अंबेडकर कल्याण छात्रावास विवाद: कड़ाके की ठंड में छात्रों का धरना, सरकार से अविलंब समाधान की मांग

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Ajit Kumar

बिहार
अंबेडकर कल्याण छात्रावास विवाद: कड़ाके की ठंड में छात्रों का धरना, सरकार से अविलंब समाधान की मांग

पटना के लोहियानगर में छात्रावास सील किए जाने से गहराया छात्र संकट

तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना, 8 जनवरी 2025 — बिहार की राजधानी पटना के कंकड़बाग स्थित लोहियानगर इलाके में बने अंबेडकर कल्याण छात्रावास को पुनर्निर्माण के नाम पर खाली कराकर सील किए जाने के बाद छात्रों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है.बिना किसी समुचित वैकल्पिक व्यवस्था के छात्रावास को बंद किए जाने के खिलाफ छात्र कड़ाके की ठंड में पिछले तीन दिनों से धरने पर बैठा हैं. इस आंदोलन को आइसा (AISA) ने खुला समर्थन दिया है और सरकार से छात्रों की मांगों को तत्काल सुनने की अपील की है.

बिना वैकल्पिक व्यवस्था छात्रावास खाली कराना बना विरोध की वजह

बिना वैकल्पिक व्यवस्था छात्रावास खाली कराना बना विरोध की वजह

लोहियानगर स्थित अंबेडकर कल्याण छात्रावास में रह रहे छात्रों का कहना है कि प्रशासन ने पुनर्निर्माण के नाम पर छात्रावास को अचानक खाली करा दिया और भवन को सील कर दिया गया है.छात्रों को महेंद्रू स्थित अरफाबाद अंबेडकर कल्याण छात्रावास में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया गया, लेकिन वहां न तो पर्याप्त जगह उपलब्ध कराई गई और न ही शिफ्टिंग की कोई ठोस व्यवस्था की गई.

छात्रों का आरोप है कि एक ओर उन्हें पुराने छात्रावास से बेदखल कर दिया गया, वहीं दूसरी ओर नए स्थान पर रहने लायक सुविधाएं तक नहीं दी गईं. इस दोहरी परेशानी के कारण छात्र सड़कों पर उतरने को मजबूर हो गया हैं.

पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं पर संकट

धरने पर बैठे छात्रों का कहना है कि उनका अधिकांश शैक्षणिक संस्थान, कोचिंग सेंटर और लाइब्रेरी लोहियानगर क्षेत्र में ही स्थित है. ऐसे में उन्हें दूर अरफाबाद स्थानांतरित किया जाना उनकी पढ़ाई को सीधे तौर पर प्रभावित करता है.

छात्रों ने यह भी बताया कि आने वाले दिनों में कई प्रतियोगी परीक्षाएं होने वाली हैं. ठंड के मौसम में खुले आसमान के नीचे धरने पर बैठना न सिर्फ उनकी सेहत के लिए खतरनाक है, बल्कि परीक्षा की तैयारी भी बाधित हो रही है.

कड़ाके की ठंड में तीन दिन से जारी धरना

जनवरी की ठंड में जब आम लोग घरों में दुबके हुए हैं, तब अंबेडकर कल्याण छात्रावास के छात्र लगातार तीसरे दिन धरने पर बैठा हैं. छात्रों का कहना है कि उन्होंने कई बार प्रशासन से संवाद की कोशिश की, लेकिन अब तक उनकी मांगों पर कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला है.

छात्रों की प्रमुख मांग है कि,

छात्रावास खाली कराने से पहले नजदीक ही वैकल्पिक व्यवस्था की जाये.

सभी छात्रों को एक साथ सुरक्षित शिफ्टिंग की सुविधा मिले.

पढ़ाई और परीक्षा की तैयारी प्रभावित न हो, इसका विशेष ध्यान रखा जाए.

आइसा प्रतिनिधिमंडल ने किया धरनास्थल का दौरा

छात्रों के आंदोलन को समर्थन देने के लिए आइसा का प्रतिनिधिमंडल धरनास्थल पर पहुंचा.प्रतिनिधिमंडल में आइसा के राज्य सह-सचिव कुमार दिव्यम और आइसा नेता नीतीश कुमार शामिल थे. दोनों नेताओं ने धरने पर बैठे छात्रों से मुलाकात किया , उनकी समस्याएं सुनीं और आंदोलन को अपना समर्थन दिया है.

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आइसा नेताओं का सरकार पर सवाल

आइसा राज्य सह-सचिव कुमार दिव्यम ने कहा है कि,

यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि छात्र इस कड़ाके की ठंड में तीन दिनों से धरने पर बैठा हैं. राज्य में प्रतियोगी परीक्षाएं नजदीक हैं, ऐसे समय में छात्रों को सड़कों पर बैठने के लिए मजबूर करना सरकार की संवेदनहीनता को दर्शाता है.

उन्होंने आगे कहा कि प्रशासन ने छात्रों से अरफाबाद में रहने की बात तो कह दिया है , लेकिन आज तक वहां शिफ्टिंग की कोई व्यवस्था नहीं की गई है. कई छात्रों की परीक्षाएं सिर पर हैं, फिर भी उन्हें अपनी पढ़ाई छोड़कर धरने पर बैठना पड़ रहा है.

आइसा नेता नीतीश कुमार ने भी सरकार से सवाल करते हुए कहा कि अगर छात्र कल्याण सरकार की प्राथमिकता है, तो फिर अंबेडकर कल्याण छात्रावास के छात्रों के साथ ऐसा व्यवहार क्यों किया जा रहा है.

सरकार से अविलंब हस्तक्षेप की मांग

आइसा ने राज्य सरकार से मांग की है कि वह इस पूरे मामले में तुरंत हस्तक्षेप करे और छात्रों की समस्याओं का समाधान निकाले. संगठन का कहना है कि बिना वैकल्पिक व्यवस्था छात्रावास को सील करना न केवल प्रशासनिक लापरवाही है, बल्कि छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ भी है.

आइसा ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द ही छात्रों की मांगों पर सकारात्मक कदम नहीं उठाया, तो यह आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है.

निष्कर्ष

लोहियानगर स्थित अंबेडकर कल्याण छात्रावास का मामला केवल एक भवन के पुनर्निर्माण का नहीं, बल्कि सैकड़ों छात्रों के शिक्षा और भविष्य से जुड़ा सवाल बन चुका है. ठंड में धरने पर बैठे छात्रों की स्थिति सरकार और प्रशासन से संवेदनशीलता, संवाद और त्वरित कार्रवाई की मांग करता है. अब देखने वाली बात यह होगी कि सरकार छात्रों की आवाज कब तक सुनती है और इस संकट का समाधान कब निकालती है.

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