निर्वाचन आयोग को पत्र लिखा अव्यवहारिक योजना स्थगित करने की मांग
तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना, 26 जून:भाकपा-माले के महासचिव का. दीपंकर भट्टाचार्य ने भारत निर्वाचन आयोग को पत्र लिखकर बिहार में चलाए जा रहे “विशेष सघन मतदाता सूची पुनरीक्षण अभियान” को अव्यवहारिक और चिंताजनक बताते हुए तत्काल स्थगित करने की मांग की है.
अपने पत्र में महासचिव ने कहा कि बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से ठीक पहले आयोग द्वारा अचानक शुरू किया गया यह अभियान न केवल अत्यधिक विस्तृत है, बल्कि इसके चलते लाखों लोगों के मताधिकार पर खतरा मंडरा रहा है।
उन्होंने बताया कि आयोग ने करीब 7.8 करोड़ मतदाताओं का एक महीने के भीतर घर-घर सर्वेक्षण कर दस्तावेजों की जांच और फार्म संग्रह का लक्ष्य रखा है, जो व्यवहारिक रूप से असंभव प्रतीत होता है. चौंकाने वाली बात यह है कि इस प्रक्रिया की आधारशिला 2003 की मतदाता सूची को बनाया गया है, जिसमें सिर्फ 5 करोड़ नाम शामिल थे.इसके बाद जो करोड़ों नए मतदाता सूची में जुड़े हैं, उन्हें अब अपनी पहचान साबित करने के लिए कई दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे.
भट्टाचार्य ने चेतावनी दी कि जो लोग समय पर दस्तावेज उपलब्ध नहीं करा पाएंगे, उनका नाम मतदाता सूची से हटाया जा सकता है, जिससे वे आगामी चुनावों में अपने वोट के अधिकार से वंचित हो सकते हैं.
उन्होंने इस प्रक्रिया की तुलना असम में हुए एनआरसी (राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर) से की, जिसे पूरा करने में छह साल लगे, बावजूद इसके उसे अंतिम रूप नहीं दिया गया.जब असम जैसे छोटे राज्य में यह प्रक्रिया छह साल में पूरी नहीं हो सकी, तो बिहार जैसे बड़े और जनसंख्या घनत्व वाले राज्य में एक महीने में इसे लागू करना सरासर अव्यवहारिक है. उन्होंने कहा.
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि जुलाई का महीना बिहार में मानसून और खेती-बाड़ी का व्यस्त समय होता है, ऊपर से बड़ी संख्या में बिहार के मतदाता राज्य से बाहर काम करने जाते हैं. ऐसे में इस अभियान के कारण व्यापक भ्रम, त्रुटियां और बड़े पैमाने पर नामों की कटौती की आशंका है.
भाकपा-माले महासचिव ने याद दिलाया कि 2002 में ऐसा विशेष सघन पुनरीक्षण तब किया गया था जब कोई चुनाव नजदीक नहीं था और मतदाता संख्या भी अपेक्षाकृत कम थी.
उन्होंने चुनाव आयोग से आग्रह किया कि इस अव्यवहारिक और अलोकतांत्रिक प्रक्रिया को रोका जाए और मतदाता सूची का केवल नियमित अद्यतन ही किया जाए.
भट्टाचार्य ने अपने पत्र के अंत में कहा, “हमें उम्मीद है कि चुनाव आयोग इस चिंता को गंभीरता से लेकर संविधान और लोकतंत्र की भावना के अनुरूप निर्णय लेगा और गणराज्य के 75वें वर्ष में बिहार की जनता को उनके मताधिकार से वंचित नहीं होने देगा.

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