दरभंगा में जुटेगी वाम राजनीति की बड़ी ताकत
तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना, 15 मई 2026: भाकपा-माले का 12वां बिहार राज्य सम्मेलन 16 से 18 मई 2026 तक दरभंगा में आयोजित होने जा रहा है.तीन दिनों तक चलने वाले इस महत्वपूर्ण राजनीतिक सम्मेलन में राज्यभर से लगभग 700 प्रतिनिधि, पर्यवेक्षक और पार्टी कार्यकर्ता भाग लेंगे. सम्मेलन को बिहार की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों और आगामी संघर्षों की दिशा तय करने के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है.
इस सम्मेलन में पार्टी के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य, पोलित ब्यूरो के सदस्य, केंद्रीय कमेटी के नेता और बिहार राज्य नेतृत्व के वरिष्ठ प्रतिनिधि शामिल होंगे.उद्घाटन सत्र में इंडिया गठबंधन के विभिन्न दलों के नेताओं की भी मौजूदगी रहने की संभावना है, जिससे यह सम्मेलन राष्ट्रीय राजनीति के लिहाज से भी खास बन गया है.
राजनीतिक चुनौतियों के बीच आयोजित हो रहा सम्मेलन
भाकपा-माले का यह राज्य सम्मेलन ऐसे समय में आयोजित हो रहा है जब देश और बिहार दोनों ही कई राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा हैं. पार्टी का मानना है कि लोकतांत्रिक संस्थाओं पर बढ़ते दबाव, विपक्षी आवाजों पर कार्रवाई और प्रशासनिक केंद्रीकरण ने लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर किया है.
सम्मेलन में बिहार की मौजूदा राजनीति, भाजपा के बढ़ते प्रभाव, बुलडोज़र राजनीति, छात्र-युवा आंदोलनों पर कार्रवाई और गरीबों-वंचितों के अधिकारों पर बढ़ते संकट जैसे मुद्दों पर व्यापक चर्चा होगी.
पार्टी नेताओं का कहना है कि यह सम्मेलन केवल संगठनात्मक बैठक नहीं, बल्कि लोकतंत्र और सामाजिक न्याय की रक्षा के लिए रणनीति तैयार करने का महत्वपूर्ण मंच होगा.
इंडिया गठबंधन की एकजुटता पर रहेगा फोकस
सम्मेलन में इंडिया गठबंधन के सहयोगी दलों के नेताओं को भी आमंत्रित किया गया है.भाकपा-माले के राज्य सचिव कुणाल ने गठबंधन के प्रमुख नेताओं को आमंत्रण भेजा है.माना जा रहा है कि सम्मेलन के दौरान विपक्षी एकता, साझा संघर्ष और भाजपा के खिलाफ व्यापक राजनीतिक मोर्चाबंदी को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा हो सकती है.
हाल के विधानसभा चुनावों के परिणामों ने विपक्षी राजनीति के सामने नई चुनौतियाँ खड़ी की हैं. ऐसे में विपक्षी दलों के बीच बेहतर समन्वय और साझा रणनीति की आवश्यकता पर भी जोर दिया जाएगा.
लोकतंत्र और संविधान की रक्षा पर होगी चर्चा
सम्मेलन में लोकतंत्र, संविधान, सामाजिक न्याय और धर्मनिरपेक्षता के सवाल प्रमुख रूप से उठाए जाएंगे. पार्टी का कहना है कि देश में बढ़ती नफरत की राजनीति और लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमलों के खिलाफ जनआंदोलन को और मजबूत करने की जरूरत है.
भाकपा-माले का मानना है कि बिहार ऐतिहासिक रूप से सामाजिक बदलाव और जनसंघर्षों की राजनीति का मजबूत केंद्र रहा है. ऐसे में राज्य सम्मेलन की भूमिका केवल राजनीतिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं होगी, बल्कि यह व्यापक सामाजिक हस्तक्षेप का मंच भी बनेगा.
रोजगार, शिक्षा और महंगाई जैसे मुद्दे रहेंगे केंद्र में
सम्मेलन में कई अहम जनसरोकार के मुद्दों पर राजनीतिक प्रस्ताव और संगठनात्मक रिपोर्ट पेश की जाएगी.इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं,
बेरोजगारी और रोजगार संकट
शिक्षा व्यवस्था की चुनौतियां
स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति
कृषि संकट और किसानों की समस्याएं
महंगाई और आम जनता पर आर्थिक दबाव
दलितों और गरीबों पर बढ़ते हमले
महिलाओं की सुरक्षा
अल्पसंख्यकों के खिलाफ नफरत की राजनीति
युवाओं के भविष्य से जुड़े सवाल
पार्टी का कहना है कि इन मुद्दों को लेकर राज्यव्यापी आंदोलन और जनसंघर्षों की रूपरेखा भी सम्मेलन में तय की जाएगी.
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संगठनात्मक मजबूती पर भी रहेगा जोर
राजनीतिक मुद्दों के साथ-साथ सम्मेलन में संगठन विस्तार और पार्टी को जमीनी स्तर पर मजबूत करने पर भी चर्चा होगी.भाकपा-माले आगामी दौर में गांव-गांव और शहर-शहर जनसंपर्क अभियान चलाने की तैयारी कर रही है.
पार्टी नेताओं के अनुसार, मौजूदा परिस्थितियों में जनता के मुद्दों को मजबूती से उठाने और लोकतांत्रिक आंदोलनों को आगे बढ़ाने के लिए संगठनात्मक मजबूती बेहद जरूरी है.
जनता से सहयोग की अपील
भाकपा-माले ने बिहार की जनता, लोकतांत्रिक ताकतों और प्रगतिशील संगठनों से सम्मेलन की सफलता में सहयोग और भागीदारी की अपील की है.पार्टी का कहना है कि यह सम्मेलन केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों और सामाजिक न्याय की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.
निष्कर्ष
दरभंगा में होने वाला भाकपा-माले का 12वां बिहार राज्य सम्मेलन राज्य की राजनीति में नई दिशा तय कर सकता है.विपक्षी एकता, लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा और जनसंघर्षों की रणनीति को लेकर यह सम्मेलन आने वाले समय की राजनीति पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है.
तीन दिनों तक चलने वाला यह सम्मेलन बिहार ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी खास संदेश देने वाला माना जा रहा है.

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