रोहतास से जनसैलाब की शुरुआत, लोकतंत्र की असली ताकत दिखाने निकले युवा नेता
तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना, 16 अगस्त:बिहार में लोकतंत्र और मताधिकार की रक्षा के लिये विपक्षी गठबंधन, इंडिया महागठबंधन एक निर्णायक कदम उठाने जा रहा है. 17 अगस्त से रोहतास जिले के सासाराम से ‘वोट अधिकार यात्रा’ की शुरुआत होगा.जो 16 दिनों तक चलेगा और 1 सितंबर को समाप्त हो जायेगा.इस यात्रा का नेतृत्व नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी करेंगे. यात्रा का उद्देश्य वोटर अधिकारों की रक्षा करना और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाना है.

राजधानी पटना स्थित राष्ट्रीय जनता दल के प्रदेश कार्यालय में आज आयोजित संवाददाता सम्मेलन में आरजेडी के प्रदेश मुख्य प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव और प्रवक्ता एजाज अहमद ने इस यात्रा की रूपरेखा प्रस्तुत किया.उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग अब, वोट की चोरी नहीं, डकैती कर रहा है और सत्ता पक्ष के इशारों पर काम कर रहा है.
वोटर लिस्ट से 65 लाख नाम गायब, सुप्रीम कोर्ट ने भी उठाए सवाल
शक्ति सिंह यादव ने कहा कि बिहार में मतदाता सूची से लगभग 65 लाख नाम बिना किसी स्पष्ट कारण के हटा दिया गया है. इस मामले को सबसे पहले तेजस्वी यादव ने उठाया और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल खड़ा किया. उन्होंने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय ने भी इस मुद्दे पर संज्ञान लिया है और चुनाव आयोग को निर्देश दिया है कि वह विलोपित मतदाताओं की सूची सार्वजनिक करे – जिला से लेकर बूथ स्तर तक.
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चुनाव आयोग पर गुजरात मॉडल अपनाने का आरोप
प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि बिहार में गुजरात मॉडल का प्रयोग करते हुए चुनावी हेराफेरी किया जा रहा है. उदाहरण स्वरूप, 2024 में गांधीनगर लोकसभा क्षेत्र में मतदान करने वाले भाजपा नेता भिखुभाई दिलशानिया का नाम पटना के बांकीपुर विधानसभा के एक बूथ पर दर्ज मिला है. इससे चुनावी व्यवस्था की गंभीर खामियों की ओर इशारा होता है.
आधार से माता-पिता का नाम हटाना: मतदाता पहचान पर संकट?
चुनाव आयोग द्वारा आधार कार्ड से माता-पिता का नाम हटाए जाने को लेकर भी सवाल उठाया गया है. शक्ति सिंह यादव ने कहा कि इससे मतदाताओं को अपने अस्तित्व को साबित करना और कठिन हो गया है. उन्होंने इसे, लोकतंत्र के खिलाफ एक साजिश करार दिया है.
इवीएम पर भी उठे गंभीर सवाल
हरियाणा के पानीपत में हुए पंचायत चुनाव के एक मामले का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि वहां सर्वोच्च न्यायालय ने वोटों की दोबारा गिनती करवाई और हारे हुए प्रत्याशी को विजेता घोषित किया.इससे ईवीएम की विश्वसनीयता पर एक बार फिर सवाल उठ खड़ा हुआ है . उन्होंने दावा किया कि 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में भी इसी तरह की हेराफेरी हुआ था . जिसका असर खुद उनके क्षेत्र हिलसा में देखा गया.
जनता को किया जागरूक रहने का आह्वान
संवाददाता सम्मेलन में आरजेडी नेताओं ने सभी मतदाताओं और विपक्षी दलों से अपील किया है कि वे अपने-अपने बूथों पर सतर्क रहें और,गुजरात मॉडल, को बिहार में लागू होने से रोकें. उन्होंने स्पष्ट किया कि इस बार ,वोट चोरों और ईवीएम में हेराफेरी,करने वालों को जनता मुंहतोड़ जवाब देगा.इस अवसर पर आरजेडी व्यवसायिक प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष गोपाल प्रसाद गुप्ता और अतिपिछड़ा प्रकोष्ठ के उपेंद्र चन्द्रवंशी भी मौजूद थे.
निष्कर्ष
वोट अधिकार यात्रा’ केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं है बल्कि लोकतंत्र और संविधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए एक अभियान बनता जा रहा है. आने वाले 16 दिन बिहार की राजनीति में निर्णायक साबित हो सकता हैं.जहां मतदाता अधिकार, पारदर्शी चुनाव और चुनाव आयोग की निष्पक्षता जैसे मूलभूत मुद्दे फिर से केंद्र में होंगा.

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