चित्तरंजन गगन का पलटवार, भाजपा नेताओं की भाषा से झलकती है बेचैनी
तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना, 17 सितम्बर 2025 – बिहार की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है. केन्द्रीय मंत्री गिरिराज सिंह द्वारा विपक्ष के नेता और इंडिया गठबंधन की समन्वय समिति के अध्यक्ष तेजस्वी यादव पर की गई अमर्यादित टिप्पणियों ने सियासी बहस को नया मोड़ दे दिया है.बेगूसराय में एक कार्यक्रम के दौरान सिंह ने तेजस्वी को “थेथर और पतित” कहकर संबोधित किया है. इस पर राजद ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है और इसे भाजपा का,रणनीतिक एजेंडा करार दिया है.
राजद प्रवक्ता चित्तरंजन गगन ने कहा कि विपक्षी नेताओं पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल करना भाजपा की पुरानी आदत और सोची-समझी रणनीति है. उन्होंने आरोप लगाया कि जब भी भाजपा और उनके सहयोगी दल जनता से जुड़े असल मुद्दों पर घिरने लगते हैं, वे विमर्श को भटकाने के लिए व्यक्तिगत हमलों और अमर्यादित टिप्पणियों का सहारा लेते हैं.
बिहार अधिकार यात्रा से भाजपा में बेचैनी
गगन का कहना है कि तेजस्वी यादव की “बिहार अधिकार यात्रा” को मिल रहा अपार जनसमर्थन भाजपा खेमे को असहज कर रहा है.जनता रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, सिंचाई और पलायन जैसे बुनियादी सवालों को लेकर मुखर हो रही है. और यही बेचैनी सत्ताधारी दल को अमर्यादित भाषा पर उतरने को मजबूर कर रही है.
उन्होंने कहा कि , भाजपा और एनडीए नहीं चाहते कि बिहार की जनता अपने हक और अधिकारों पर सवाल उठाए. इसलिए वे बहस को ऐसे मुद्दों की तरफ मोड़ना चाहते हैं, जिनका आम लोगों की जिंदगी से कोई लेना-देना नहीं है.
मंत्री रहते भी बिहार को नहीं मिला लाभ
राजद प्रवक्ता ने सीधे गिरिराज सिंह के कामकाज पर सवाल उठाया है.उन्होंने कहा कि सिंह इस समय केन्द्र सरकार में कपड़ा मंत्री हैं, लेकिन बिहार को अब तक उनसे कोई ठोस योगदान नहीं मिला है.
उनके अनुसार,
सात मेगा टेक्सटाइल पार्क देशभर में खुले, लेकिन बिहार को एक भी नहीं मिला.
59 एकीकृत टेक्सटाइल पार्क (SITP) स्वीकृत किए गए, जिनमें से 14 अकेले गुजरात में खोले गए, लेकिन बिहार को एक भी नहीं.
मोकामा और मुजफ्फरपुर की पुरानी बटलर कंपनियां लालू प्रसाद के रेल मंत्री रहते चालू हुई थीं, लेकिन एनडीए सरकार में फिर से बंद हो गईं.
गगन ने तीखा तंज कसते हुए कहा कि सिंह बिहार की जनता को इन सवालों का जवाब देने में असमर्थ हैं.
ये भी पढ़े :बिहार में सियासी भूचाल: तेजस्वी यादव का हमला, कुर्सी कांप रही है – जनता मांग रही है इस सरकार से मुक्ति!
ये भी पढ़े :डुमरांव में भाकपा(माले) महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य का दौरा
लालू प्रसाद से सीख लेनी चाहिए थी
चित्तरंजन गगन ने कहा कि जिस लालू प्रसाद को भाजपा नेता दिन-रात कोसते रहते हैं. उनसे ही गिरिराज सिंह को सीख लेनी चाहिए थी.लालू प्रसाद जब रेल मंत्री बने तो बिहार में चार बड़े रेलवे कारखाने स्थापित करवाए और रोजगार के अवसर बढ़ाए. इसके विपरीत गिरिराज सिंह, मंत्री रहते हुए भी बिहार को एक भी टेक्सटाइल प्रोजेक्ट नहीं दिला पाये.
उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि, “ऐसे लोगों को ‘बकलोल’ कहा जाता है, जो पद पर रहकर भी कुछ नहीं करता है. और उन्हें ‘बेहया’ कहा जाता है, जो खुद तो कोई काम करता नहीं और दूसरों पर अमर्यादित टिप्पणियां करता रहता है.
असल मुद्दों से भटकाने की कोशिश
विश्लेषकों का मानना है कि इस पूरे विवाद के पीछे भाजपा की वह रणनीति साफ झलकती है. जिसमें असल मुद्दों से ध्यान हटाकर राजनीतिक बयानबाजी को हवा दी जाती है.बिहार में बेरोजगारी, शिक्षा की बदहाली, स्वास्थ्य सेवाओं की कमी और पलायन जैसे मुद्दे लगातार जनता की नाराजगी को हवा दे रहे हैं. ऐसे में तेजस्वी यादव की जनसभाओं में बढ़ती भीड़ भाजपा के लिए परेशानी का सबब बन रही है.
राजनीतिक पर्यवेक्षक यह भी मानते हैं कि भाजपा नेताओं की ओर से लगातार की जा रही विवादित टिप्पणियां विपक्ष की छवि को धूमिल करने और जनता का ध्यान असल सवालों से भटकाने की सोची-समझी चाल है.
निष्कर्ष
गिरिराज सिंह की तेजस्वी यादव पर टिप्पणी ने एक बार फिर बिहार की राजनीति में शालीनता और मर्यादा पर सवाल खड़े कर दिए हैं.विपक्ष का कहना है कि भाजपा नेताओं के बयानों का मकसद जनता के असली मुद्दों को दबाना है, जबकि सत्ताधारी दल इसे अपनी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा मानकर चलता दिख रहा है.
अब देखना यह होगा कि आने वाले दिनों में जनता इन अमर्यादित बयानों से प्रभावित होती है या फिर नौकरी, शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास जैसे असली सवाल चुनावी राजनीति का केन्द्र बनते हैं.

I am a blogger and social media influencer. I have about 5 years experience in digital media and news blogging.



















