बिहार की सड़कों पर मौत का कहर

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Ajit Kumar

बिहार
बिहार की सड़कों पर मौत का कहर सिगरियामा हादसा और सरकार की नाकामी

सिगरियामा हादसा और सरकार की नाकामी:माले

तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना, 23 अगस्त 2025 — बिहार में सड़क हादसों की भयावहता ने एक बार फिर चेतावनी की घंटी बजा दी है. पटना जिले के शाहजहांपुर थाना क्षेत्र के सिगरियामा में हुए दर्दनाक हादसे में 8 लोगों की जान चली गई है, सभी मृतक नालंदा के हिलसा थाना क्षेत्र के मलामा गांव के निवासी थे. इस हृदयविदारक दुर्घटना ने राज्य सरकार की सड़क सुरक्षा को लेकर बरती जा रही घोर लापरवाही को फिर उजागर कर दिया है.

भाकपा (माले) ने जताया शोक, सरकार को ठहराया जिम्मेदार

भाकपा (माले) के राज्य सचिव कुणाल ने हादसे पर गहरा दुख जताते हुए मृतकों के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना प्रकट की है. उन्होंने साफ कहा कि बिहार में सड़क दुर्घटनाओं का ग्राफ लगातार ऊपर जा रहा है. लेकिन सरकार की तरफ से कोई ठोस रणनीति या सुरक्षा का इंतजाम ज़मीनी स्तर पर नजर नहीं आता है.

बिना किसी प्लानिंग के फोरलेन और हाईवे तो बना दिया गया. लेकिन उन पर चलने वाले आम नागरिक, खासकर पैदल यात्रियों और स्कूली बच्चों की सुरक्षा के लिए कुछ नहीं किया गया है- कुणाल

मुआवज़े की खानापूरी और संवेदनहीन शासन

कुणाल ने नीतीश सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि हर हादसे के बाद केवल मुआवज़े की औपचारिक घोषणा करके सरकार अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेती है. उन्होंने इसे एनडीए सरकार की,संवेदनहीनता और नीतिगत विफलता का जीवंत उदाहरण बताया है.

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मांगें और समाधान: केवल मुआवजा नहीं, ठोस ढांचा चाहिये.

भाकपा (माले) ने इस दुर्घटना के मद्देनज़र कुछ अहम मांगें रखी हैं.

मृतकों के परिजनों को कम से कम ₹10 लाख का मुआवजा दिया जाये.

हादसे में घायल लोगों के इलाज की पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार उठाये.

स्पीड कंट्रोल, फुट ओवरब्रिज और स्थानीय आवागमन के लिए सुरक्षित रास्तों की तत्काल व्यवस्था किया जाये.

चुनावी मुद्दा बनेगा सड़क सुरक्षा?

कुणाल ने संकेत दिया है कि इंडिया गठबंधन इस गंभीर मसले को आने वाले चुनावों में एक अहम मुद्दा बनायेगा. उनका मानना है कि विकास की असली पहचान चौड़ी सड़कों से नहीं, बल्कि सुरक्षित सफर से होता है.

निष्कर्ष

सिगरियामा की यह घटना केवल एक हादसा नहीं है बल्कि सिस्टम की गंभीर खामियों की ओर इशारा है. जब तक सरकार सड़क निर्माण के साथ-साथ सुरक्षा को प्राथमिकता नहीं देता है. तब तक ऐसी दुर्घटनाएं केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं रहेंगी — वे आम नागरिकों की जिंदगी छीनती रहेंगी.

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