बेहरावां चकिया मामला: 32 महिलाओं की रिहाई के लिए ऐपवा का प्रदर्शन

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Ajit Kumar

बिहार
पटना में बेहरावां चकिया मामले को लेकर ऐपवा के प्रदर्शन में शामिल महिलाएं

पटना में सैकड़ों महिलाओं ने निकाला मार्च, तीन लोगों की मौत की जांच, पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई और मुसहर परिवारों के लिए मुआवजे की मांग उठाई

तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना, 12 अक्टूबर 2026:बिहार के पटना जिले में बेहरावां चकिया गांव की महिलाओं की गिरफ्तारी और तीन लोगों की मौत के मामले को लेकर अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोसिएशन (ऐपवा) ने पटना में प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों ने बेऊर जेल में बंद 32 महिलाओं और सात पुरुषों को तत्काल रिहा करने, संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई करने तथा प्रभावित मुसहर परिवारों के लिए वैकल्पिक रोजगार और मुआवजे की व्यवस्था करने की मांग की.

प्रदर्शन में पीड़ित परिवारों के सदस्यों के साथ सैकड़ों महिलाएं शामिल हुईं. प्रदर्शन का नेतृत्व ऐपवा की महासचिव मीना तिवारी और बिहार विधान परिषद की सदस्य शशि यादव ने किया.प्रदर्शनकारियों ने बेहरावां चकिया की घटना में पुलिस की भूमिका की जांच कराने और जिम्मेदारी तय करने की मांग उठाई.

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गेट पब्लिक लाइब्रेरी से गर्दनीबाग तक निकाला मार्च

ऐपवा की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, प्रदर्शन में शामिल महिलाएं पटना के गेट पब्लिक लाइब्रेरी से मार्च निकालते हुए गर्दनीबाग धरनास्थल पहुंचीं. वहां प्रशासन की ओर से गेट बंद किए जाने के बाद प्रदर्शनकारी धरनास्थल पर ही बैठ गईं. उन्होंने नारेबाजी की और सभा आयोजित कर अपनी मांगें रखीं.

सभा को ऐपवा महासचिव मीना तिवारी, विधान परिषद सदस्य शशि यादव और पूर्व विधायक गोपाल रविदास ने संबोधित किया. इस दौरान बेहरावां चकिया की पीड़ित महिलाओं ससीमा देवी, खुशबू कुमारी और प्रीति कुमारी ने अपने साथ हुई घटनाओं का जिक्र करते हुए कार्रवाई की मांग की है.

प्रदर्शन में कामरेड अमर, जितेंद्र, ऐपवा पटना नगर सचिव अनुराधा, ऐपवा नेत्री अफ्शां जबीं, राखी मेहता, रेखा देवी, नीलम देवी और विभा गुप्ता सहित सैकड़ों महिलाएं शामिल हुईं.

32 महिलाओं की गिरफ्तारी पर ऐपवा ने उठाए सवाल

ऐपवा महासचिव मीना तिवारी ने आरोप लगाया कि 4 अक्टूबर को पटना जिले के पिपरा थाना अंतर्गत बेहरावां चकिया गांव में शराब की तलाश के नाम पर पुलिस ने छापेमारी की. उनके अनुसार, इस दौरान वहां मौजूद महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार किया गया, लड़कियों के दुपट्टे खींचे गए और गाली-गलौज की गई. उन्होंने दावा किया कि इस कार्रवाई में 32 महिलाओं को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया, जिनमें कई छोटे बच्चों की मां हैं.

मीना तिवारी ने कहा कि महिलाओं के साथ कथित दुर्व्यवहार और उनकी गिरफ्तारी गंभीर सवाल खड़ा करता हैं.उन्होंने सभी गिरफ्तार महिलाओं की तत्काल रिहाई की मांग करते हुए कहा कि पुलिस की कार्रवाई के दौरान महिलाओं की गरिमा और अधिकारों का सम्मान किया जाना चाहिए.

ऐपवा ने आरोप लगाया कि बिहार में दलित और महादलित समुदायों के लोगों को पुलिसिया उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है.संगठन ने राज्य सरकार से मामले में हस्तक्षेप करने और प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाने की मांग की है .

नदी में डूबने से दो लोगों की मौत का आरोप

प्रदर्शन के दौरान मीना तिवारी ने दावा किया कि पुलिस की छापेमारी से डरकर कुछ ग्रामीण पास की नदी में कूद गए थे. उनके अनुसार, ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस ने पानी के भीतर लोगों पर पत्थर फेंके और उन्हें डूबने दिया, जिससे रामू मांझी और अशोक मांझी की मौत हो गई.

यह आरोप गंभीर प्रकृति का है.हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि और घटना की आधिकारिक जांच से संबंधित जानकारी प्रेस विज्ञप्ति में उपलब्ध नहीं कराई गई है. ऐसे में मौतों की परिस्थितियों, पुलिस की भूमिका और जिम्मेदारी का निर्धारण निष्पक्ष जांच के आधार पर किया जाना जरूरी है

ऐपवा ने इस मामले में पिपरा थाना प्रभारी और संबंधित पुलिसकर्मियों को निलंबित करने, पूरे प्रकरण की जांच कराने तथा दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है .

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राजा बाबू की मौत का मामला भी उठाया

सभा में ऐपवा ने इसी पंचायत से जुड़े राजा बाबू की मौत का मामला भी उठाया. मीना तिवारी के अनुसार, 11 सितंबर को राजा बाबू को शराब पीने के आरोप में तलाशने गई पुलिस ने उनके पिता सुरेश महतो, मां और वयस्क बहन को गिरफ्तार किया था. उन्होंने आरोप लगाया कि परिवार के सदस्यों को देर रात तक थाने में प्रताड़ित किया गया.

मीना तिवारी ने दावा किया कि मां और बहन के साथ कथित दुर्व्यवहार से अपमानित होकर राजा बाबू ने आत्महत्या कर ली. उन्होंने यह भी कहा कि परिवार ने उच्च अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन उसे न्याय नहीं मिला.

शशि यादव ने थाना प्रभारी को निलंबित करने की मांग की

विधान परिषद सदस्य शशि यादव ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि बिहार में महिलाएं और महादलित समुदाय सुरक्षित नहीं हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि महिलाओं और महादलित परिवारों को उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है.

शशि यादव ने पिपरा थाना प्रभारी को निलंबित करने और जेल में बंद महिलाओं को तत्काल रिहा करने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि यदि किसी मामले में कानून के उल्लंघन का संदेह है, तो उसकी जांच कानूनी प्रक्रिया के तहत होनी चाहिए. किसी भी समुदाय को रोजगार और पुनर्वास के विकल्प के बिना उजाड़ना या प्रताड़ित करना उचित नहीं है.

मुख्यमंत्री को सौंपे ज्ञापन में रखीं पांच मांगें

प्रदर्शन के बाद ऐपवा ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर सरकार से कार्रवाई की मांग की. संगठन की ओर से रखी गई प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:

बेऊर जेल में बंद 32 महिलाओं और सात पुरुषों को तत्काल रिहा किया जाए.

रामू मांझी, अशोक मांझी और राजा बाबू की मौत के मामलों में जिम्मेदारी तय की जाए। पिपरा थाना प्रभारी और संबंधित पुलिसकर्मियों को निलंबित कर पूरे मामले की जांच कराई जाए तथा दोषियों पर कार्रवाई की जाए.

महिलाओं के साथ कथित दुर्व्यवहार करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए.

वैकल्पिक रोजगार या सरकारी नौकरी की व्यवस्था किए बिना मुसहर समुदाय के लोगों को शराब के नाम पर उजाड़ने और प्रताड़ित करने की कार्रवाई बंद की जाए.

हर मुसहर टोली में वैकल्पिक रोजगार की व्यवस्था की जाए और प्रभावित परिवारों को मुआवजा दिया जाए.

अब जांच और प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी निगाहें

बेहरावां चकिया मामले में ऐपवा का प्रदर्शन पुलिस कार्रवाई, महिलाओं की गिरफ्तारी, दो लोगों की मौत से जुड़े आरोपों और मुसहर परिवारों के पुनर्वास जैसे मुद्दों को सामने लाता है.संगठन ने राज्य सरकार से मांग की है कि गिरफ्तार लोगों के मामलों की समीक्षा की जाए और कथित पुलिस दुर्व्यवहार की निष्पक्ष जांच कराई जाए.

इस मामले में आगे की कार्रवाई के लिए तीन अहम सवाल हैं—गिरफ्तार महिलाओं और पुरुषों की रिहाई पर प्रशासन क्या कदम उठाता है, मौतों की परिस्थितियों की जांच कैसे होती है और प्रभावित परिवारों के लिए रोजगार तथा मुआवजे की व्यवस्था की जाती है या नहीं.

फिलहाल, ऐपवा ने अपनी मांगों को मुख्यमंत्री तक पहुंचा दिया है. अब इन मांगों पर सरकार और संबंधित प्रशासन की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी.

स्रोत: ऐपवा की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति, पटना, 12 अक्टूबर 2026। इस रिपोर्ट में संगठन के आरोपों और मांगों को उसके बयान के रूप में प्रस्तुत किया गया है;.

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