राज्यव्यापी पुरानी पेंशन बहाली आंदोलन की जोरदार शुरुआत

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Ajit Kumar

बिहार
राज्यव्यापी पुरानी पेंशन बहाली आंदोलन की जोरदार शुरुआत

1 सितंबर को काला दिवस, अब 5 व 14 सितंबर को बड़ी कार्रवाई की तैयारी

तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना, 01 सितंबर 2025 — पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर एनएम ओपीएस ,के बैनर तले बिहार में आज एक नए अध्याय की शुरुआत हुई है. 1 सितंबर को, जिस दिन राज्य में पुरानी पेंशन व्यवस्था को समाप्त किया गया था. आज उसको काला दिवस’ के रूप में मनाया गया. सरकारी सेवकों ने काली पट्टी बांधकर अपने कार्यालयों में कार्य करते हुए एनपीएस (नई पेंशन योजना) और यूपीएस (यूनीफाइड पेंशन स्कीम) का शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराया.

राज्यव्यापी पुरानी पेंशन बहाली आंदोलन की जोरदार शुरुआत

इस ऐतिहासिक दिन की अगली कड़ी में, 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के अवसर पर, सभी जिला मुख्यालयों पर एकदिवसीय उपवास एवं धरना आयोजित किया जाएगा. इसके बाद 14 सितंबर को राजधानी पटना में एक विशाल जनरैली का आयोजन होगा, जिसमें पूरे बिहार से सरकारी कर्मी जुटेंगे.

दूरदराज के जिलों तक पहुँचा आंदोलन की गूंज

दूरदराज के जिलों तक पहुँचा आंदोलन की गूंज

प्रदेश अध्यक्ष वरुण पांडेय ने जानकारी दी कि यह विरोध प्रदर्शन राज्य के कोने-कोने तक फैला. किशनगंज से कैमूर, बांका से बेतिया, जमुई से जहानाबाद जैसे सुदूर इलाकों के सरकारी दफ्तरों में कर्मियों ने काला बिल्ला लगाकर विरोध जताया और पुरानी पेंशन व्यवस्था की वापसी की मांग की.

संघर्ष जब तक समाधान नहीं

संघर्ष जब तक समाधान नहीं

प्रदेश महासचिव शशि भूषण ने इस आंदोलन को सफल बताते हुए कहा कि आगामी कार्यक्रमों के लिए सभी कर्मियों को संगठित और तैयार रहना होगा। वहीं, प्रदेश के मुख्य संरक्षक प्रेमचंद सिंह ने दो टूक कहा कि – जब तक पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल नहीं होती, संघर्ष जारी रहेगा.

मुख्यमंत्री से अपील

मुख्यमंत्री से अपील

वरिष्ठ उपाध्यक्ष संजीव तिवारी ने मुख्यमंत्री से विशेष अपील करते हुए कहा कि जैसे सरकार अन्य वर्गों के कल्याण हेतु कार्य कर रही है. वैसे ही एनपीएस की 20वीं वर्षगांठ पर इसे समाप्त कर राज्य के कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना का लाभ देना चाहिए.

आंदोलन का समन्वित नेतृत्व

आंदोलन का समन्वित नेतृत्व

इस राज्यव्यापी आंदोलन का नेतृत्व मुख्य संयोजक मार्कंडेय पाठक और मुख्य संगठन सचिव प्रदीप कुमार पप्पू के मार्गदर्शन में हुआ. आंदोलन में भाग लेने वाले प्रमुख पदाधिकारियों में शामिल रहे.

  • वरिष्ठ उपाध्यक्ष: मनोज कुमार यादव
  • कोषाध्यक्ष: राजेश कुमार भगत
  • मुख्य समन्वयक: शशिकांत शशि
  • मुख्य सलाहकार: राजेश्वर तिवारी
  • मीडिया प्रभारी: अश्विनी पांडेय
  • सोशल मीडिया प्रभारी: सुनील प्रसाद गुप्ता
  • महिला प्रकोष्ठ अध्यक्षा: कुमारी अलका
  • मुख्य सचेतक: अमरदीप डिसूजा
  • सलाहकार: डॉ. मोहम्मद आज़म खान
  • सचेतक: डॉ. उदय कुमार मिश्रा
  • उपाध्यक्ष (महिला प्रकोष्ठ): डॉ. चिंटू कुमारी
  • प्रवक्ता: बिरेंद्र प्रकाश
  • मीडिया टीम: अविनाश कुमार, विकास कुमार सिंह, चन्दन पटेल
  • अन्य वरिष्ठ उपाध्यक्ष: उदय कुमार महतो, आनंद कुमार, मृगांशु शेखर, धर्म कुमार राम, मनीष मिश्र, सैयद नजमी, प्रमोद मंडल, श्रीमन नारायण शर्मा, ख्वाजा अतिकुर्रहमान
  • संयुक्त महासचिव: झुनु कुमार, गोपाल पासवान
  • उप महासचिव: सैयद शाकिर इमाम, कौशिक कुमार, फकरूद्दीन अली अहमद, धीरज कुमार, प्रवीन्द्र कुमार मौर्य, निरंजन कुमार, सुनील कुमार, निखिल कुमार सिंह, रंजन कुमार, पंकज सिंह
  • कार्यालय सचिव: अजय कुमार, अमृतेश कुमार, मुकेश राज, विजय सिंह आकाश

इन सभी नेताओं के साथ-साथ हर जिले के अध्यक्षों एवं सचिवों ने स्थानीय स्तर पर नेतृत्व करते हुए कार्यक्रम को सफल बनाया और आने वाले कार्यक्रमों की तैयारी में जुटने का आह्वान किया.

1 सितंबर को काला दिवस, अब 5 व 14 सितंबर को बड़ी कार्रवाई की तैयारी

निष्कर्ष

बिहार में सरकारी कर्मचारियों का यह आंदोलन सिर्फ पेंशन की बहाली नहीं, बल्कि भविष्य की सामाजिक सुरक्षा की मांग है.आज का काला दिवस केवल एक प्रतीक नहीं, बल्कि एक ठोस संदेश है कि अगर कर्मचारियों की सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा की अनदेखी होती रही, तो संघर्ष और तेज़ होगा.

5 सितंबर को शिक्षक दिवस के दिन उपवास-धरना, और 14 सितंबर को पटना में ऐतिहासिक रैली की तैयारी में जुटिए.

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