भाकपा माले ने 14 जिलों में 40 लाख लोगों के प्रभावित होने का दावा कर राहत और मुआवजे की मांग उठाई
तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना : बिहार में बाढ़ की स्थिति को लेकर भाकपा माले ने राज्य सरकार और एनडीए पर तीखा हमला बोला है. 10 सितंबर 2026 को जारी प्रेस रिलीज में पार्टी ने बाढ़ पीड़ितों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए सवाल उठाया कि बिहार में पिछले 25 वर्षों से सत्ता में रहने के बावजूद बाढ़ का स्थायी समाधान क्यों नहीं हो पाया.
भाकपा माले का आरोप है कि हर चुनाव में बिहार को बाढ़ से मुक्ति दिलाने का वादा किया जाता है, लेकिन बाढ़ आने के बाद प्रभावित लोगों को पर्याप्त राहत नहीं मिलती. पार्टी ने कहा कि बाढ़ से मुक्ति के नाम पर वोट लेने के बावजूद समस्या लगातार बनी हुई है.
14 जिलों में 40 लाख लोगों के प्रभावित होने का दावा
भाकपा माले के अनुसार, मौजूदा बाढ़ से बिहार के 14 जिले और करीब 40 लाख लोग प्रभावित हुए हैं. पार्टी ने दावा किया है कि बाढ़ के कारण लगभग 100 सड़कें और बांध टूट गए हैं, जबकि करीब 700 ग्रामीण सड़कें पानी में डूबी हुई हैं.
प्रेस रिलीज में राजधानी पटना के भी बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित होने की बात कही गई है. पार्टी के मुताबिक, कई बाढ़ प्रभावित लोग तटबंधों और अन्य ऊंचे स्थानों पर शरण लेने के लिए मजबूर हैं.
बाढ़ प्रभावित परिवारों के सामने भोजन की व्यवस्था के साथ-साथ मवेशियों के लिए चारे की समस्या भी गंभीर चुनौती बन गई है. भाकपा माले ने कहा कि कई लाख एकड़ में लगी धान, मक्का और अन्य फसलें नष्ट होने का दावा किया गया है. पार्टी ने यह भी कहा कि कई स्थानों पर लोगों की मृत्यु हुई है.
सरकारी राहत व्यवस्था पर उठाए सवाल
भाकपा माले ने सरकारी राहत और व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए हैं. पार्टी का आरोप है कि राहत सामग्री के वितरण और व्यवस्था के नाम पर कथित तौर पर अनियमितताएं हो रही हैं. पार्टी ने सरकारी प्रयासों को नाकाफी बताते हुए कहा कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में व्यापक तबाही की स्थिति है.
हालांकि, ये सभी आरोप भाकपा माले द्वारा जारी प्रेस रिलीज में किए गए दावे और आरोप हैं. इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में उपलब्ध सामग्री के आधार पर नहीं की जा रही है.
गृह मंत्री के पुराने चुनावी वादे का जिक्र
अपने बयान में भाकपा माले ने गृह मंत्री की चुनावी सभा में बिहार को बाढ़ से मुक्ति दिलाने के कथित वादे का भी जिक्र किया. पार्टी ने सवाल उठाया कि लगातार चुनावी वादों के बावजूद 25 वर्षों में बाढ़ की समस्या का स्थायी समाधान क्यों नहीं हो सका.
भाकपा माले ने यह भी आरोप लगाया कि गृह मंत्री बाढ़ की मौजूदा स्थिति का निरीक्षण करने बिहार नहीं आए. पार्टी ने इसी मुद्दे को सरकार की जवाबदेही से जोड़ते हुए एनडीए से बाढ़ के स्थायी समाधान को लेकर जवाब मांगा है.
समुचित राहत और मुआवजे की मांग
भाकपा माले ने सरकार से बाढ़ पीड़ितों के लिए पर्याप्त राहत व्यवस्था करने और प्रभावित परिवारों को समुचित मुआवजा देने की मांग की है. पार्टी के मुताबिक, प्रभावित लोगों की तत्काल जरूरतों को प्राथमिकता देते हुए भोजन, मवेशियों के चारे और अन्य जरूरी सहायता की व्यवस्था की जानी चाहिए.
पार्टी ने बाढ़ से हुए फसल नुकसान और अन्य क्षति के मद्देनजर प्रभावित परिवारों के लिए मुआवजे की मांग भी उठाई है.
बाढ़ प्रभावितों की मदद के लिए राज्यव्यापी अभियान
प्रेस रिलीज के अनुसार, भाकपा माले ने बाढ़ पीड़ितों की सहायता के लिए राज्यव्यापी अभियान शुरू किया है. पार्टी का कहना है कि अलग-अलग जिलों में उसकी जिला कमिटियां प्रभावित लोगों की मदद में जुटी हुई हैं और बाढ़ पीड़ितों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास कर रही हैं.
ये भी पढ़े :बिहार में बाढ़ से 13 जिले प्रभावित, भाकपा माले ने मांगा मुआवजा
ये भी पढ़े :बिहार बाढ़ पर तेजस्वी यादव ने PM से मांगा 5 हजार करोड़
स्थायी समाधान पर फिर उठा सवाल
बिहार में हर वर्ष बाढ़ की चुनौती के बीच भाकपा माले ने एक बार फिर सरकार की बाढ़ प्रबंधन नीति और दीर्घकालिक समाधान पर सवाल खड़ा किया है. पार्टी का मुख्य सवाल है कि यदि दशकों से बाढ़ से मुक्ति का वादा किया जा रहा है, तो इसके बावजूद बड़ी आबादी को हर साल बाढ़ की मार क्यों झेलनी पड़ती है.
मौजूदा स्थिति में तत्काल राहत के साथ-साथ प्रभावित परिवारों के नुकसान का आकलन और उचित मुआवजा महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। वहीं, बाढ़ की समस्या के स्थायी समाधान के लिए दीर्घकालिक योजना और उसकी प्रभावी क्रियान्वयन व्यवस्था पर भी सार्वजनिक बहस जरूरी है.

I am a blogger and social media influencer. I have about 5 years experience in digital media and news blogging.


















