बिहार की अदालत जनता,संजय यादव ने किया मोदी राज पर सर्जिकल स्ट्राइक
तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना 24 अगस्त :राजद (राष्ट्रीय जनता दल) के युवा सांसद संजय यादव ने हाल ही में एक तीखी प्रेस कांफ्रेंस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं.संजय यादव का दावा है कि बिहार की जनता अब खुलकर यह कह रही है कि मोदी जी वोट की चोरी से प्रधानमंत्री बने हैं. उनका यह बयान सियासी हलकों में हलचल मचा रहा है.
वोट चोरी से बनी सरकार – संजय यादव का आरोप
संजय यादव ने कहा कि बिहार की जनता ने, हलफनामा देकर यह साफ कर दिया है कि नरेंद्र मोदी और डबल इंजन सरकार की वैधता पर सवाल है. उन्होंने इसे,ऑपरेशन सिंदूर से जोड़ते हुए कहा कि यह साबित हो चुका है कि नरेंद्र मोदी एक,कमज़ोर प्रधानमंत्री हैं.यादव ने व्यंग्य करते हुए कहा कि आज खुद प्रधानमंत्री ने बिहार आकर इस हलफनामे पर दस्तखत कर दिए – क्योंकि उन्होंने अपनी ही जुबान से स्वीकारा कि बिहार में घुसपैठ हो चुकी है.
घुसपैठ का मुद्दा: किसकी जिम्मेदारी?
संजय यादव ने कहा कि यदि घुसपैठ हुई है.तो उसका सीधा दोष प्रधानमंत्री और उनकी सरकार पर है.11 साल से केंद्र में और लगभग दो दशकों से बिहार में भाजपा का शासन है. अगर अब भी घुसपैठ की बात हो रही है. तो यह साफ बताता है कि सरकार असफल ,नाकाम रहा है. यह प्रशासनिक अक्षमता का परिचायक है.
शिक्षा और विकास पर सरकार घिरी
युवा सांसद ने शिक्षा के क्षेत्र में भारी अनदेखी का आरोप लगाते हुए कहा कि बिहार के 534 प्रखंडों में से 398 में आज भी डिग्री कॉलेज नहीं हैं. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने पिछले 10 वर्षों में बिहार को न तो एक भी केंद्रीय विद्यालय दिया, न जवाहर नवोदय विद्यालय.जबकि देशभर में 85 केंद्रीय विद्यालय और 28 नवोदय विद्यालयों की स्वीकृति दी गई. पर बिहार को एक भी नहीं मिला.
यह क्या बिहार के युवाओं से भेदभाव नहीं है? यादव ने पूछा.
एसआईआर और भ्रष्टाचार के आरोप
संजय यादव ने एसआईआर, प्रक्रिया में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कहा कि प्रमाण पत्र बनवाने के नाम पर गरीबों से रिश्वत ली जा रही है. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि,यहां कुत्ते, बिल्ली और डोनाल्ड ट्रम्प तक का प्रमाण पत्र बन जा रहा है, लेकिन गरीबों का नहीं.
नीति आयोग की रिपोर्ट: बिहार को रसातल में पहुंचाया
संजय यादव ने दावा किया कि मोदी सरकार की नीतियों के कारण बिहार हर सामाजिक और आर्थिक इंडेक्स में पिछड़ता जा रहा है. चाहे वह स्वास्थ्य हो, पोषण हो,या शिक्षा – हर क्षेत्र में राज्य बदहाल स्थिति में है.उन्होंने नीति आयोग की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि बिहार में सबसे ज्यादा महिलाओं में खून की कमी है. सबसे कम डॉक्टर हैं. और बच्चों की बीमारियों का प्रतिशत सबसे ज्यादा है.
विकास नहीं, विनाश की राजनीति
अपने बयान के अंत में संजय यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री जब भी बिहार आते हैं. तो यहां विकास की बात नहीं करते है बल्कि ,विनाशकारी और नफरत की राजनीति को हवा देकर चले जाते हैं.उन्होंने दो टूक कहा कि – बिहार अतीत में नहीं, भविष्य में जीना चाहता है – और उसके लिए चाहिए प्रोग्रेसिव विजन.
निष्कर्ष
संजय यादव के इस प्रहार से साफ है कि 2024 के चुनाव परिणामों के बाद भी बिहार की राजनीति में असंतोष और टकराव की लहरें तेज हैं. केंद्र सरकार के खिलाफ विरोधी दलों का स्वर अब और मुखर हो चुका है.यह देखना दिलचस्प होगा कि इन आरोपों का जवाब भाजपा नेतृत्व कैसे देता है और बिहार की जनता किस दिशा में फैसला करती है.

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