भाजपा मंत्री पर आरोपियों को बचाने का गंभीर आरोप
तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना, 24 जून :बिहार के दरभंगा जिले के जाले प्रखंड अंतर्गत दोघरा गांव में एक नाबालिग छात्रा के साथ दुष्कर्म और हत्या की वीभत्स घटना सामने आई है.मृतका एक गरीब मजदूर मुस्लिम परिवार से ताल्लुक रखती थी.इस मामले में भाकपा–माले (CPI–ML) ने स्थानीय भाजपा मंत्री पर आरोपियों को संरक्षण देने का आरोप लगाते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की है.
घटनास्थल पर पहुँची माले की जांच टीम
घटना की जानकारी मिलते ही माले की एक उच्चस्तरीय टीम 23 जून की शाम को दोघरा गांव पहुँची. जांच दल में माले की एमएलसी शशि यादव, पूर्व विधायक मनोज मंजिल, मिथिलांचल प्रभारी धीरेंद्र झा, दरभंगा जिला सचिव बैद्यनाथ यादव, इंसाफ मंच के राज्य उपाध्यक्ष नेयाज अहमद और अन्य स्थानीय नेता शामिल थे. उन्होंने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर घटना की पूरी जानकारी जुटाई.
क्या हुआ था दोघरा में?
मृतका स्थानीय स्कूल में आठवीं कक्षा की छात्रा थी. जानकारी के मुताबिक, उसकी नियमित रूप से एक युवक द्वारा छेड़छाड़ की जा रही थी, जिसकी दुकान स्कूल के पास है. 21 जून को छात्रा पत्ते बीनने गाछी गई थी, जहां से उसे अगवा किया गया.आरोप है कि दो-तीन युवकों ने मिलकर उसके साथ दुष्कर्म किया और बाद में उसकी हत्या कर दी. अगले दिन उसका शव गांव के पास स्थित छोड़ाही तालाब में बरामद हुआ.
एफआईआर दर्ज करने से भी हिचकिचाया थाना
परिजनों का आरोप है कि लड़की के लापता होने के बाद जब वे थाने पहुँचे, तो पुलिस ने शिकायत दर्ज करने से इनकार कर दिया. शव मिलने के बाद भी एफआईआर दर्ज नहीं की गई. आखिरकार, जब स्थानीय नौजवानों ने विरोध किया, तब जाकर मामला दर्ज किया गया. लेकिन माले नेताओं का कहना है कि अब भी पुलिस भाजपा मंत्री के दबाव में आरोपियों को बचाने में जुटी है.
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प्रशासन पर पक्षपात के आरोप
भाकपा–माले का आरोप है कि प्रशासन, खासकर स्थानीय थाना, भाजपा के एक प्रभावशाली मंत्री के दबाव में कार्य कर रहा है. न केवल प्राथमिकी दर्ज करने में आनाकानी की गई, बल्कि अब उल्टे विरोध कर रहे युवाओं को फर्जी मामलों में फंसाने की धमकी दी जा रही है. पीड़ित परिवार पर मुआवजे के बदले चुप्पी साधने का दबाव बनाया जा रहा है.
सीतामढ़ी की घटनाओं से जोड़कर उठाए सवाल
माले नेताओं ने इस घटना को नानपुर (सीतामढ़ी) की हालिया वारदातों से जोड़ते हुए कहा है कि इन क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था की स्थिति बेहद खराब हो चुकी है.उन्होंने आरोप लगाया कि अपराधियों को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है और यह सामाजिक न्याय और संविधान पर सीधा हमला है.
माले की प्रमुख मांगें
जांच टीम ने प्रशासन के समक्ष निम्नलिखित माँगें रखी हैं:
सभी नामजद अभियुक्तों की अविलंब गिरफ्तारी हो.
पोस्टमार्टम प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच हो – यह स्पष्ट किया जाए कि यह कार्य एक डॉक्टर ने किया या मेडिकल बोर्ड द्वारा.
बेसरा और अन्य तकनीकी साक्ष्य की वैज्ञानिक जांच करवाई जाए.
पूरे मामले की न्यायिक निगरानी में उच्चस्तरीय जांच हो.
धीरेंद्र झा का आरोप
माले के मिथिलांचल प्रभारी धीरेंद्र झा ने कहा कि जाले विधानसभा क्षेत्र “अपराधियों और लंपटों का अड्डा” बन चुका है, जहां सत्ता के संरक्षण में अपराधियों को खुली छूट दी जा रही है. उन्होंने कहा कि बलात्कार और हत्या जैसे मामलों को भी छिपाने की कोशिश हो रही है, और इसे केवल बलात्कार के तौर पर दर्शाया जा रहा है.
निष्कर्ष:
यह घटना न केवल एक बच्ची के जीवन को नष्ट कर देने वाली है, बल्कि यह इस बात का भी संकेत है कि कैसे राजनीतिक दबाव और प्रशासनिक निष्क्रियता समाज में न्याय और सुरक्षा की अवधारणा को कमजोर कर रही है. अब देखना होगा कि प्रशासन इन मांगों पर कितनी तत्परता से कार्रवाई करता है, या फिर यह मामला भी अन्य कई मामलों की तरह ठंडे बस्ते में चला जाएगा.

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