पुलिस कार्रवाई के बाद भाकपा (माले) ने सरकार से जवाबदेही की मांग की
तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना, 22 जुलाई 2026: बिहार की राजधानी पटना में आज ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) के आह्वान पर छात्रों और युवाओं ने विभिन्न शैक्षणिक एवं प्रतियोगी परीक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर राजभवन मार्च निकाला.मार्च के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति बनी. इसके बाद पुलिस द्वारा लाठीचार्ज, आंसू गैस और वाटर कैनन के इस्तेमाल के आरोप लगाए गए. इस घटना के बाद भाकपा (माले) ने राज्य सरकार और केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए पुलिस कार्रवाई की कड़ी निंदा की.

प्रदर्शन की शुरुआत पटना के गांधी मैदान स्थित गेट नंबर-10 के पास से हुई. आइसा कार्यकर्ता और छात्र राजभवन की ओर मार्च कर रहे थे.भाकपा (माले) और आइसा के अनुसार, जैसे ही प्रदर्शनकारी जेपी गोलंबर के पास पहुंचे, पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया. पार्टी का आरोप है कि इसके बाद प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस के गोले छोड़े गए, वाटर कैनन का इस्तेमाल किया गया और लाठीचार्ज किया गया.
पुलिस कार्रवाई पर भाकपा (माले) की प्रतिक्रिया
भाकपा (माले) के राज्य सचिव कुणाल ने इस घटना की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि छात्रों की लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण आवाज को बल प्रयोग के जरिए दबाने की कोशिश की गई.उन्होंने आरोप लगाया कि छात्र शिक्षा व्यवस्था में सुधार, प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और कथित पेपर लीक मामलों पर जवाबदेही की मांग कर रहे थे, लेकिन उनकी मांगों पर संवाद करने के बजाय प्रशासन ने दमन का रास्ता अपनाया.
कुणाल ने कहा कि छात्रों का आंदोलन लोकतांत्रिक अधिकारों के दायरे में था और सरकार को उनकी बात सुननी चाहिए थी. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि देशभर में छात्र समुदाय अपनी समस्याओं को लेकर आवाज उठा रहा है, लेकिन सरकार उनकी मांगों पर संवेदनशील रवैया नहीं अपना रही है.
घायल छात्रों का इलाज
भाकपा (माले) की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, पुलिस कार्रवाई में कई छात्र घायल हुए. पार्टी ने दावा किया कि कुछ छात्रों के हाथ-पैर में गंभीर चोटें आईं, जबकि कई छात्राओं को भी चोट लगी. पार्टी के मुताबिक आइसा के नेता मोनू, प्रभात, आशीष और आदर्श समेत कई छात्रों को इलाज के लिए पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (पीएमसीएच) में भर्ती कराया गया.
हालांकि, पुलिस प्रशासन की ओर से घायल छात्रों की संख्या और घटना के संबंध में आधिकारिक विस्तृत जानकारी सामने आने का इंतजार है.
आंदोलन का नेतृत्व
राजभवन मार्च का नेतृत्व आइसा बिहार राज्य अध्यक्ष धनंजय, राज्य सचिव दीपांकर, उपाध्यक्ष सबा आफरीन, मनीषा यादव, सोनू फर्नाज, आशीष साह, अनीश कुमार सहित कई छात्र नेताओं ने किया। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में छात्र-युवा शामिल हुए.
आंदोलन के दौरान छात्रों ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और कथित पेपर लीक मामलों में सख्त कार्रवाई की मांग उठाई.प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर सरकार से जवाबदेही तय करने की भी मांग की.
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई
भाकपा (माले) ने अपने बयान में कहा कि छात्र समुदाय केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से कथित नीट पेपर लीक मामले की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग कर रहा है. पार्टी का आरोप है कि इस मांग को लेकर देश के विभिन्न हिस्सों में हो रहे आंदोलनों पर पुलिस बल का प्रयोग किया जा रहा है.
पार्टी नेताओं ने कहा कि दिल्ली में हुए छात्र आंदोलन के बाद अब पटना में भी इसी तरह की कार्रवाई की गई है, जिससे यह संदेश जाता है कि सरकार छात्रों की आवाज सुनने के बजाय आंदोलन को नियंत्रित करने पर अधिक ध्यान दे रही है.
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विधायक और विधान परिषद सदस्य भी रहे मौजूद
राजभवन मार्च में भाकपा (माले) के विधायक संदीप सौरभ और विधान परिषद सदस्य शशि यादव भी शामिल हुए. संदीप सौरभ ने कहा कि छात्रों के साथ हुई पुलिस कार्रवाई लोकतांत्रिक व्यवस्था के अनुरूप नहीं है.उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों की मांगों पर विचार करने के बजाय उन्हें बलपूर्वक रोकने का प्रयास किया गया.
विधान परिषद सदस्य शशि यादव ने भी कहा कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार और पेपर लीक जैसे मामलों पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक अधिकार है.उन्होंने कहा कि छात्र जिन मुद्दों को उठा रहे हैं, उन पर सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए.
शिक्षा व्यवस्था पर बढ़ती बहस
हाल के समय में प्रतियोगी परीक्षाओं, पेपर लीक, भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर देशभर में बहस तेज हुई है.विभिन्न छात्र संगठनों ने समय-समय पर इन विषयों पर प्रदर्शन किए हैं और सुधारात्मक कदम उठाने की मांग की है.
पटना का यह राजभवन मार्च भी इसी व्यापक बहस का हिस्सा माना जा रहा है. हालांकि, पुलिस कार्रवाई को लेकर अलग-अलग पक्ष अपनी-अपनी दलीलें दे रहे हैं. जहां छात्र संगठन इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन बता रहे हैं, वहीं प्रशासन की ओर से सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी का पक्ष भी सामने आ सकता है.
निष्कर्ष
पटना में आइसा के राजभवन मार्च के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई ने एक बार फिर छात्र आंदोलनों, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है. भाकपा (माले) ने घटना की निष्पक्ष जांच, घायल छात्रों को उचित उपचार और छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने की मांग की है.आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सरकार, प्रशासन और छात्र संगठनों की अगली प्रतिक्रिया राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जाएगी.

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