दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा— कानून का राज बहाल करने, बेरोजगारी, महंगाई और पुलिस दमन के खिलाफ पूरे बिहार में जनता करेगी लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शन
तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना/आरा: भाकपा (माले) ने बिहार में कानून-व्यवस्था, बेरोजगारी, महंगाई और कथित पुलिस दमन के मुद्दों को लेकर 4 जुलाई को राज्यव्यापी विरोध दिवस मनाने की घोषणा की है. पार्टी ने इस आंदोलन का मुख्य नारा काम दो, रोजगार दो, महंगाई रोको, संविधान और कानून का राज स्थापित करो रखा है.
पार्टी के महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने आरा में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि बिहार में सुशासन की जगह पुलिस राज, बुलडोजर राज और फर्जी मुठभेड़ों का दौर चल रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि मॉब लिंचिंग, जाति आधारित हिंसा, दलितों-पिछड़ों पर बढ़ते हमले और पुलिस दमन लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए गंभीर चुनौती बन चुका हैं.
बिहारशरीफ, नगरनौसा और बेलौटी गांव का किया दौरा
प्रेस वार्ता से पहले दीपंकर भट्टाचार्य के नेतृत्व में पार्टी की एक उच्चस्तरीय टीम ने बिहार के विभिन्न इलाकों का दौरा किया. टीम सबसे पहले बिहारशरीफ के गंजपर पहुंची, जहां राजगीर में पीट-पीटकर मारे गए दो दलित युवकों श्रवण पासवान और पिंटू पासवान के परिजनों से मुलाकात की गई.
इसके बाद प्रतिनिधिमंडल नगरनौसा पहुंचा, जहां डिग्री कॉलेज के स्थानांतरण के विरोध में आंदोलन कर रहे नागरिकों पर पुलिस कार्रवाई से प्रभावित लोगों से बातचीत की गई.
दौरे के अंतिम चरण में टीम भोजपुर जिले के शाहपुर प्रखंड स्थित बेलौटी गांव पहुंची और भरत तिवारी के परिजनों से मुलाकात कर पूरे गांव का दौरा किया.इस दौरान पार्टी के राज्य सचिव कुणाल, विधायक संदीप सौरभ, पूर्व विधायक अजीत कुशवाहा सहित अन्य नेता भी मौजूद रहे.
भरत तिवारी मामले में निष्पक्ष जांच की मांग
दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि बेलौटी गांव में भरत तिवारी की बहन ने आरोप लगाया कि सरकार पूरे मामले को प्रभावित करने और दोषियों को बचाने का प्रयास कर रही है. उन्होंने मांग किया कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा जांच पूरी होने तक संबंधित अधिकारियों और जिम्मेदार लोगों को तत्काल निलंबित किया जाए.
उन्होंने कहा कि किसी भी आपराधिक घटना को जातीय नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए. चाहे पीड़ित किसी भी जाति या समुदाय से हो, सभी को समान न्याय मिलना चाहिए.
कानून के राज पर उठाए सवाल
भाकपा (माले) महासचिव ने कहा कि बिहार और देश के सामने सबसे बड़ी चुनौती संविधान और कानून के राज की रक्षा करना है. उनके अनुसार सरकार न्यायिक प्रक्रिया की बजाय एनकाउंटर, बुलडोजर कार्रवाई और पुलिस दमन को शासन का मॉडल बनाने की कोशिश कर रही है.
उन्होंने कहा कि इन मुद्दों को विधानसभा से लेकर सड़क तक मजबूती से उठाया जाएगा और लोकतांत्रिक तरीके से जनआंदोलन चलाया जाएगा.
बेरोजगारी, महंगाई और श्रम कानूनों पर सरकार को घेरा
दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि राज्य और देश में महंगाई लगातार बढ़ रही है जबकि मनरेगा जैसी योजनाओं को कमजोर किया जा रहा है.उन्होंने नए श्रम कानूनों को मेहनतकश वर्ग के अधिकारों के खिलाफ बताया.
उन्होंने आरोप लगाया कि युवा रोजगार की मांग कर रहे हैं, लेकिन उन्हें बेरोजगारी और पेपर लीक जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है.उन्होंने शिक्षा और रोजगार के मुद्दे पर आंदोलन कर रहे छात्र संगठनों का समर्थन करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफे की मांग भी की है .
धार्मिक आस्था से जुड़े मुद्दों पर भी उठाए सवाल
प्रेस वार्ता के दौरान दीपंकर भट्टाचार्य ने राम मंदिर से जुड़े कथित चंदा और भूमि घोटालों के आरोपों का भी उल्लेख किया,उन्होंने कहा कि यदि इस प्रकार के आरोप सामने आए हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास बना रहे.
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अगस्त से आंदोलन का नया चरण शुरू होगा
भाकपा (माले) ने घोषणा की कि आने वाले महीनों में दाम बांधो, काम दो, बुलडोजर राज खत्म करो, कानून का राज स्थापित करो और लोकतंत्र बचाओ जैसे मुद्दों पर व्यापक जनआंदोलन चलाया जाएगा .पार्टी के अनुसार अगस्त महीने से इस अभियान का नया चरण पूरे बिहार में शुरू किया जाएगा.
4 जुलाई को विरोध दिवस में शामिल होने की अपील
पार्टी ने बिहार की जनता से अपील की है कि वे 4 जुलाई को आयोजित राज्यव्यापी विरोध दिवस में बड़ी संख्या में भाग लें और मॉब लिंचिंग, फर्जी मुठभेड़ों, पुलिस दमन, बुलडोजर कार्रवाई, बेरोजगारी, महंगाई तथा संविधान-विरोधी नीतियों के खिलाफ अपनी लोकतांत्रिक आवाज बुलंद करें.
निष्कर्ष
भाकपा (माले) ने 4 जुलाई को होने वाले राज्यव्यापी विरोध दिवस के माध्यम से बिहार में कानून-व्यवस्था, रोजगार, महंगाई और लोकतांत्रिक अधिकारों जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाने का फैसला किया है। पार्टी का कहना है कि आने वाले समय में इन मुद्दों को लेकर व्यापक जनआंदोलन चलाया जाएगा.वहीं इन आरोपों और राजनीतिक बयानों पर संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी.

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