समय पर रोटी पलटिएगा नहीं तो जल जाएगी — योगेन्द्र यादव का बिहार में संदेश

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Ajit Kumar

बिहार
समय पर रोटी पलटिएगा नहीं तो जल जाएगी — योगेन्द्र यादव का बिहार में संदेश

दीघा में माले प्रत्याशी दिव्या गौतम के समर्थन में योगेन्द्र यादव की जनसभा

तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना, 30 अक्टूबर 2025 — बिहार विधानसभा चुनाव में इस बार महागठबंधन के समर्थन में उतरकर देश के चर्चित राजनीतिक-सामाजिक कार्यकर्ता योगेन्द्र यादव ने एक नई राजनीतिक मिसाल पेश की है. पटना के दीघा विधानसभा क्षेत्र में महागठबंधन समर्थित भाकपा-माले उम्मीदवार दिव्या गौतम के समर्थन में आयोजित चुनावी सभा में योगेन्द्र यादव ने कहा कि,

अगर समय पर रोटी पलटिएगा नहीं तो वह जल जाएगी.बिहार की राजनीति भी अब उसी मोड़ पर है — पलटिएगा नहीं तो बिहार जल जाएगा.

यह बयान नंद गांव में आयोजित विशाल जनसभा में आया, जहाँ यादव ने जनता से अपील किया कि वे बिहार में बदलाव के पक्ष में निर्णायक जनादेश दें.

महागठबंधन के लिए जुटे योगेन्द्र यादव — दीघा से सिवान तक प्रचार अभियान

महागठबंधन के लिए जुटे योगेन्द्र यादव — दीघा से सिवान तक प्रचार अभियान

योगेन्द्र यादव ने दीघा में दिव्या गौतम के लिए समर्थन मांगते हुए कहा कि यह चुनाव केवल एक प्रत्याशी का नहीं, बल्कि बिहार के भविष्य और लोकतंत्र की दिशा का चुनाव है.
उन्होंने कहा, चुनाव आयोग ने बिहार के 68 लाख लोगों के नाम मतदाता सूची से काट दिए हैं.यह लोकतंत्र पर हमला है.पूरे देश में नाम काटने की साजिश चल रही है, और बिहार को इसके खिलाफ निर्णायक भूमिका निभानी होगी.

सभा में मौजूद जनता ने महागठबंधन ज़िंदाबाद के नारों से वातावरण को गूंजा दिया.

दिव्या गौतम का वादा: नौकरी, डोमिसाइल नीति और पेपर लीक पर रोक

महागठबंधन प्रत्याशी दिव्या गौतम ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि बिहार में युवाओं का भविष्य एनडीए की नीतियों के कारण अंधकार में धकेला गया है. उन्होंने घोषणा की,

हमारी सरकार आएगी तो डोमिसाइल नीति लागू की जाएगी.युवाओं को नौकरी देने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे. परीक्षा में धांधली और पेपर लीक पर सख्त रोक लगेगी.

उन्होंने कहा कि दीघा के मतदाता अब परिवर्तन के लिए तैयार हैं.एनडीए प्रत्याशी से निराशा चरम पर है, जनता इसका जवाब वोट से देगी.

महिलाओं की सुरक्षा और स्कीम वर्कर्स का मुद्दा

सभा में एमएलसी शशि यादव ने कहा कि बिहार में आज अपराध चरम पर है और महिलाओं का सम्मान खतरे में है.उन्होंने कहा कि,

महागठबंधन की सरकार बनते ही सभी स्कीम वर्कर्स को स्थायी किया जाएगा और उन्हें सरकारी कर्मी का दर्जा दिया जाएगा.

सभा में सपा नेता सूरज यादव, राजद नेता चंदन यादव, संतोष यादव, सुरेश प्रसाद, रणविजय कुमार, कन्हैया कुमार गौतम, अंकुर कुमार, सुभाष कुमार, विजय कुमार सहित कई स्थानीय नेता मौजूद रहे.सभी ने गांधी जी की मूर्ति पर माल्यार्पण कर अभियान की शुरुआत की.

दीघा में सघन जनसंपर्क, सिवान में दौरे की तैयारी

चुनावी सभा के बाद दिव्या गौतम ने धिराचक, रघुनाथ टोला, शिवपुरी नहर, इंद्रपुरी, गोसाई टोला, मैनपुरा समेत कई इलाकों में जनसंपर्क किया.
इंद्रपुरी के रोड नंबर 10 पर चुनाव कार्यालय का उद्घाटन किया गया, जिसमें एमएलसी शशि यादव और आइसा सहित कई युवा संगठनों के सदस्य मौजूद थे.

दूसरी ओर, योगेन्द्र यादव और युवा बुद्धिजीवी लक्ष्मण यादव अब सिवान में दर्जनों सभाओं को संबोधित करने वाले हैं, जहाँ वे माले प्रत्याशियों के पक्ष में जनसमर्थन जुटाएंगे.

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भाकपा-माले के वरिष्ठ नेता मैदान में — प्रचार की रणनीति तेज

भाकपा-माले के महासचिव का. दीपंकर भट्टाचार्य सहित सभी स्टार प्रचारकों ने अब बिहार में प्रचार अभियान को गति दे दी है.

भोजपुर में का. स्वदेश भट्टाचार्य, राज्य सचिव कुणाल, और मीना तिवारी ने प्रचार संभाला है.

का. धीरेन्द्र झा सिवान में सेंटर कर रहे हैं.

रामजी राय भोरे क्षेत्र में मोर्चा संभाले हैं.

का. अमर ने पालीगंज, अरवल और घोषी विधानसभा क्षेत्रों का दौरा शुरू किया है.

वहीं का. राजाराम सिंह, माले सांसद, काराकाट क्षेत्र में प्रचार की कमान संभाले हुए हैं.

महिलाओं की अलग प्रचार टीम बनाई गई है, जबकि युवा और छात्र संगठन सोशल मीडिया पर बदलाव बिहार का अधिकार थीम के साथ प्रचार को आगे बढ़ा रहे हैं.

चुनावी गीतों से माहौल गरमाया — रोटी, रोज़गार और न्याय पर फोकस

माले ने इस बार प्रचार में जोश भरने के लिए चुनावी गीत भी जारी किए हैं. गीतों में रोटी, रोज़गार, शिक्षा और न्याय की थीम को प्रमुखता दी गई है.
इन गीतों को सोशल मीडिया पर जबरदस्त समर्थन मिल रहा है और युवा वर्ग इन्हें प्रचार के हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहा है.

निष्कर्ष: बिहार में बदलाव की आहट तेज़

योगेन्द्र यादव का बयान पलटिएगा नहीं तो रोटी जल जाएगी बिहार चुनाव की राजनीतिक चर्चा में नया प्रतीक बन गया है.
यह संदेश सिर्फ दीघा नहीं, बल्कि पूरे बिहार के मतदाताओं को यह सोचने पर मजबूर कर रहा है कि क्या अब समय आ गया है रोटी पलटने का — यानी सरकार बदलने का.

महागठबंधन इस चुनाव में युवा, महिला और रोजगार को केंद्र में रखकर मैदान में उतरा है, जबकि एनडीए पर विफलता और जनविरोधी नीतियों के आरोप लग रहे हैं.
बिहार की जनता अब इस रोटी को कैसे पलटती है, इसका फैसला 2025 का जनादेश करेगा.

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