संकल्प दिवस पर एनटीए खत्म करने, नई शिक्षा नीति वापस लेने और शिक्षा सुधार की मांग उठी
तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना, 31 जुलाई 2026: नीट पेपर लीक विरोधी आंदोलन को छात्र-युवा संघर्ष की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा), रिवोल्यूशनरी यूथ एसोसिएशन (आरवाईए) और भाकपा (माले) ने संयुक्त रूप से पटना के जीपीओ गोलंबर पर संकल्प दिवस का आयोजन किया, इस अवसर पर संकल्प मार्च निकाला गया और एक सार्वजनिक सभा आयोजित कर शिक्षा एवं परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग उठाई गई.
कार्यक्रम में शामिल नेताओं ने कहा कि देशभर में छात्रों और युवाओं द्वारा चलाए गए आंदोलन ने केंद्र सरकार पर दबाव बनाया, जिसके परिणामस्वरूप कई महत्वपूर्ण निर्णयों पर सहमति बनी. हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल प्रशासनिक बदलाव पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि शिक्षा प्रणाली में संरचनात्मक सुधार आवश्यक हैं.

आंदोलन को बताया छात्र-युवा एकता की जीत
सभा को संबोधित करते हुए आइसा नेताओं ने कहा कि नीट पेपर लीक के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन ने यह साबित किया है कि संगठित छात्र शक्ति लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज़ प्रभावी ढंग से उठा सकती है. नेताओं के अनुसार केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे, आंदोलनकारियों की रिहाई तथा दर्ज मुकदमों को वापस लेने पर बनी सहमति छात्र-युवा संघर्ष की महत्वपूर्ण उपलब्धि है.
उन्होंने कहा कि यह आंदोलन केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं था, बल्कि देश की पूरी परीक्षा और भर्ती प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और निष्पक्षता की मांग से जुड़ा हुआ है.
एनटीए समाप्त करने और नई शिक्षा नीति वापस लेने की मांग
कार्यक्रम के दौरान छात्र संगठनों ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) को समाप्त करने की मांग दोहराई है . उनका आरोप है कि देश में लगातार सामने आए परीक्षा संबंधी विवादों ने एजेंसी की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न खड़ा किया है.
इसके साथ ही नई शिक्षा नीति-2020 (एनईपी-2020) को वापस लेने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई. वक्ताओं का कहना था कि शिक्षा व्यवस्था को समान अवसर, सुलभता और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों पर आधारित बनाया जाना चाहिए.
बिहार की शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दे भी उठाए
सभा में बिहार की उच्च शिक्षा व्यवस्था से जुड़े कई मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया गया है.छात्र संगठनों ने आरोप लगाया कि पटना विश्वविद्यालय अधिनियम-1976 को निरस्त करने की कोशिश, 7.5 सीजीपीए की अनिवार्यता, स्नातक से लेकर पीएचडी तक फीस वृद्धि, निजी विश्वविद्यालय अधिनियम तथा विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता पर कथित हस्तक्षेप जैसे कदम शिक्षा विरोधी हैं.
नेताओं ने यह भी कहा कि राज्य के विश्वविद्यालयों में शिक्षकों के बड़ी संख्या में खाली पद शिक्षा की गुणवत्ता को प्रभावित कर रहा हैं.उन्होंने सरकार से इन समस्याओं के समाधान के लिए शीघ्र कदम उठाने की मांग की है.
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सरकार को दी आंदोलन तेज करने की चेतावनी
छात्र संगठनों ने कहा है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक कार्रवाई नहीं होती है, तो बिहार भर में चरणबद्ध तरीके से आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा.
वक्ताओं ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल विरोध दर्ज कराना नहीं, बल्कि ऐसी शिक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करना है जिसमें छात्रों को पारदर्शी परीक्षा प्रणाली, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और समान अवसर मिल सकें.
प्रमुख मांगें
पटना विश्वविद्यालय अधिनियम-1976 को निरस्त करने की प्रक्रिया रोकी जाए.
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) को समाप्त किया जाए.
नई शिक्षा नीति-2020 वापस ली जाए.
यूजी से पीएचडी तक फीस वृद्धि वापस ली जाए.
7.5 सीजीपीए की अनिवार्यता समाप्त की जाए.
निजी विश्वविद्यालय अधिनियम और विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता पर कथित हस्तक्षेप वापस लिया जाए.
आंदोलनकारी छात्रों पर दर्ज सभी मुकदमे वापस लेकर उन्हें रिहा किया जाए तथा दमन के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए.
कार्यक्रम में कई छात्र नेता रहे मौजूद
संकल्प दिवस कार्यक्रम में आइसा बिहार के राज्य अध्यक्ष कॉमरेड धनंजय, राज्य सचिव कॉमरेड दीपांकर, राज्य उपाध्यक्ष कॉमरेड सबा आफ़रीन, कॉमरेड मनीषा, कॉमरेड लोकेश, राज्य सह सचिव कॉमरेड नितीश, भाकपा (माले) पटना टाउन सचिव कॉमरेड जितेंद्र, कॉमरेड मुर्तज़ा, कॉमरेड शहज़ादे, भाकपा (माले) राज्य कमेटी सदस्य कॉमरेड सबीर, कॉमरेड प्रीति तथा पटना विश्वविद्यालय आइसा के कॉमरेड आज़ाद, विवेक, आदर्श और दीपु सहित बड़ी संख्या में छात्र-युवा कार्यकर्ता उपस्थित रहे.
निष्कर्ष
पटना में आयोजित यह संकल्प मार्च केवल नीट पेपर लीक मामले तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और व्यापक सुधार की मांग का मंच भी बना. छात्र संगठनों ने स्पष्ट संकेत दिया है कि यदि उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती है तो आने वाले समय में राज्यव्यापी आंदोलन और तेज किया जाएगा. ऐसे में शिक्षा सुधार, परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता और छात्रों की मांगों को लेकर सरकार का अगला कदम महत्वपूर्ण माना जाएगा.

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