नीतीश-भाजपा सरकार पर युवाओं से वादाखिलाफी का आरोप
तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना, 6 जनवरी 2026 बिहार में शिक्षक भर्ती परीक्षा (TRE-4) को लेकर एक बार फिर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है. राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने नीतीश-भाजपा सरकार पर शिक्षक अभ्यर्थियों की अनदेखी करने और घोषित वादों से पीछे हटने का गंभीर आरोप लगाया है.राजद के प्रदेश प्रवक्ता अरुण कुमार यादव ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि सरकार अविलंब शिक्षक भर्ती परीक्षा (TRE-4) के तहत 1.20 लाख शिक्षकों की बहाली का नोटिफिकेशन जारी करे, अन्यथा यह युवाओं के साथ खुला अन्याय माना जाएगा.
अगस्त 2025 का वादा, जनवरी 2026 तक अधूरा
अरुण कुमार यादव ने कहा कि बिहार सरकार ने अगस्त 2025 में ही यह घोषणा किया गया था कि शिक्षक भर्ती परीक्षा (TRE-4) आयोजित किया जायेगा . लेकिन जनवरी 2026 तक भी न तो परीक्षा का शेड्यूल जारी हुआ और न ही बहाली से संबंधित कोई स्पष्ट अधिसूचना सामने आई है..इससे लाखों शिक्षक अभ्यर्थियों में गहरा असंतोष और निराशा फैल रही है.
उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकार खुद समयसीमा तय करती है, तो फिर उसी समयसीमा का पालन क्यों नहीं किया जाता? क्या बिहार के युवाओं की उम्मीदें सिर्फ चुनावी घोषणाओं तक सीमित हैं?
1.20 लाख से कम बहाली क्रूर मजाक: राजद
राजद प्रवक्ता ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी खुद कई मंचों से यह ऐलान कर चुका हैं कि TRE-4 के अंतर्गत 1.20 लाख शिक्षकों की बहाली किया जायेगा . ऐसे में अब यदि सरकार इससे कम संख्या में नियुक्ति निकालने की बात करता है, तो यह शिक्षक अभ्यर्थियों के साथ क्रूर मजाक होगा.
उन्होंने यह भी कहा कि बिहार में पहले से ही सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी है.ग्रामीण इलाकों, प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ाई की गुणवत्ता पर इसका सीधा असर पड़ रहा है. ऐसे में बहाली की संख्या कम करना शिक्षा व्यवस्था के साथ भी अन्याय है.
युवाओं को नौकरी देने की मंशा पर सवाल
अरुण कुमार यादव ने नीतीश-भाजपा सरकार की नीयत पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस सरकार की मंशा कभी भी युवाओं को स्थायी सरकारी नौकरी देने की नहीं रही है. नई सरकार बनने के समय एक करोड़ नौकरी और रोजगार देने का दावा किया गया था, लेकिन सरकार गठन के तीन महीने पूरे होने के बाद भी जमीनी स्तर पर कोई ठोस परिणाम नजर नहीं आ रहा है.
राजद ने साफ किया कि सरकार द्वारा किए गए हर वादे का मूल्यांकन किया जाएगा और जनता के सामने सच्चाई रखी जाएगी.
महागठबंधन सरकार का रिकॉर्ड गिनाया
राजद प्रवक्ता ने तुलना करते हुए कहा कि महागठबंधन सरकार के कार्यकाल में उपमुख्यमंत्री रहे तेजस्वी यादव ने जो कहा, वह करके दिखाया.उनके अनुसार, तेजस्वी यादव के प्रण के अनुरूप मात्र दो महीनों में 2 लाख 16 हजार 359 शिक्षकों की बहाली की गई थी, जो बिहार के इतिहास में एक ऐतिहासिक उपलब्धि थी.
उन्होंने आगे कहा कि तेजस्वी यादव ने अपने 17 महीने के सेवा काल में करीब 5 लाख नौजवानों को सरकारी नौकरी देकर एक कीर्तिमान स्थापित किया था.यही कारण है कि आज भी बिहार का युवा उस कार्यकाल को याद करता है और वर्तमान सरकार से उसी तरह के ठोस फैसलों की उम्मीद करता है.
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शिक्षक अभ्यर्थियों में बढ़ती बेचैनी
TRE-4 को लेकर देरी का असर सीधे-सीधे लाखों अभ्यर्थियों पर पड़ रहा है. कई उम्मीदवार वर्षों से तैयारी कर रहा हैं.उम्र सीमा, आर्थिक दबाव और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच अनिश्चितता उनकी सबसे बड़ी चिंता बन गई है. सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक, शिक्षक अभ्यर्थी लगातार सरकार से नोटिफिकेशन जारी करने की मांग कर रहे हैं.
राजनीतिक दबाव बढ़ने के संकेत
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि सरकार ने जल्द ही TRE-4 को लेकर स्पष्ट घोषणा नहीं की, तो यह मुद्दा आने वाले समय में बड़ा राजनीतिक आंदोलन भी बन सकता है.विपक्ष इस सवाल को लेकर सरकार को लगातार घेरने के मूड में है, वहीं युवाओं का गुस्सा भी धीरे-धीरे उफान पर पहुंच रहा है.
निष्कर्ष: भरोसे की कसौटी पर सरकार
शिक्षक भर्ती परीक्षा (TRE-4) सिर्फ एक परीक्षा नहीं, बल्कि बिहार के लाखों युवाओं के भविष्य से जुड़ा सवाल है.अब यह देखना अहम होगा कि नीतीश-भाजपा सरकार अपने घोषित वादे के अनुसार 1.20 लाख शिक्षकों की बहाली का नोटिफिकेशन कब जारी करती है.यह फैसला न सिर्फ शिक्षा व्यवस्था की दिशा तय करेगा, बल्कि सरकार की विश्वसनीयता और युवाओं के भरोसे की भी असली परीक्षा होगा.

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