरनास्थल पर हुई मुलाकात के बाद भाकपा माले ने बिहार में परीक्षा, शिक्षा और रोजगार से जुड़े सवालों पर चल रहे लोकतांत्रिक आंदोलनों को समर्थन जारी रखने की घोषणा की है. पार्टी का कहना है कि युवाओं की समस्याओं का समाधान करना सरकार की जिम्मेदारी है और उनकी आवाज को दबाने के बजाय उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए.
फिलहाल, गर्दनीबाग में जारी आंदोलनों के बीच दीपंकर भट्टाचार्य का पहुंचना और माले की ओर से समर्थन की घोषणा इस मुद्दे को राजनीतिक समर्थन मिलने की दिशा में महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है.आगे सरकार की ओर से इन मांगों पर क्या प्रतिक्रिया आती है और आंदोलनकारी छात्रों के साथ संवाद होता है या नहीं, यह इस पूरे मामले का अगला महत्वपूर्ण पहलू होगा.
निष्कर्ष
गर्दनीबाग का छात्र आंदोलन बिहार में परीक्षा, भर्ती और रोजगार व्यवस्था से जुड़े सवालों को सामने ला रहा है. दीपंकर भट्टाचार्य ने आंदोलनकारियों की मांगों का समर्थन करते हुए सरकार से संवाद और तत्काल समाधान की अपील की है. अब सरकार की प्रतिक्रिया और लंबित मांगों पर कार्रवाई इस आंदोलन की दिशा तय करेगी.

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