CJI को चयन समिति से हटाने पर खड़गे ने मोदी सरकार को घेरा, लोकतंत्र पर जताई चिंता
तीसरा पक्ष ब्यूरोः कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साधा है. पटना, बिहार में दिए गए बयान में खड़गे ने आरोप लगाया कि चयन समिति से भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को हटाकर केंद्रीय मंत्री को शामिल करने से नियुक्ति प्रक्रिया में सत्ता पक्ष का प्रभाव बढ़ गया है.
कांग्रेस ने अपने आधिकारिक X हैंडल पर खड़गे के बयान को साझा करते हुए इस बदलाव को लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंताजनक बताया.
चयन समिति में बदलाव पर क्या बोले मल्लिकार्जुन खड़गे?
खड़गे के अनुसार, पहले मुख्य चुनाव आयुक्त के चयन से जुड़ी समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश शामिल होते थे. उन्होंने आरोप लगाया कि नरेंद्र मोदी सरकार ने इस व्यवस्था में बदलाव करते हुए CJI की जगह केंद्रीय मंत्री अमित शाह को शामिल किया.
खड़गे का कहना है कि इससे चयन समिति में सत्तारूढ़ पक्ष का बहुमत हो जाता है और सरकार अपनी पसंद के व्यक्ति को मुख्य चुनाव आयुक्त के पद पर चुन सकती है.
लोकतंत्र और चुनाव आयोग की स्वतंत्रता का सवाल
मुख्य चुनाव आयुक्त भारतीय निर्वाचन आयोग के प्रमुख होते हैं. आयोग देश में लोकसभा, विधानसभा और अन्य निर्धारित चुनावों के संचालन की महत्वपूर्ण संवैधानिक जिम्मेदारी निभाता है. इसलिए आयोग के प्रमुख की नियुक्ति की प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता को महत्वपूर्ण माना जाता है.
खड़गे ने चयन समिति की संरचना पर सवाल उठाते हुए कहा कि इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था प्रभावित हो सकती है.उन्होंने केंद्र सरकार की आलोचना की और लोगों से उसे सत्ता से बाहर करने की अपील की.
हालांकि, चयन समिति में बहुमत होने मात्र से किसी नियुक्ति को अनुचित नहीं माना जा सकता. इस मुद्दे का निष्पक्ष मूल्यांकन करने के लिए संबंधित कानून, नियुक्ति प्रक्रिया और उसके वास्तविक प्रभावों को समझना जरूरी है.
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CEC की नियुक्ति प्रक्रिया क्यों है महत्वपूर्ण?
चुनाव आयोग की विश्वसनीयता चुनावी प्रक्रिया में जनता के भरोसे से जुड़ी है. नियुक्ति समिति की संरचना यह तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है कि चयन किस व्यवस्था के तहत होगा और उसमें विभिन्न पक्षों की भागीदारी कितनी होगी.
इसी कारण चयन समिति में CJI की भूमिका और उनकी जगह केंद्रीय मंत्री को शामिल किए जाने का मुद्दा राजनीतिक बहस का विषय बना है. कांग्रेस इसे सत्ता पक्ष के प्रभाव में वृद्धि के रूप में देख रही है.
निष्कर्ष
मल्लिकार्जुन खड़गे के बयान ने मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया और चुनाव आयोग की स्वतंत्रता पर बहस को फिर चर्चा में ला दिया है.कांग्रेस ने इस व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं.इस विवाद को समझने के लिए राजनीतिक आरोपों और कानूनी तथ्यों के बीच अंतर करते हुए संबंधित प्रावधानों का अध्ययन करना आवश्यक है.
स्रोत: कांग्रेस के आधिकारिक X हैंडल @INCIndia पर साझा किया गया मल्लिकार्जुन खड़गे का बयान पर आधारित .

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