शिक्षा, रोजगार और परीक्षा व्यवस्था के मुद्दों पर एसके मेमोरियल में जुटेंगे छात्र-युवा
तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना :बिहार में शिक्षा व्यवस्था, प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितता, पेपर लीक, बेरोजगारी और सार्वजनिक शिक्षा से जुड़े सवालों को लेकर छात्र-युवा संगठनों ने 6 सितंबर को पटना में बड़े कार्यक्रम की घोषणा की है. Gen-Z और अल्फा की आवाज नाम से आयोजित यह कार्यक्रम पटना के एस.के. मेमोरियल हॉल में होगा. आयोजकों के अनुसार कार्यक्रम में देशभर के छात्र-युवा आंदोलनों से जुड़े प्रतिनिधि और विभिन्न आंदोलनों से जुड़े छात्र-युवा शामिल होंगे.
कार्यक्रम में जंतर-मंतर आंदोलन से चर्चित हुईं और AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष कॉमरेड नेहा बोरा के अलावा CPI(ML) के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य, झारखंड के JSSC आंदोलन से जुड़ी हबीबा, जंतर-मंतर आंदोलन से जुड़े इरफान तथा प्रोफेसर और व्यंग्यकार डॉ. मेडुसा सहित कई लोगों के शामिल होने की जानकारी दी गई है.
शिक्षा और रोजगार संकट पर केंद्रित होगा कार्यक्रम
पटना में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में AISA नेताओं ने बिहार की शिक्षा और रोजगार व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठाए. संगठन का कहना है कि पेपर लीक, प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियां, बेरोजगारी, सरकारी स्कूलों की बदहाली और उच्च शिक्षा से जुड़े बदलावों का सीधा असर छात्र-युवाओं के भविष्य पर पड़ रहा है.
आयोजकों के मुताबिक, कार्यक्रम का उद्देश्य अलग-अलग छात्र आंदोलनों और उनके मुद्दों को एक साझा मंच पर लाना है. उनका कहना है कि शिक्षा और रोजगार से जुड़े सवाल अब केवल विश्वविद्यालयों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि बिहार के अलग-अलग जिलों के युवाओं के बीच भी व्यापक चर्चा का विषय बन चुके हैं.
फीस वृद्धि से लेकर भर्ती तक कई मुद्दे उठेंगे
6 सितंबर के कार्यक्रम में कई मांगों को प्रमुखता से उठाने की बात कही गई है. इनमें बिहार विश्वविद्यालय एक्ट, 1976 को खत्म करने की कोशिश रोकना, फीस वृद्धि वापस लेना और 7.5 CGPA की बाध्यता समाप्त करना शामिल है.
इसके अलावा सरकारी स्कूलों के मर्जर पर रोक, सभी रिक्त पदों पर स्थायी नियुक्ति, ठेका-पट्टा आधारित बहाली को समाप्त करने तथा 70वीं BPSC परीक्षा को रद्द करने जैसी मांगें भी कार्यक्रम में उठाई जाएंगी.
इन मांगों के जरिए छात्र संगठन शिक्षा व्यवस्था में सुधार के साथ-साथ सरकारी नौकरियों में स्थायी नियुक्ति और प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता का मुद्दा सामने रखने की तैयारी में हैं.
NEP 2020 और विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता पर भी सवाल
AISA नेताओं ने NEP 2020 और प्रस्तावित कॉमन यूनिवर्सिटी एक्ट को लेकर भी चिंता जताई। संगठन का आरोप है कि इन नीतिगत बदलावों के जरिए सार्वजनिक शिक्षा और विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता कमजोर हो सकती है।
वहीं सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी, बुनियादी सुविधाओं का अभाव और शैक्षणिक व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं को लेकर भी संगठन ने सवाल उठाए. छात्र नेताओं के मुताबिक, इन परिस्थितियों का सबसे अधिक असर गरीब और मेहनतकश परिवारों के बच्चों पर पड़ता है.
प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता बड़ा मुद्दा
कार्यक्रम में BPSC, BSSC और BPSSC जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही का सवाल भी प्रमुखता से उठाए जाने की बात कही गई है.
छात्र नेताओं का कहना है कि बड़ी संख्या में युवा वर्षों तक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। ऐसे में परीक्षा प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की अनियमितता का प्रभाव केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं रहता, बल्कि अभ्यर्थियों के समय, मेहनत और भविष्य पर पड़ता है.
आयोजकों ने इसे केवल किसी एक परीक्षा या भर्ती का मुद्दा न बताते हुए युवाओं के रोजगार, सम्मान और अधिकार से जुड़ा व्यापक सवाल बताया है.
Gen-Z के साथ Gen-Alpha को जोड़ने की कोशिश
Gen-Z Rising : बिहार चैप्टर’ के जरिए AISA और RYA पहले से ही राज्य के विभिन्न जिलों में छात्र-युवा मुद्दों को लेकर कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं. प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार विश्वविद्यालय केंद्रों पर छात्र युवा संसद भी आयोजित की गई हैं.
इस अभियान में शिक्षा, परीक्षा, रोजगार और सरकारी स्कूलों की स्थिति जैसे मुद्दों को प्रमुखता दी जा रही है। आयोजकों का दावा है कि अब इन सवालों पर Gen-Z के साथ-साथ Gen-Alpha के बीच भी चर्चा बढ़ रही है.
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चार सत्रों में होगा पटना का कार्यक्रम
6 सितंबर का कार्यक्रम चार अलग-अलग सत्रों में आयोजित करने की योजना है.आयोजकों के अनुसार इसका मकसद बिहार के अलग-अलग हिस्सों में उठ रहे छात्र-युवा आंदोलनों को एक साझा मंच देना और उनकी आवाज को व्यापक स्तर तक पहुंचाना है.
प्रेस कॉन्फ्रेंस में AISA के महासचिव कॉमरेड प्रसेनजीत, राज्य अध्यक्ष धनंजय, राज्य सचिव दीपांकर मिश्रा और राज्य उपाध्यक्ष सबा आफरीन ने कार्यक्रम की जानकारी दी.
उन्होंने बिहार के छात्र-युवाओं से बड़ी संख्या में 6 सितंबर को पटना पहुंचने की अपील की. संगठन का कहना है कि बिहार के अलग-अलग जिलों की आवाज को राजधानी पटना में एक साझा मंच पर लाकर शिक्षा, रोजगार और लोकतांत्रिक अधिकारों की लड़ाई को नई गति देने का प्रयास किया जाएगा.
निष्कर्ष
पटना में 6 सितंबर को होने वाला Gen-Z और अल्फा की आवाज’ कार्यक्रम शिक्षा और रोजगार से जुड़े छात्र-युवा मुद्दों को एक बड़े मंच पर लाने की कोशिश के रूप में सामने आया है.पेपर लीक, परीक्षा में पारदर्शिता, सरकारी स्कूलों की स्थिति, विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता और स्थायी रोजगार जैसे सवाल कार्यक्रम के केंद्र में रहेंगे.
अब देखना होगा कि एस.के. मेमोरियल हॉल में होने वाला यह आयोजन छात्र-युवा संगठनों की विभिन्न मांगों को किस हद तक एक साझा आंदोलनकारी मंच में बदल पाता है और बिहार की शिक्षा तथा रोजगार व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर इसका राजनीतिक और सामाजिक असर कितना व्यापक होता है.

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