ओबीसी जनगणना, आरक्षण और सामाजिक न्याय पर बड़ा बयान
तीसरा पक्ष ब्यूरो बरेली, 17 सितम्बर 2025 – भीम आर्मी प्रमुख और आज़ाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आज़ाद ने उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में आयोजित “अस्तित्व बचाओ – भाईचारा बनाओ” प्रबुद्ध जनसम्मेलन को संबोधित करते हुए कई गंभीर मुद्दों पर विचार साझा किया है.उन्होंने केन्द्र और राज्य सरकार पर सामाजिक न्याय की नीतियों को कमजोर करने का आरोप लगाते हुए बहुजन समाज से संगठित होकर अपने अधिकारों की रक्षा की अपील किया है.

सम्मेलन में चंद्रशेखर आज़ाद ने विशेष रूप से छह प्रमुख विषयों पर अपना दृष्टिकोण रखा – ओबीसी की जातिवार जनगणना, आरक्षण और संविधान की रक्षा, ईवीएम प्रणाली पर सवाल, दलित-पिछड़े-आदिवासियों एवं अल्पसंख्यकों पर अत्याचार, प्राइवेट सेक्टर में आरक्षण की मांग और मंडल कमीशन की सिफारिशों का पूर्ण क्रियान्वयन.
ओबीसी की जातिवार जनगणना पर हमला
अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए आज़ाद ने ओबीसी जनगणना न कराए जाने को एक “सोचा-समझा षड्यंत्र” करार दिया है.उनका कहना था कि केन्द्र सरकार जानबूझकर जातिवार जनगणना से बच रही है, क्योंकि इससे बहुजन समाज की वास्तविक संख्या सामने आ जाएगी.उन्होंने कहा कि – सत्ता पक्ष नहीं चाहता कि समाज के हाशिए पर खड़े लोगों की असली ताकत उजागर हो.यही कारण है कि जनगणना में OBC को शामिल नहीं किया जा रहा है.
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आरक्षण और संविधान की रक्षा पर जोर
भीम आर्मी प्रमुख ने आरोप लगाया कि मौजूदा शासन आरक्षण को कमजोर करने की दिशा में काम कर रहा है.उन्होंने कहा कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा दिए गए संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा करना हर नागरिक की जिम्मेदारी है.आज़ाद ने उपस्थित लोगों से अपील करते हुए कहा है कि – संविधान ही हमारी ढाल है.अगर इसे कमजोर किया गया तो सामाजिक न्याय का सपना अधूरा रह जायेगा.

EVM प्रणाली पर अविश्वास
चंद्रशेखर आज़ाद ने चुनावों में ईवीएम के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाया है. उन्होंने कहा कि यह प्रणाली लोकतंत्र की पारदर्शिता को कमजोर करती है और जनता के विश्वास को आहत करती है. उनका कहना था कि EVM चुनाव प्रणाली शासक वर्ग के लिए चुनाव प्रक्रिया को नियंत्रित करने का साधन बन चुकी है.जब तक बैलेट पेपर वापसी नहीं होगी, तब तक निष्पक्ष चुनाव की गारंटी संभव नहीं है.
दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यकों पर अत्याचार
अपने भाषण में आज़ाद ने हाल के दिनों में दलितों, पिछड़े वर्गों, आदिवासियों और मुस्लिम समाज पर बढ़ते अत्याचारों को लेकर चिंता व्यक्त किया है.उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं न केवल संवैधानिक मूल्यों पर हमला हैं, बल्कि भाईचारे और सामाजिक ताने-बाने को भी तोड़ने वाली हैं.उन्होंने सरकार से सख्त कदम उठाने की मांग किया है.
प्राइवेट सेक्टर में आरक्षण की मांग
आजाद ने सरकारी उपक्रमों के निजीकरण पर भी सवाल उठाया है और कहा कि इससे आरक्षण के अवसर लगातार कम होते जा रहे हैं.उन्होंने यह मांग उठाई कि प्राइवेट सेक्टर में भी अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़ा वर्ग को आरक्षण का लाभ मिले, ताकि समावेशी विकास सुनिश्चित हो सके.
मंडल कमीशन की सिफारिशों का क्रियान्वयन
अंत में चंद्रशेखर आज़ाद ने मंडल कमीशन की सिफारिशों को पूरी तरह लागू करने की मांग दोहराई है. उनका कहना था कि,सामाजिक न्याय की सच्ची स्थापना तभी होगी, जब मंडल कमीशन की हर सिफारिश को जमीनी स्तर पर लागू किया जायेगा.
बहुजन समाज से संगठित होने का आह्वान
सम्मेलन के दौरान आज़ाद ने बहुजन समाज के युवाओं, बुद्धिजीवियों और कार्यकर्ताओं से संगठित होकर संघर्ष की राह पर चलने का आह्वान किया है.उन्होंने कहा कि – हमारे अस्तित्व की रक्षा तभी संभव है, जब हम एकजुट होकर सामाजिक न्याय और समानता की लड़ाई लड़ेंगे.
निष्कर्ष
बरेली का यह प्रबुद्ध जनसम्मेलन केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि यह बहुजन समाज के मुद्दों और संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा के लिए आवाज़ बुलंद करने का मंच बना.चंद्रशेखर आज़ाद ने अपने स्पष्ट और तेजतर्रार बयानों से यह संकेत दिया कि आने वाले समय में उनकी राजनीति सामाजिक न्याय, आरक्षण और भाईचारे जैसे मुद्दों पर केंद्रित रहेगी.
मेरा नाम रंजीत कुमार है और मैं समाजशास्त्र में स्नातकोत्तर (एम.ए.) हूँ. मैं महत्वपूर्ण सामाजिक, सांस्कृतिक एवं राजनीतिक मुद्दों पर गहन एवं विचारोत्तेजक लेखन में रुचि रखता हूँ। समाज में व्याप्त जटिल विषयों को सरल, शोध-आधारित तथा पठनीय शैली में प्रस्तुत करना मेरा मुख्य उद्देश्य है.
लेखन के अलावा, मूझे अकादमिक शोध पढ़ने, सामुदायिक संवाद में भाग लेने तथा समसामयिक सामाजिक-राजनीतिक घटनाक्रमों पर चर्चा करने में गहरी दिलचस्पी है.



















