भाकपा-माले और खेग्रामस की जांच टीम ने उठाए गंभीर सवाल, डीजीपी को ज्ञापन सौंपकर दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग की
तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना, 10 अक्टूबर 2026: पटना जिले के पुनपुन प्रखंड स्थित बेहरावां चकिया मुसहर बस्ती में पुलिस की कार्रवाई को लेकर भाकपा-माले और अखिल भारतीय खेत एवं ग्रामीण मजदूर सभा (खेग्रामस) ने उच्चस्तरीय जांच की मांग की है. दोनों संगठनों के नेताओं ने आरोप लगाया है कि कार्रवाई के दौरान महिलाओं और युवतियों के साथ दुर्व्यवहार किया गया तथा पुलिस की बर्बरता के कारण दो लोगों की मौत हुई. उन्होंने मामले में दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने, जेल में बंद महिलाओं को तत्काल रिहा करने और गिरफ्तार सभी लोगों की गिरफ्तारी की निष्पक्ष समीक्षा करने की मांग की है.
संगठनों की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, 9 अक्टूबर को भाकपा-माले और खेग्रामस की जांच टीम ने घटनास्थल का दौरा किया. इसी दिन विधान परिषद सदस्य शशि यादव के नेतृत्व में भाकपा-माले के प्रतिनिधिमंडल ने बिहार के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा.नेताओं ने कहा कि इस पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराकर पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाना जरूरी है.

32 महिलाओं समेत 39 लोगों को जेल भेजने का आरोप
प्रेस कॉन्फ्रेंस में नेताओं ने दावा किया कि बेहरावां मुसहर बस्ती की कार्रवाई के बाद मुसहर समुदाय के 39 लोगों को जेल भेज दिया गया है. इनमें 32 महिलाएं शामिल हैं.नेताओं के मुताबिक, गिरफ्तार महिलाओं में दूध पिलाने वाली माताएं और युवतियां भी हैं.इस कार्रवाई से इलाके में आक्रोश व्याप्त है.
नेताओं ने सवाल उठाया कि गरीब और वंचित समुदाय के लोगों के साथ पुलिस का व्यवहार कैसा होना चाहिए और किसी भी कार्रवाई के दौरान उनके अधिकारों की रक्षा कैसे सुनिश्चित की जाएगी. उन्होंने कहा कि गिरफ्तार लोगों के मामलों की निष्पक्ष समीक्षा की जाए और जेल में बंद महिलाओं को अविलंब रिहा किया जाए.
हालांकि, गिरफ्तार लोगों की स्थिति, गिरफ्तारी के आधार और पुलिस का आधिकारिक पक्ष स्वतंत्र रूप से उपलब्ध होने पर ही मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी.
जितिया पर्व के दौरान पुलिस कार्रवाई का आरोप
भाकपा-माले और खेग्रामस के नेताओं के अनुसार, 4 अक्टूबर को सुबह करीब 11 बजे बेहरावां चकिया मुसहर बस्ती में पुलिस ने कार्रवाई शुरू की.उस समय महिलाएं जितिया पर्व का उपवास तोड़ रही थीं. प्रेस विज्ञप्ति में यह भी दावा किया गया है कि इससे पहले 2 अक्टूबर की रात को भी मुसहर टोली में पुलिस ने कार्रवाई की थी.
नेताओं ने आरोप लगाया कि 4 अक्टूबर की कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी बस्ती में पहुंचे और लोगों के साथ बर्बर व्यवहार किया.उनका कहना है कि पुलिस से बचने के लिए कई लोग पुनपुन नदी में कूद गए.आरोप के मुताबिक, नदी के दोनों किनारों से पुलिसकर्मियों ने लोगों पर रोड़े फेंके.
संगठनों ने दावा किया कि इस घटनाक्रम में रामू मांझी और आकाश मांझी की नदी में डूबने से मौत हो गई. स्थानीय लोगों के सामूहिक प्रयास से कई अन्य लोगों को डूबने से बचाने की बात भी कही गई है.
इन आरोपों की पुष्टि के लिए घटना की स्वतंत्र जांच, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और संबंधित आधिकारिक अभिलेख महत्वपूर्ण होंगे। संगठनों ने दोनों मौतों की परिस्थितियों की जांच कराने और जिम्मेदारी तय करने की मांग की है.
महिलाओं और युवतियों ने लगाए गंभीर आरोप
प्रेस कॉन्फ्रेंस में नेताओं ने कहा कि बस्ती की महिलाओं और युवतियों ने पुलिसकर्मियों पर यौन उत्पीड़न समेत गंभीर आरोप लगाए हैं.उन्होंने मांग किया कि पीड़ितों की शिकायतों के आधार पर तत्काल प्राथमिकी दर्ज की जाए और निष्पक्ष कानूनी कार्रवाई की जाए.
नेताओं के मुताबिक, शिकायतकर्ताओं को न्याय दिलाने के लिए जरूरी है कि उनके बयानों को गंभीरता से लिया जाए तथा जांच के दौरान उनकी सुरक्षा और गरिमा का ध्यान रखा जाए.
उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी पुलिस कार्रवाई में कानून का पालन और नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा अनिवार्य है.यदि जांच में पुलिसकर्मियों के खिलाफ लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित लोगों पर कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए.
सुरेंद्र महतो के परिवार के साथ मारपीट का मामला भी उठाया
प्रेस कॉन्फ्रेंस में नेताओं ने पिपरा थाना पुलिस की पूर्व की कार्रवाई का भी उल्लेख किया.उनके अनुसार, 12 सितंबर को राजघाट नवादा में दुकान पर मछली बेच रहे सुरेंद्र महतो को पुलिस ने कथित तौर पर पीटा और थाने ले गई. आरोप है कि उनकी पत्नी और बेटी को भी पुलिस अपने साथ ले गई तथा उनके साथ मारपीट की गई. नेताओं ने दावा किया कि इस दौरान सुरेंद्र महतो का हाथ टूट गया.
प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, सुरेंद्र महतो की बेटी खुशबू पहले पिपरा थाना में ग्रामीण पुलिस के रूप में काम कर चुकी थीं.जब वह अपने पिता, मां और बहन से मिलने पहुंचीं, तो उनके साथ भी मारपीट और अभद्र भाषा के इस्तेमाल का आरोप लगाया गया.
खुशबू ने कथित तौर पर पिपरा थानाध्यक्ष प्रिंस कुमार और दो अन्य सब-इंस्पेक्टरों के खिलाफ आवेदन देकर कार्रवाई की मांग की थी. नेताओं का कहना है कि उनकी शिकायत पर कार्रवाई नहीं हुई. इन आरोपों पर संबंधित पुलिस अधिकारियों का पक्ष सामने आना भी जरूरी है.
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रवि केवट की आत्महत्या के मामले में प्राथमिकी की मांग
नेताओं ने रवि केवट की आत्महत्या का मामला भी उठाया.प्रेस विज्ञप्ति में दावा किया गया कि पुलिस प्रताड़ना से परेशान परिवार के सदस्य रवि केवट ने 26 अक्टूबर को आत्महत्या कर ली.हालांकि, यह तारीख 10 अक्टूबर को जारी विज्ञप्ति से मेल नहीं खाती.इसलिए घटना की सही तारीख और परिस्थितियों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है.
संगठनों ने मांग किया कि पीड़ित परिवार द्वारा दिए गए आवेदन के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की जाए और मामले की विस्तृत जांच कराई जाए.उन्होंने पिपरा थानाध्यक्ष प्रिंस कुमार की भूमिका की जांच करने के साथ ही इलाके में शराब की कथित आपूर्ति करने वाले गिरोह और थाना पुलिस के बीच संभावित सांठगांठ की भी जांच की मांग की.
नेताओं ने स्पष्ट किया कि इन मामलों में आरोपों की निष्पक्ष जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए.
डीजीपी को सौंपे ज्ञापन में रखीं चार प्रमुख मांगें
9 अक्टूबर को विधान परिषद सदस्य शशि यादव के नेतृत्व में भाकपा-माले के प्रतिनिधिमंडल ने बिहार के डीजीपी से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा.प्रतिनिधिमंडल ने बेहरावां की घटना और पिपरा थाना पुलिस से जुड़े आरोपों पर कार्रवाई की मांग की.
ज्ञापन में प्रमुख रूप से चार मांगें रखी गईं:
दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई: पिपरा थानाध्यक्ष प्रिंस कुमार समेत कार्रवाई में शामिल सभी दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाए.
रवि केवट मामले की जांच: आत्महत्या के मामले की विस्तृत जांच कर पीड़ित परिवार के आवेदन के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की जाए और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई हो.
महिलाओं की शिकायतों पर प्राथमिकी: बेहरावां चकिया मुसहर बस्ती की महिलाओं, युवतियों और अन्य परिजनों की शिकायतों के आधार पर दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाए.
गिरफ्तार लोगों की रिहाई: जेल में बंद महिलाओं को अविलंब बिना शर्त रिहा किया जाए तथा 32 महिलाओं समेत गिरफ्तार सभी 39 लोगों की गिरफ्तारी की निष्पक्ष समीक्षा कर रिहाई सुनिश्चित की जाए.
संगठनों ने कहा कि मामले को केवल पुलिस कार्रवाई तक सीमित रखकर नहीं देखा जाना चाहिए. दो लोगों की मौत, महिलाओं के गंभीर आरोप, सामूहिक गिरफ्तारी और रवि केवट की आत्महत्या से जुड़े सवालों की जांच कर जवाबदेही तय की जानी चाहिए.
12 और 15 अक्टूबर को प्रदर्शन का ऐलान
बेहरावां मुसहर बस्ती की घटना के विरोध में महिला संगठनों और वामपंथी संगठनों ने आंदोलन की घोषणा की है.
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोसिएशन (ऐपवा) 12 अक्टूबर को मुख्यमंत्री के समक्ष प्रदर्शन करेगा. इसके बाद 15 अक्टूबर को पुनपुन में प्रतिवाद सभा आयोजित की जाएगी.साथ ही, बिहार भर में भाकपा-माले, खेग्रामस और ऐपवा के बैनर तले विरोध-प्रदर्शन किए जाएंगे.
संगठनों का कहना है कि आंदोलन के जरिए पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने, महिलाओं की रिहाई और पुलिस कार्रवाई की जवाबदेही तय करने की मांग उठाई जाएगी.
मुसहर समुदाय के अधिकारों और सुरक्षा का सवाल
भाकपा-माले और खेग्रामस के नेताओं ने कहा कि मुसहर समुदाय जैसे वंचित समूहों की शिक्षा, रोजगार और सम्मानजनक जीवन के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है.उनके अनुसार, गरीब और वंचित समुदायों के साथ दमनात्मक व्यवहार की शिकायतों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए.
बेहरावां की घटना अब कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े करती है.पुलिस कार्रवाई के दौरान दो लोगों की मौत किन परिस्थितियों में हुई? महिलाओं और युवतियों द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों की जांच कैसे होगी? गिरफ्तार 39 लोगों के मामलों की समीक्षा कब होगी? और क्या संबंधित अधिकारियों की भूमिका की स्वतंत्र जांच कराई जाएगी?
इन सवालों का जवाब निष्पक्ष जांच, साक्ष्यों और आधिकारिक तथ्यों के आधार पर ही मिल सकता है. यदि किसी पुलिसकर्मी की ओर से कानून का उल्लंघन साबित होता है, तो उसके खिलाफ उचित कार्रवाई होनी चाहिए. इसी तरह, गिरफ्तार लोगों के मामलों में भी कानून और न्यायिक प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए.
निष्कर्ष: बेहरावां चकिया मुसहर बस्ती का मामला केवल गिरफ्तारी और पुलिस कार्रवाई तक सीमित नहीं है. इसमें दो लोगों की मौत, महिलाओं की शिकायतें, गिरफ्तार लोगों के अधिकार और पुलिस की जवाबदेही जैसे गंभीर मुद्दे शामिल हैं. अब जरूरी है कि पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच हो, पीड़ित परिवारों को न्याय मिले तथा दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए.
स्रोत: भाकपा-माले और खेग्रामस की ओर से 10 अक्टूबर 2026 को जारी प्रेस विज्ञप्ति.इस रिपोर्ट में संगठनों के आरोपों और मांगों को उनके दावों के रूप में प्रस्तुत किया गया है; स्वतंत्र पुष्टि और पुलिस का आधिकारिक पक्ष उपलब्ध होने पर तस्वीर अधिक स्पष्ट होगी.

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