बिहार विधान परिषद चुनाव: दरभंगा शिक्षक सीट पर कांग्रेस को माले का समर्थन

| BY

Ajit Kumar

बिहार
बिहार विधान परिषद चुनाव में कांग्रेस और सीपीआई उम्मीदवारों को समर्थन देने की घोषणा करते भाकपा-माले के राज्य सचिव कुणाल

तिरहुत स्नातक सीट पर सीपीआई उम्मीदवार के पक्ष में भाकपा-माले, अन्य सीटों पर एनडीए को हराने की अपील

तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना, 19 अक्टूबर 2026: बिहार विधान परिषद चुनाव 2026 को लेकर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन यानी भाकपा-माले ने अपने चुनावी समर्थन को लेकर महत्वपूर्ण घोषणा की है. पार्टी ने दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस उम्मीदवार डॉ. मदन मोहन झा और तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) के उम्मीदवार संजय कुमार सिंह को समर्थन देने का फैसला किया है.इसके साथ ही पार्टी ने अन्य सीटों पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के उम्मीदवारों को हराने की अपील की है.

पटना से 19 अक्टूबर को जारी प्रेस विज्ञप्ति में भाकपा-माले के राज्य सचिव कुणाल ने पार्टी की चुनावी रणनीति और समर्थन के फैसले की जानकारी दी. पार्टी के मुताबिक, दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से उसके उम्मीदवार छात्र नेता संदीप चौधरी चुनाव मैदान में हैं. वहीं, इंडिया गठबंधन की सहयोगी पार्टियों की पहले से जीती हुई सीटों पर गठबंधन के उम्मीदवारों का समर्थन करने का निर्णय लिया गया है.

दरभंगा शिक्षक और तिरहुत स्नातक सीट पर समर्थन

भाकपा-माले ने दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में कांग्रेस के डॉ. मदन मोहन झा का समर्थन करने की घोषणा की है. दूसरी ओर, तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में पार्टी सीपीआई उम्मीदवार संजय कुमार सिंह के पक्ष में खड़ी होगी.

पार्टी ने स्पष्ट किया है कि दरभंगा स्नातक सीट पर वह अपना उम्मीदवार उतार रही है. यहां छात्र नेता संदीप चौधरी भाकपा-माले की ओर से चुनाव लड़ रहे हैं.इस तरह पार्टी ने अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों में अपने उम्मीदवार के साथ-साथ इंडिया गठबंधन की सहयोगी पार्टियों के उम्मीदवारों को समर्थन देने की रणनीति अपनाई है.

भाकपा-माले की इस घोषणा का मुख्य उद्देश्य गठबंधन के बीच चुनावी तालमेल को मजबूत करना और उन सीटों पर सहयोगी उम्मीदवारों के पक्ष में समर्थन जुटाना है, जहां पार्टी ने स्वयं उम्मीदवार नहीं उतारा है.

संविधान और लोकतंत्र की रक्षा को बनाया प्रमुख मुद्दा

प्रेस विज्ञप्ति में भाकपा-माले के राज्य सचिव कुणाल ने संविधान, लोकतंत्र और जनता के अधिकारों की रक्षा को मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में महत्वपूर्ण सवाल बताया. उन्होंने भाजपा की राजनीति पर निशाना साधते हुए लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता, चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता और विपक्ष की भूमिका को लेकर सवाल उठाए.

कुणाल ने बिहार में वोट चोरी के आरोपों और सरकारी संस्थाओं के कथित दुरुपयोग से जुड़े मुद्दों का उल्लेख करते हुए लोकतांत्रिक जवाबदेही सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया.

यह आरोप और राजनीतिक आकलन भाकपा-माले की ओर से जारी बयान का हिस्सा हैं.चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता और संस्थाओं की निष्पक्षता से जुड़े सवालों पर संबंधित पक्षों के तर्क तथा उपलब्ध आधिकारिक तथ्यों को अलग-अलग समझना जरूरी है.

गरीबों, दलितों और वंचितों के अधिकारों का मुद्दा भी उठाया

भाकपा-माले ने चुनावी समर्थन की घोषणा के साथ सामाजिक न्याय और कमजोर तबकों के अधिकारों को भी प्रमुखता दी है.कुणाल ने आरोप लगाया कि बिहार में गरीबों, दलितों, पिछड़ों और वंचित समुदायों के अधिकारों पर हमले हो रहे हैं.

उन्होंने गरीबों के घरों पर बुलडोजर चलाए जाने, जमीन से बेदखली और आजीविका के संकट जैसे मुद्दों का उल्लेख करते हुए राज्य सरकार की आलोचना की.उनके मुताबिक, इन समस्याओं पर सरकार को प्रभावी कदम उठाने चाहिए, लेकिन इसके विपरीत गरीबों को परेशान किया जा रहा है.

कुणाल ने लोकतंत्र की अवधारणा को केवल चुनाव कराने तक सीमित न मानते हुए संवैधानिक अधिकारों, असहमति की आवाज और सामाजिक न्याय की रक्षा को भी इसका आवश्यक हिस्सा बताया.

इन मुद्दों को सामने रखकर भाकपा-माले ने विधान परिषद चुनाव को व्यापक राजनीतिक और सामाजिक सवालों से जोड़ने की कोशिश की है. हालांकि, प्रेस विज्ञप्ति में उल्लिखित आरोपों के समर्थन में अलग से कोई दस्तावेज या विस्तृत आंकड़े उपलब्ध नहीं कराए गए हैं.

ये भी पढ़े :बेहरावां चकिया मामला: 32 महिलाओं की रिहाई के लिए ऐपवा का प्रदर्शन

अन्य सीटों पर एनडीए को हराने की अपील

भाकपा-माले ने मतदाताओं से संविधान, लोकतंत्र, सामाजिक न्याय और जनता के अधिकारों को ध्यान में रखकर मतदान करने की अपील की है.पार्टी ने कहा है कि बिहार में लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा और जनहित के मुद्दों को मजबूत करने के लिए भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए को हराने की जरूरत है.

यह अपील पार्टी की व्यापक राजनीतिक रणनीति को दर्शाती है, जिसमें अपने उम्मीदवार को समर्थन देने के साथ-साथ गठबंधन के सहयोगियों के पक्ष में चुनावी एकजुटता पर जोर दिया गया है.

दरभंगा शिक्षक सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार और तिरहुत स्नातक सीट पर सीपीआई उम्मीदवार के समर्थन की घोषणा इसी रणनीति का हिस्सा है. वहीं, दरभंगा स्नातक सीट पर भाकपा-माले अपने उम्मीदवार संदीप चौधरी के साथ चुनाव मैदान में है.

बिहार विधान परिषद चुनाव में क्या है राजनीतिक महत्व?

विधान परिषद चुनाव में शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की अपनी अलग भूमिका होती है. इन क्षेत्रों में संबंधित निर्वाचन क्षेत्र के पात्र मतदाता मतदान करते हैं.इसलिए इन सीटों पर उम्मीदवारों का समर्थन, स्थानीय मुद्दे और संगठनों की सक्रियता चुनावी मुकाबले को प्रभावित करने वाले कारक हो सकते हैं.

भाकपा-माले की घोषणा से यह स्पष्ट होता है कि पार्टी कुछ सीटों पर अपने उम्मीदवार को मैदान में उतारते हुए अन्य सीटों पर सहयोगी दलों के उम्मीदवारों को समर्थन दे रही है. इससे इंडिया गठबंधन के भीतर चुनावी तालमेल का संदेश देने की कोशिश भी दिखाई देती है.

हालांकि, इस घोषणा से किसी उम्मीदवार की जीत या हार का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता.चुनावी परिणाम मतदाताओं के समर्थन, उम्मीदवारों की स्थिति और अन्य स्थानीय परिस्थितियों पर निर्भर करेंगे.

निष्कर्ष

बिहार विधान परिषद चुनाव 2026 में भाकपा-माले ने दरभंगा शिक्षक सीट पर कांग्रेस के डॉ. मदन मोहन झा और तिरहुत स्नातक सीट पर सीपीआई के संजय कुमार सिंह को समर्थन देने का फैसला किया है. दरभंगा स्नातक सीट पर पार्टी के उम्मीदवार संदीप चौधरी चुनाव लड़ेंगे.इसके अलावा, पार्टी ने अन्य सीटों पर एनडीए उम्मीदवारों को हराने की अपील की है. अब इन घोषणाओं का चुनावी असर कितना होगा, यह संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाताओं के रुख और चुनाव परिणामों से स्पष्ट होगा.

स्रोत: भाकपा-माले की ओर से पटना में 19 अक्टूबर 2026 को जारी प्रेस विज्ञप्ति के आधार पर .

Trending news

Leave a Comment