बलिया में आदिवासी अधिकारों को लेकर धरना, 2027 पर बड़ा ऐलान

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Ajit Kumar

भारत
बलिया के बैरिया में आदिवासी अधिकारों को लेकर धरना-प्रदर्शन

बैरिया में गोंड समाज ने जल, जंगल और जमीन के अधिकारों की मांग उठाई

तीसरा पक्ष ब्यूरो: उत्तर प्रदेश के बलिया जनपद की बैरिया तहसील में आदिवासी समाज के अधिकारों को लेकर धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया.प्रदर्शन में आदिवासी समाज के लोगों ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया और अपने अधिकारों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया. प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने जल, जंगल और जमीन पर आदिवासी समाज के अधिकारों को लेकर सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए.

धरना-प्रदर्शन के दौरान उपस्थित लोगों ने 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर भी राजनीतिक संकल्प व्यक्त किया. प्रदर्शनकारियों और वक्ताओं ने कहा कि आगामी चुनाव में भाजपा सरकार को सत्ता में आने से रोकने के लिए आदिवासी समाज एकजुट होकर संघर्ष करेगा.

जल, जंगल और जमीन के अधिकार का मुद्दा उठा

धरना-प्रदर्शन में आदिवासी समाज के अधिकारों को प्रमुख मुद्दा बनाया गया.वक्ताओं ने कहा कि आदिवासी समुदाय आज भी अपने पारंपरिक जल, जंगल और जमीन से जुड़े अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहा है.

वक्ताओं का आरोप था कि भाजपा सरकार के सत्ता में आने के बाद आदिवासी समाज को उसके अधिकारों से वंचित किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदाय के हितों और अधिकारों से जुड़े सवालों को राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर मजबूती से उठाने की जरूरत है.

हालांकि, ये आरोप समाजवादी पार्टी की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में लगाए गए हैं और लेख में इन्हें आरोप/दावे के रूप में ही प्रस्तुत किया गया है.

व्यासजी गोंड ने दिलाया 2027 का संकल्प

धरना-प्रदर्शन के मुख्य अतिथि व्यासजी गोंड, राष्ट्रीय अध्यक्ष, अखिल भारतीय गोंड महासभा, समाजवादी पार्टी के एससी-एसटी प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री रहे हैं.

उन्होंने कार्यक्रम में मौजूद आदिवासी समाज के लोगों को 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर संकल्प दिलाया. उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार को दोबारा सत्ता में आने से रोकने के लिए समाज को एकजुट होकर संघर्ष करना होगा.

व्यासजी गोंड ने आदिवासी समाज से अपने अधिकारों के लिए संगठित होकर आवाज उठाने का आह्वान किया. उन्होंने विशेष रूप से जल, जंगल और जमीन से जुड़े अधिकारों को लेकर संघर्ष जारी रखने की बात कही.

भाजपा सरकार पर लगाए अधिकारों से वंचित करने के आरोप

प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने भाजपा सरकार पर आदिवासी समाज के हितों की अनदेखी करने का आरोप लगाया. उनका कहना था कि सत्ता में आने के बाद से आदिवासी समुदाय को उसके अधिकार नहीं मिल पा रहे हैं.

धरना-प्रदर्शन में शामिल लोगों ने कहा कि आदिवासी समाज के लिए उसके पारंपरिक संसाधनों और अधिकारों का सवाल बेहद महत्वपूर्ण है. इसी मुद्दे को लेकर उन्होंने संगठन और राजनीतिक भागीदारी को मजबूत करने की बात कही.

बड़ी संख्या में नेता और कार्यकर्ता रहे मौजूद

कार्यक्रम में गोंड महासभा और समाजवादी पार्टी से जुड़े कई नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे.इनमें गोंड महासभा के जिलाध्यक्ष हरीहर प्रसाद गोंड, समाजवादी पार्टी के प्रदेश सचिव हरेंद्र गोंड, समाजवादी अनुसूचित जनजाति प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष प्रदीप गोंड तथा विधानसभा अध्यक्ष अजित गोंड सहित कई लोग शामिल रहे.

इसके अलावा संजीत गोंड, शत्रुघ्न गोंड, धीरज गोंड, सुभाष गोंड, शिवसागर गोंड, बंधु गोंड, अशोक गोंड, बीरेंद्र गोंड, संजय गोंड, इन्द्र लोक गोंड, जय प्रकाश यादव, मुन्ना, श्यामू ठाकुर और कृष्ण बिहारी गोंड समेत अन्य आदिवासी नेता भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे.

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2027 के चुनाव से पहले आदिवासी मुद्दों पर जोर

बैरिया में आयोजित यह धरना-प्रदर्शन आदिवासी अधिकारों के सवाल को आगामी राजनीतिक संघर्ष से जोड़ने की समाजवादी पार्टी की कोशिश के रूप में देखा जा सकता है. कार्यक्रम में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर जिस तरह का राजनीतिक संकल्प व्यक्त किया गया, उससे साफ है कि आदिवासी समाज से जुड़े मुद्दे आने वाले समय में राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बन सकते हैं.

फिलहाल कार्यक्रम में उठाए गए मुद्दे और भाजपा सरकार पर लगाए गए आरोप समाजवादी पार्टी की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित हैं. इन दावों पर संबंधित सरकारी या भाजपा पक्ष की प्रतिक्रिया इस सामग्री में उपलब्ध नहीं है.

निष्कर्ष

बलिया की बैरिया तहसील में आदिवासी अधिकारों को लेकर हुए धरना-प्रदर्शन में जल, जंगल और जमीन के अधिकार प्रमुख मुद्दे रहे.व्यासजी गोंड ने आदिवासी समाज से एकजुट होकर अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने का आह्वान किया. साथ ही 2027 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को सत्ता से बाहर रखने का राजनीतिक संकल्प भी दोहराया गया. इससे संकेत मिलता है कि उत्तर प्रदेश में आगामी चुनाव से पहले आदिवासी अधिकारों से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक स्तर पर और अधिक प्रमुखता मिल सकती है.

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