निशु आज़ाद केस: FIR में SC/ST एक्ट जोड़ने पर पुलिस सहमत

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Ajit Kumar

भारत
निशु आज़ाद केस में SC/ST एक्ट जोड़ने की मांग को लेकर दिल्ली पुलिस के साथ बैठक

वकील ऋषभ रंजन के मुताबिक हत्या की कोशिश और धमकी की धाराएं जोड़ने पर भी बनी सहमति

तीसरा पक्ष ब्यूरो : दिल्ली के जंतर-मंतर पर जून 2026 में हुए प्रदर्शन के दौरान कथित मारपीट का मामला एक बार फिर चर्चा में है. कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) से जुड़ी निशु आज़ाद के पिता संजय कुमार पर हुए कथित हमले को लेकर पीड़ित पक्ष ने मौजूदा FIR में अतिरिक्त कानूनी धाराएं जोड़ने की मांग की है. इस मामले में शुक्रवार को दिल्ली पुलिस और पीड़ित पक्ष के प्रतिनिधियों के बीच हुई बैठक के बाद पुलिस की ओर से कुछ महत्वपूर्ण मांगों पर सहमति जताए जाने की जानकारी सामने आई है.

निशु आज़ाद के वकील और AICC लॉ डिपार्टमेंट से जुड़े ऋषभ रंजन के अनुसार, बैठक में मौजूदा FIR में हत्या की कोशिश, आपराधिक धमकी और SC/ST एक्ट से संबंधित धाराएं जोड़ने की मांग रखी गई. उनके मुताबिक पुलिस ने SC/ST एक्ट की संबंधित धाराएं जोड़ने पर सहमति जताई है. वहीं हत्या की कोशिश की धारा लगाने के लिए संजय कुमार की दोबारा मेडिकल जांच और डॉक्टर की राय लेने की प्रक्रिया पर विचार किया जा रहा है.

इस घटनाक्रम के साथ निशु आज़ाद को सोशल मीडिया पर कथित तौर पर मिल रही धमकियों और आपत्तिजनक टिप्पणियों का मुद्दा भी सामने आया है. पीड़ित पक्ष ने इन ऑनलाइन धमकियों के लिए अलग FIR दर्ज करने की मांग की है.

23 जून को जंतर-मंतर पर क्या हुआ था?

मामला 23 जून 2026 को जंतर-मंतर पर CJP के प्रदर्शन से जुड़ा है. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक प्रदर्शन के दौरान वीडियो बनाए जाने को लेकर विवाद हुआ था. इसी दौरान संजय कुमार के सिर में चोट लगने का आरोप लगाया गया.

इस घटना के बाद संसद मार्ग थाने में FIR नंबर 62/2026 दर्ज की गई थी . FIR में BNS की धारा 115(2), 126(2) और 3(5) के तहत स्वतंत्र भारद्वाज और सूरज कुमार को आरोपी बनाया गया था.

पुलिस की शुरुआती कार्रवाई के मुताबिक संजय कुमार को लगी चोट कड़े जैसी वस्तु से लगने की बात सामने आई थी. मेडिकल रिपोर्ट में चोट को साधारण बताया गया था. मामले में आरोपियों से पूछताछ भी की गई थी और पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया के तहत जांच आगे बढ़ाने की बात कही थी.

हालांकि, बाद के घटनाक्रम ने इस मामले को दोबारा राजनीतिक और कानूनी चर्चा के केंद्र में ला दिया है.

वायरल पॉडकास्ट क्लिप के बाद फिर गरमाया मामला

हाल में स्वतंत्र भारद्वाज से संबंधित एक पॉडकास्ट क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हुई. पीड़ित पक्ष के अनुसार, इस क्लिप में हमले और राजनीतिक संरक्षण से जुड़े दावे किए गए थे. क्लिप सामने आने के बाद CJP से जुड़े कार्यकर्ताओं और निशु आज़ाद की ओर से मामले में पुलिस कार्रवाई तेज करने की मांग उठाई गई.

इसके बाद संसद मार्ग थाने पर प्रतिनिधियों और नेताओं की मौजूदगी भी देखने को मिली.चंद्रशेखर आज़ाद समेत कई नेताओं के थाने पहुंचने के बाद मामले को लेकर पुलिस पर कार्रवाई का दबाव बढ़ने की बात सामने आई.

हालांकि, वायरल वीडियो या पॉडकास्ट में किए गए किसी भी दावे को अपने-आप में न्यायिक रूप से प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता. इन दावों की सत्यता जांच और कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से ही निर्धारित होगी.

पुलिस के साथ बैठक में क्या मांगें रखी गईं?

शुक्रवार को हुई बैठक में पीड़ित पक्ष की ओर से FIR में अतिरिक्त धाराएं जोड़ने की मांग प्रमुखता से रखी गई. ऋषभ रंजन के मुताबिक प्रतिनिधियों ने तीन प्रमुख कानूनी मुद्दे उठाए.

पहला, संजय कुमार पर हुए कथित हमले को देखते हुए हत्या की कोशिश की धारा जोड़ने की मांग की गई.

दूसरा, कथित धमकी को देखते हुए आपराधिक धमकी से संबंधित प्रावधान जोड़ने की मांग रखी गई.

तीसरा, मामले में SC/ST एक्ट की संबंधित धाराएं शामिल करने की मांग की गई.

वकील के अनुसार पुलिस ने SC/ST एक्ट से संबंधित धाराएं जोड़ने पर सहमति जताई है. वहीं हत्या की कोशिश की धारा के संबंध में संजय कुमार की दोबारा मेडिकल जांच और डॉक्टर की राय महत्वपूर्ण मानी जा रही है.

इसका अर्थ यह है कि हत्या की कोशिश की धारा लगाए जाने का अंतिम निर्णय मेडिकल और जांच संबंधी तथ्यों के आधार पर लिया जाएगा. केवल मांग किए जाने से कोई धारा स्वतः लागू नहीं हो जाती.

ऑनलाइन धमकियों पर अलग FIR की मांग

इस पूरे मामले का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू निशु आज़ाद को सोशल मीडिया पर कथित तौर पर मिल रही धमकियों से जुड़ा है. पीड़ित पक्ष का आरोप है कि सोशल मीडिया के कुछ अकाउंट्स से निशु के खिलाफ गाली-गलौज, आपत्तिजनक टिप्पणियां और गंभीर धमकियां दी जा रही हैं.

ऋषभ रंजन के मुताबिक इन ऑनलाइन गतिविधियों को लेकर पुलिस को संबंधित अकाउंट्स की सूची उपलब्ध कराई गई है.अलग FIR दर्ज करने की मांग भी पुलिस के सामने रखी गई.

निशु आज़ाद की ओर से यह भी कहा गया है कि कथित घटना और उसके बाद की परिस्थितियों का उनके मानसिक जीवन पर असर पड़ा तथा वह कुछ समय तक स्कूल नहीं जा सकीं.

ऑनलाइन धमकियों के मामले में पुलिस के लिए संबंधित सोशल मीडिया अकाउंट्स, पोस्ट, संदेश और डिजिटल साक्ष्यों की जांच महत्वपूर्ण होगी. ऐसे मामलों में स्क्रीनशॉट या वायरल पोस्ट के साथ-साथ मूल डिजिटल रिकॉर्ड की पुष्टि भी जांच का हिस्सा हो सकती है.

स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी को लेकर क्या कहा गया?

निशु आज़ाद ने दावा किया है कि पुलिस ने स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी के संबंध में 72 घंटे के भीतर कार्रवाई का भरोसा दिया है. वकील ऋषभ रंजन ने भी बैठक के बाद इसी तरह की जानकारी साझा की.

कुछ रिपोर्टों में स्वतंत्र भारद्वाज को बुलंदशहर से हिरासत में लेकर पूछताछ किए जाने की जानकारी भी सामने आई है.हालांकि, हिरासत, पूछताछ और गिरफ्तारी कानूनी रूप से अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं. इसलिए किसी व्यक्ति की वास्तविक कानूनी स्थिति की पुष्टि पुलिस के आधिकारिक रिकॉर्ड और आगे की कार्रवाई से ही मानी जानी चाहिए.

इसी तरह गिरफ्तारी का आश्वासन और वास्तविक गिरफ्तारी एक ही बात नहीं है. जांच अधिकारी द्वारा उपलब्ध साक्ष्यों, लागू कानूनी प्रावधानों और प्रक्रिया के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी.

SC/ST एक्ट और हत्या की कोशिश की धारा क्यों महत्वपूर्ण है?

SC/ST एक्ट से संबंधित धाराएं जुड़ने की स्थिति में मामले की कानूनी गंभीरता बढ़ सकती है और आरोपी के खिलाफ जांच एवं कार्रवाई का ढांचा प्रभावित हो सकता है. हालांकि यह कहना कि किसी विशेष धारा के जुड़ते ही हर परिस्थिति में गिरफ्तारी अनिवार्य हो जाती है, कानूनी रूप से अत्यधिक सरलीकरण होगा. गिरफ्तारी और अन्य कार्रवाई संबंधित प्रावधानों, जांच और न्यायिक निर्देशों के अधीन होती है.

इसी तरह हत्या की कोशिश की धारा लगाए जाने के लिए घटना की परिस्थितियों, चोट की प्रकृति, कथित हमले के तरीके, इरादे और अन्य साक्ष्यों की जांच महत्वपूर्ण होती है. इसलिए संजय कुमार की दोबारा मेडिकल जांच और चिकित्सकीय राय इस मामले में अहम हो सकती है.

पुलिस जांच की अगली दिशा क्या होगी?

अब इस मामले में तीन स्तरों पर कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी. पहला, मौजूदा FIR में SC/ST एक्ट और अन्य संबंधित धाराओं को शामिल करने की प्रक्रिया. दूसरा, संजय कुमार की मेडिकल स्थिति और उसके आधार पर हत्या की कोशिश की धारा पर निर्णय. तीसरा, निशु आज़ाद को कथित ऑनलाइन धमकियों के संबंध में अलग FIR और डिजिटल साक्ष्यों की जांच.

पुलिस को आरोपों के साथ-साथ उपलब्ध वीडियो, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, मेडिकल दस्तावेज, सोशल मीडिया सामग्री और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच करनी होगी. इसके बाद ही यह स्पष्ट होगा कि किन आरोपों के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं.

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मामला सिर्फ एक FIR तक सीमित नहीं

निशु आज़ाद केस अब केवल जंतर-मंतर पर हुई कथित मारपीट तक सीमित नहीं रह गया है. इसमें प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा, पुलिस जांच, सोशल मीडिया पर कथित धमकियां और राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोप जैसे कई पहलू जुड़ गए हैं.

पीड़ित पक्ष पुलिस से तेज कार्रवाई की मांग कर रहा है, जबकि अंतिम कानूनी निष्कर्ष जांच और अदालत की प्रक्रिया से ही सामने आएगा.किसी भी आरोपी को दोषी मानने से पहले न्यायिक प्रक्रिया पूरी होना आवश्यक है.

फिलहाल पुलिस की ओर से अतिरिक्त धाराओं को लेकर जताई गई सहमति और 72 घंटे के भीतर कार्रवाई के कथित भरोसे ने मामले को फिर से सुर्खियों में ला दिया है. आने वाले दिनों में FIR में संशोधन, मेडिकल राय, संभावित गिरफ्तारी और ऑनलाइन धमकियों को लेकर दर्ज होने वाली कार्रवाई इस मामले की दिशा तय कर सकती है.

निष्कर्ष

जंतर-मंतर की घटना से शुरू हुआ निशु आज़ाद केस अब एक व्यापक कानूनी विवाद का रूप ले चुका है. संजय कुमार पर कथित हमले को लेकर अतिरिक्त धाराएं जोड़ने की मांग, SC/ST एक्ट पर पुलिस की सहमति और निशु आज़ाद को कथित ऑनलाइन धमकियों पर अलग FIR की मांग इस मामले के महत्वपूर्ण पड़ाव हैं.

हालांकि, पुलिस की सहमति या किसी व्यक्ति के खिलाफ लगाए गए आरोप को अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं माना जा सकता. मामले में वास्तविक स्थिति जांच, आधिकारिक पुलिस कार्रवाई और अदालत के निर्णय से स्पष्ट होगी। इसलिए आगे की कार्रवाई पर नजर रखना और अपुष्ट दावों से बचना जरूरी है.

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