तिरंगा फहराने पर CJP नेताओं को जेल? संजय सिंह ने मोदी को घेरा

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Ajit Kumar

भारत
CJP नेताओं को तिहाड़ जेल भेजे जाने पर प्रधानमंत्री मोदी से सवाल करते AAP सांसद संजय सिंह

आशुतोष रांका और सौरव दास पांच दिन की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेजे गए, AAP सांसद ने पूछा—क्या भारत में ब्रिटिश राज है?

तीसरा पक्ष ब्यूरो, नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) के नेताओं आशुतोष रांका और सौरव दास को न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला है. संजय सिंह ने अपने आधिकारिक X अकाउंट पर सवाल उठाया कि क्या भारत में ब्रिटिश राज है और क्या तिरंगा फहराना तथा भारत माता की जय का नारा लगाना अपराध बन गया है?

14 अक्टूबर 2026 को सामने आई मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, दोनों नेताओं को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया और उन्हें दिल्ली की तिहाड़ जेल में रखा गया. यह कार्रवाई 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान हुई घटना के बाद की गई. संजय सिंह ने इस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा और युवाओं को निशाना नहीं बनाने की चेतावनी दी.

संजय सिंह ने मोदी से पूछा—क्या आप अंग्रेज हैं?

संजय सिंह ने अपने X पोस्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित करते हुए लिखा, मोदी जी क्या आप अंग्रेज़ हैं? क्या भारत में ब्रिटिश राज है?

AAP सांसद ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने CJP नेताओं को तिरंगा फहराने और भारत माता की जय’ कहने के कारण जेल भेजा. उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के मुख्यालय पर 52 साल तक तिरंगा नहीं फहराए जाने का दावा भी अपने बयान में दोहराया.

संजय सिंह ने पोस्ट के अंत में लिखा, युवाओं से पंगा मत लो मोदी जी ये आपकी तानाशाही का अंत जल्द करेंगे.

उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन करने के अधिकार और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे राजनीतिक आंदोलन को लेकर विवाद जारी है.

आखिर क्यों जेल भेजे गए आशुतोष रांका और सौरव दास?

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, CJP नेताओं और उनके समर्थकों का एक समूह 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर पहुंचा था. रिपोर्टों में कहा गया है कि प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर बैरिकेड पार कर उस स्थान में प्रवेश किया, जिसे अधिकारियों ने अब अधिकृत प्रदर्शन स्थल के रूप में अधिसूचित नहीं रखा है.वहां तिरंगा फहराने और नारे लगाने के बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया.

दिल्ली पुलिस ने आरोप लगाया कि नेताओं ने शांति संबंधी बॉन्ड का उल्लंघन किया और सार्वजनिक व्यवस्था बिगड़ने की आशंका थी. इसके बाद संबंधित कानूनी प्रक्रिया के तहत आशुतोष रांका और सौरव दास को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया.

इस मामले में एक अन्य CJP नेता अजिंक्य शिंदे को व्यक्तिगत मुचलके पर रिहा किए जाने की भी रिपोर्ट है.

यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है: दोनों नेताओं को तिहाड़ जेल भेजा जाना पुष्ट घटनाक्रम है, लेकिन पुलिस के अनुसार कार्रवाई का आधार केवल तिरंगा फहराना नहीं, बल्कि कथित अनधिकृत प्रवेश और शांति संबंधी शर्तों का उल्लंघन भी है. दूसरी ओर, CJP नेताओं और विपक्षी दलों ने कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं.

तिरंगा और विरोध के अधिकार पर राजनीतिक टकराव

इस घटनाक्रम के बाद विपक्षी नेताओं ने गिरफ्तारी और न्यायिक हिरासत पर आपत्ति जताई है.उनका सवाल है कि यदि नागरिक राष्ट्रीय ध्वज फहराकर और नारे लगाकर अपना विरोध दर्ज कराते हैं, तो ऐसी कार्रवाई क्यों की गई?

विवाद का दूसरा पक्ष जंतर-मंतर को अधिकृत प्रदर्शन स्थल के रूप में अधिसूचित नहीं रखे जाने और पुलिस द्वारा कानून-व्यवस्था बनाए रखने के तर्क से जुड़ा है. ऐसे में मामले का निष्पक्ष आकलन करने के लिए गिरफ्तारी के आधिकारिक आधार, संबंधित आदेश और न्यायिक प्रक्रिया को देखना आवश्यक है.

भारतीय संविधान नागरिकों को अभिव्यक्ति और शांतिपूर्ण सभा की स्वतंत्रता देता है, हालांकि ये अधिकार कानून में निर्धारित उचित प्रतिबंधों के अधीन हैं। किसी विशेष मामले में कार्रवाई वैध थी या नहीं, इसका निर्णय तथ्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होना चाहिए.

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क्या बोले संजय सिंह?

संजय सिंह ने अपने बयान में केंद्र सरकार पर तानाशाही का आरोप लगाते हुए युवाओं के विरोध की ताकत पर जोर दिया.उन्होंने CJP नेताओं की हिरासत को लेकर प्रधानमंत्री से सवाल किए और इसे लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बताया.

उनके बयान से स्पष्ट है कि AAP इस मामले को राजनीतिक और लोकतांत्रिक अधिकारों के प्रश्न के रूप में उठा रही है. हालांकि, सरकार और पुलिस की ओर से बताए गए कानूनी आधार को भी खबर का हिस्सा बनाना जरूरी है, ताकि पाठकों को पूरे घटनाक्रम की जानकारी मिल सके.

निष्कर्ष

CJP नेताओं आशुतोष रांका और सौरव दास को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेजे जाने के बाद तिरंगा, विरोध प्रदर्शन और नागरिक स्वतंत्रता को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है.संजय सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए पूछा है कि क्या भारत में ब्रिटिश राज है.

अब इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और अदालत के समक्ष रखे जाने वाले तथ्यों पर नजर रहेगी. लोकतंत्र में विरोध का अधिकार महत्वपूर्ण है, लेकिन किसी कार्रवाई की वैधता का मूल्यांकन प्रमाणों और कानून के आधार पर ही किया जाना चाहिए.

स्रोत: संजय सिंह का आधिकारिक X पोस्ट; 14 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित The Indian Express, India Today और अन्य मीडिया रिपोर्टें.

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