पटना से उठे बड़े सवाल, NTA की विश्वसनीयता पर फिर बहस
तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना,16 मई 2026 : देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG 2026 को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है. राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रदेश प्रवक्ता चित्तरंजन गगन ने 21 जून को दोबारा आयोजित होने वाली परीक्षा पर गंभीर सवाल खड़ा किया है.उन्होंने पूछा है कि जब परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी NTA (नेशनल टेस्टिंग एजेंसी) खुद संदेह के घेरे में है, तब आखिर यह गारंटी कौन देगा कि पुनर्परीक्षा पूरी तरह कदाचार मुक्त होगी.
पटना में जारी प्रेस बयान में राजद प्रवक्ता ने कहा कि पेपर लीक मामले में हुई गिरफ्तारियों और लगातार सामने आ रही अनियमितताओं ने छात्रों और अभिभावकों का भरोसा पूरी तरह तोड़ दिया है. उनका कहना है कि केवल परीक्षा दोबारा करा देने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की आवश्यकता है.
पेपर लीक मामले में NTA पर उठे गंभीर सवाल
राजद प्रवक्ता ने कहा है कि पेपर लीक मामले के कथित सरगना प्रोफेसर पी. वी. कुलकर्णी की गिरफ्तारी के बाद NTA की भूमिका पर सवाल उठना स्वाभाविक है. आरोप है कि प्रोफेसर कुलकर्णी NTA की उस समिति से जुड़े रहे हैं जो प्रश्नपत्र तैयार करने का कार्य करती थी.ऐसे में यह मामला केवल बाहरी गिरोह तक सीमित नहीं दिखता, बल्कि परीक्षा प्रणाली के भीतर तक गड़बड़ी की आशंका पैदा करता है.
उन्होंने दावा किया कि मामले की जांच कर रही CBI को भी शक है कि प्रश्नपत्र निर्माण समिति के कुछ अन्य सदस्य और NTA के वरिष्ठ अधिकारी भी इस नेटवर्क से जुड़े हो सकते हैं.यदि ऐसा है, तो यह देश की परीक्षा व्यवस्था पर एक बड़ा सवालिया निशान है.
राधाकृष्ण कमेटी की सिफारिशें क्यों नहीं मानी गईं?
NEET UG 2024 में हुए भारी विवाद और देशव्यापी विरोध प्रदर्शन के बाद केंद्र सरकार ने परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए राधाकृष्ण कमेटी का गठन किया था. इस समिति ने कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए थे, जिनमें सबसे प्रमुख था कि NEET जैसी महत्वपूर्ण परीक्षा को CBT (Computer Based Test) मोड में आयोजित किया जाए ताकि पेपर लीक और धांधली की संभावनाएं कम हो सकें.
लेकिन आश्चर्य की बात यह रही कि इन सिफारिशों को पूरी तरह लागू नहीं किया गया और परीक्षा फिर से पेन-पेपर मोड में आयोजित की गई.अब जब दोबारा धांधली के आरोप सामने आए हैं, तब सरकार ने घोषणा की है कि अगले वर्ष से परीक्षा CBT मोड में होगी. हालांकि राजद का आरोप है कि NTA के पास इसके लिए पर्याप्त तकनीकी संसाधन नहीं हैं और उसे फिर आउटसोर्सिंग एजेंसियों पर निर्भर रहना पड़ेगा.
छात्रों का भविष्य संकट में
राजद प्रवक्ता ने कहा कि लगातार हो रही गड़बड़ियों का सबसे बड़ा नुकसान उन लाखों छात्रों को हो रहा है जो वर्षों तक मेहनत करके NEET जैसी कठिन परीक्षा की तैयारी करते हैं.परीक्षा रद्द होने और अनिश्चितता के माहौल ने छात्रों को मानसिक तनाव और अवसाद की स्थिति में पहुंचा दिया है.
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश के लखीमपुर-खीरी के 21 वर्षीय छात्र रितिक मिश्रा ने कथित तौर पर अपने सुसाइड नोट में लिखा था — अब नहीं देनी प्रतियोगी परीक्षा. वहीं दिल्ली की 30 वर्षीय छात्रा अंशिका पाण्डेय, जो तीन वर्षों से NEET की तैयारी कर रही थीं, परीक्षा रद्द होने की खबर से गहरे सदमे में चली गईं और आत्महत्या कर ली.गोवा से भी एक छात्र की आत्महत्या की खबर सामने आई थी.
इन घटनाओं ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है और यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर छात्रों के भविष्य और मानसिक स्वास्थ्य की जिम्मेदारी कौन लेगा.
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भाजपा नेताओं पर भी लगाए गंभीर आरोप
राजद प्रवक्ता ने केंद्र सरकार और भाजपा से जुड़े कुछ लोगों पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि राजस्थान भाजपा नेता दिनेश बिवाल के परिवार के पांच बच्चों का चयन सरकारी मेडिकल कॉलेजों में हुआ, जबकि उनका अकादमिक रिकॉर्ड सामान्य बताया जाता रहा है.इनमें से तीन बच्चों का चयन वर्ष 2025 में हुआ था.
हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन विपक्ष इसे परीक्षा प्रणाली में राजनीतिक संरक्षण और प्रभाव का उदाहरण बता रहा है.राजद का आरोप है कि NTA का गठन ही सत्ता से जुड़े लोगों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से किया गया था.
2015 से 2026 तक 87 परीक्षाएं रद्द
राजद प्रवक्ता ने कहा कि 2015 से 2026 के बीच देशभर में 87 बड़ी परीक्षाएं रद्द हुईं.इनमें से कई मामलों की जांच CBI और ED जैसी एजेंसियों को सौंपी गई, लेकिन अब तक किसी बड़े दोषी को सजा नहीं मिली.उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार केवल घोषणाएं करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती.
उन्होंने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने भी 2024 के NEET विवाद के दौरान बड़े-बड़े दावे किए थे, लेकिन उसके बावजूद स्थिति में कोई बड़ा सुधार दिखाई नहीं दे रहा है.
शिक्षा व्यवस्था में सुधार की जरूरत
NEET UG विवाद ने एक बार फिर भारत की परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़ा कर दिया हैं. विपक्ष जहां सरकार और NTA पर हमलावर है, वहीं छात्र और अभिभावक भविष्य को लेकर चिंतित हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल परीक्षा रद्द करना या दोबारा कराना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि तकनीकी सुधार, पारदर्शी निगरानी और जवाबदेही तय करना बेहद जरूरी है.
21 जून को होने वाली पुनर्परीक्षा अब केवल एक परीक्षा नहीं रह गई है, बल्कि यह NTA और केंद्र सरकार की विश्वसनीयता की भी बड़ी परीक्षा बन चुकी है.

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