दिल्ली को बचाने के लिए राजनीति नहीं, समाधान चाहिए.
तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना ,30 नवंबर 2025 — नई दिल्ली आज सिर्फ भारत की राजधानी ही नहीं, बल्कि वायु प्रदूषण की मार झेलता हुआ एक ऐसा शहर बन चुका है, जहाँ साफ हवा में साँस लेना भी एक संघर्ष है.हर साल सर्दियों के आते ही प्रदूषण का संकट सुर्खियों में होता है, लेकिन असली कारणों पर बहुत कम और सतही चर्चा होती है.कांग्रेस नेता श्री संदीप दीक्षित ने दिल्ली के असली प्रदूषण कारकों और सरकारों की जिम्मेदारियों पर जो सवाल उठाए हैं, वह इस वक्त की सबसे ज़रूरी बहस है.
उन्होंने साफ कहा है कि,
पराली और पटाखों का योगदान नाममात्र है,असली प्रदूषण वाहनों से आता है.
35% के करीब वायु प्रदूषण सिर्फ गाड़ियों से आने वाला धुआँ पैदा करता है.
BJP और AAP सरकार के आरोप–प्रत्यारोप के बीच आम आदमी पिस रहा है.
यह बयान सिर्फ एक राजनैतिक टिप्पणी नहीं, बल्कि एक कड़वी सच्चाई है, जिसे आंकड़ों और वैज्ञानिक रिपोर्टों ने बार-बार साबित किया है.
क्या पराली और पटाखे ही प्रदूषण के असली कारण हैं?
हर साल सर्दियों में पराली जलाने और दीपावली के पटाखों को प्रदूषण का मुख्य कारण बताया जाता है.मीडिया और कुछ राजनीतिक दल इसे सबसे बड़ा मुद्दा बनाते हैं. लेकिन विशेषज्ञों और पर्यावरण रिपोर्टों के अनुसार,
पराली से आने वाला प्रदूषण कुछ दिनों का होता है.
पटाखों का प्रभाव भी सिर्फ त्योहार तक सीमित रहता है.
दिल्ली के वार्षिक प्रदूषण में इनका योगदान बहुत कम है.
ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर दिल्ली का प्रदूषण सालों भर क्यों बना रहता है?
वाहनों का प्रदूषण: दिल्ली की हवा का सबसे बड़ा दुश्मन
संदीप दीक्षित ने जिस मुद्दे को सबसे महत्वपूर्ण बताया है, वह है — वाहनों से निकलने वाला जहरीला धुआँ.
दिल्ली में,
लाखों निजी वाहन रोज़ाना सड़क पर दौड़ते हैं.
डीज़ल–पेट्रोल की गाड़ियों से PM2.5 और PM10 का भारी उत्सर्जन होता है.
ट्रक, बसें और कमर्शियल वाहन रात-दिन हवा को खराब करते रहते हैं.
ट्रैफिक जाम के दौरान उत्सर्जन कई गुना बढ़ जाता है.
परिणाम यह है कि,
साल भर दिल्ली की हवा जहरीली बनी रहती है.
सर्दियों में हवा की गति कम होने पर यह धुआँ आसमान में अटक जाता है और स्मॉग का रूप ले लेता है.
अगर सरकारें इस एक कारण को गंभीरता से नियंत्रित कर लें, तो दिल्ली के वायु प्रदूषण में 30–35% तक कमी संभव है.
सरकारों की राजनीति और जनता की तकलीफ़
दिल्ली की राजनीति पिछले 10 सालों से एक ही चक्र में घूम रही है,
BJP बनाम AAP, आरोप बनाम प्रत्यारोप, और नुकसान सिर्फ जनता का.
AAP कहती है— केंद्र कुछ नहीं कर रहा.
पर परिणाम यह है कि— दिल्ली की हवा और खराब होती जा रही है.
लोग, मास्क पहनने को मजबूर हैं
बच्चे साँस की बीमारियों के शिकार हो रहे हैं
बुजुर्गों पर प्रदूषण का सबसे ज्यादा असर पड़ रहा है
अस्पतालों में सांस से जुड़ी बीमारियों के केस बढ़ रहे हैं
यह सब देखकर संदीप दीक्षित का यह कहना पूरी तरह सही लगता है
अगर सरकारें प्रदूषण को कंट्रोल नहीं कर पा रही हैं, तो उन्हें सरकार कहलाने का हक नहीं है.
क्या दिल्ली अब रहने लायक नहीं बची?
यह सवाल डरावना है, लेकिन वास्तविक भी.
कई अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में दिल्ली को दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में गिना गया है.
लोग यहाँ रह तो रहे हैं, लेकिन स्वस्थ जीवन जीने की उम्मीद लगातार कम होती जा रही है.
AQI अक्सर 300-500 के बीच
बच्चों में अस्थमा और एलर्जी तेजी से बढ़ रही
फेफड़ों की उम्र 10–15 साल पहले ही घट जाती है
डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि दिल्ली अब हाई-रिस्क जोन में है
इन स्थितियों में सरकारों का एक-दूसरे पर आरोप लगाना लोगों को गुमराह करने जैसा है.
ये भी पढ़े :चुनावी तंत्र पर सवाल: मुरादाबाद BLO की मौत ने लोकतंत्र की विश्वसनीयता पर उठाए गंभीर प्रश्न
ये भी पढ़े :गुजरात से उठी चिंता, देशभर में 27 BLO की मौत!
अब जरूरी क्या है?
दिल्ली को बचाने के लिए राजनीति नहीं, समाधान चाहिए.
कुछ जरूरी कदम
वाहन प्रदूषण पर सख्त नियंत्रण
पुरानी डीज़ल गाड़ियों पर प्रतिबंध
इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा
मास पब्लिक ट्रांसपोर्ट को मजबूत करना
स्मॉग टावर्स और एयर फिल्टरिंग इंफ्रा
लेकिन सिर्फ दिखावे के लिए नहीं, बड़े पैमाने पर
इंडस्ट्रियल प्रदूषण पर पूरा नियंत्रण
निर्माण स्थलों पर धूल रोकने के पुख्ता इंतजाम
केंद्र और राज्य सरकार का संयुक्त एक्शन प्लान
जब तक दोनों सरकारें मिलकर काम नहीं करेंगी, दिल्ली की समस्या खत्म नहीं होने वाली.
निष्कर्ष — अब जनता को गुमराह करना बंद होना चाहिए
संदीप दीक्षित की बात आज दिल्ली की सच्चाई को उजागर करती है.
पराली–पटाखे सिर्फ बहाने हैं;
असली लड़ाई वाहनों, इंडस्ट्रियल स्मॉग और शासन की लापरवाही के खिलाफ है.
दिल्ली को रहने लायक बनाना है तो,
सरकारों को राजनीति छोड़कर जिम्मेदारी निभानी होगी
जनता को भी जागरूक होकर नियमों का पालन करना होगा
और मीडिया को वास्तविक मुद्दों पर ध्यान देना होगा
आज सवाल बस इतना है:
क्या दिल्ली भविष्य में एक स्वस्थ शहर बन पाएगी,
या वायु प्रदूषण इसे धीरे-धीरे खत्म कर देगा?
स्रोत: Congress @INCIndia के X (Twitter) पोस्ट के आधार पर तैयार किया गया लेख।

I am a blogger and social media influencer. I have about 5 years experience in digital media and news blogging.


















