SSD यह स्पष्ट संदेश दे रहा है कि बाबा साहेब का सपना अभी अधूरा है
तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना,20 अगस्त: बख्तियारपुर विधानसभा क्षेत्र में आज का दिन सामाजिक न्याय के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज किया गया. जब समतामूलक संग्राम दल (SSD) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर को पुष्प अर्पित कर उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि दिया.इस अवसर पर SSD के प्रदेश सचिव श्री ललन पासवान भी मौजूद रहे, जिन्होंने विचार और क्रांति के प्रतीक बाबा साहेब के मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प दोहराया.

जिनसे मिला भारत को नया विधान, बाबा साहेब को समर्पित SSD की ऐतिहासिक पहल
बाबा साहेब डॉ. आंबेडकर ने भारत को वह संविधान दिया, जिसमें हर नागरिक को बराबरी का हक़ सुनिश्चित किया गया. SSD का यह आयोजन केवल पुष्प अर्पण तक सीमित नहीं था.बल्कि यह उस विचार की पुनः स्थापना थी. जिसमें जात-पात, ऊँच-नीच और भेदभाव के लिए कोई जगह नहीं है.
राष्ट्रीय अध्यक्ष ने अपने भाषण में जोर देकर कहा कि ,जब तक समाज में असमानता है, तब तक हमारी लड़ाई जारी रहेगा.बाबा साहेब का सपना, SSD की प्रेरणा है.
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समता-संग्राम की चेतना: SSD की आवाज़ बना हर वंचित वर्ग
इस आयोजन ने स्पष्ट कर दिया है कि SSD केवल सत्ता की राजनीति नहीं बल्कि सामाजिक बदलाव की गहराई तक उतरने वाला आंदोलन है. समाजिक बदलाव की ठोस क्रांति है.SSD उन सभी वंचित, शोषित, पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों की आवाज़ है, जो आज भी न्याय से वंचित हैं.

प्रदेश सचिव ललन पासवान ने कहा कि,हमारा मंज़िल सत्ता नहीं, समता है — और यही हमारी असली क्रांति है. हम बाबा साहेब के दिखाए रास्ते पर चलकर एक नया भारत बनाएंगे.
भारत को मिला एक नया विधान, भारत को मिली एक नई पहचान
बाबा साहेब आंबेडकर केवल संविधान निर्माता नहीं थे; वे एक युगद्रष्टा, एक सामाजिक सुधारक, और करोड़ों वंचितों के हक़ की आवाज़ थे.उन्होंने भारत को ऐसा संविधान दिया जिसमें हर वर्ग, हर जाति, हर लिंग, और हर मत को समान अधिकार की गारंटी दी गई.
उनकी सोच और दृष्टिकोण ने भारत को केवल एक लोकतंत्र नहीं, बल्कि एक समता आधारित लोकतंत्र बनाया — जहां राजा और रंक एक ही कानून के दायरे में आते हैं.
संविधान निर्माता नहीं, युग-निर्माता थे बाबा साहेब: SSD ने किया विचारों का स्मरण
कार्यक्रम के दौरान बाबा साहेब के योगदानों को याद किया गया — उन्होंने सिर्फ एक संविधान नहीं बनाया. बल्कि एक नए भारत की नींव रखी. उनका सपना था ऐसा राष्ट्र जहाँ न कोई ऊँचा हो, न नीचा, जहाँ हर नागरिक को समान अवसर मिले.
इन्हीं विचारों की प्रेरणा आज SSD जैसे संस्थानों की राह तय करती है. SSD मानता है कि बाबा साहेब केवल इतिहास की शख्सियत नहीं. आज की ज़रूरत हैं.
SSD का संकल्प: जब तक अंतिम जन सुरक्षित नहीं, तब तक संग्राम जारी रहेगा
कार्यक्रम का समापन एक बुलंद संकल्प के साथ हुआ — कि SSD बाबा साहेब के मिशन को थामे रखेगा, जब तक समाज में आखिरी व्यक्ति को न्याय नहीं मिल जाता. SSD का यह कदम आने वाले समय में बिहार और देश की राजनीति में समता की नई लहर ला सकता है.
कार्यक्रम की कुछ झलकियाँ:
बाबा साहेब की प्रतिमा पर पुष्प अर्पण करते SSD अध्यक्ष
ललन पासवान और कार्यकर्ताओं के साथ समूहिक प्रतिज्ञा
संविधान बचाओ, समता बढ़ाओ” का सामूहिक नारा
विशेष संपादकीय टिप्पणी:
“बाबा साहेब की सोच को अगर किसी ने आज की राजनीति में ज़िंदा रखा है, तो वह जमीनी स्तर पर लड़ने वाले ऐसे संगठन हैं, जो सत्ता नहीं, समता की राजनीति करते हैं.

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