विरासत के प्रहरी को क्यों कैद किया गया?
भंते विनयाचार्य की गिरफ्तारी पर उठे सवाल, बौद्ध समाज में उबाल
तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना :बौद्ध विरासत और महाबोधि महाविहार की गरिमा के लिए संघर्षरत भंते विनयाचार्य जी की गिरफ्तारी ने पूरे देश में रोष की लहर पैदा कर दी है.सवाल उठता है की आख़िरकार एक शांतिपूर्ण संघर्ष करने वाले विरासत के रक्षक को हिरासत में क्यों लिया गया?
बुद्धिस्ट समन्वय संघ ने इस कार्रवाई को अलोकतांत्रिक और अन्यायपूर्ण बताया है और इसे महाबोधि महाविहार मुक्ति आंदोलन को दबाने की साज़िश करार दिया है.इस संदर्भ में संगठन ने 22 जून 2025 को पटना में एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है, जिसमें आंदोलन को लोकतांत्रिक, संगठित और राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करने की रणनीति तय की जाएगी.
बैठक में बुद्धिस्ट चिंतकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, छात्र संगठनों और देशभर के अनुयायियों से भागीदारी की अपील की गई है.संघ का स्पष्ट संदेश है की मिलकर लड़ेंगे, जीतेंगे!
यह आंदोलन अब केवल एक व्यक्ति की रिहाई तक सीमित नहीं रहा, यह एक सांस्कृतिक पहचान, धार्मिक स्वतंत्रता और ऐतिहासिक धरोहर की रक्षा की लड़ाई बन चुका है. बुद्धिस्ट समन्वय संघ का मानना है कि भंते विनयाचार्य की आवाज़ को दबाना, पूरे बौद्ध समाज की आत्मा को आहत करने जैसा है.
आह्वान:
आपसे आग्रह है कि आप 22 जून को पटना पहुंचें और इस ऐतिहासिक आंदोलन का हिस्सा बनें.विरासत की रक्षा के लिए, लोकतंत्र की मजबूती के लिए, और भंते विनयाचार्य की रिहाई के लिए अब एकजुट होकर खड़ा होने का समय है.
विरासत बचानी है, आवाज़ उठानी है!
स्थान: पटना
तारीख: 22 जून 2025

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