सवालों के घेरे में नीतीश सरकार,उठे सरकार और व्यवस्था पर गंभीर सवाल
तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना, 27 अगस्त 2025 – बिहार की राजधानी पटना से एक ऐसी भयानक और डरावना घटना सामने आई है.जिसने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है.चितकोहरा स्थित एक सरकारी कन्या मध्य विद्यालय में एक छात्रा को स्कूल के ही शिक्षक द्वारा बाथरूम में बंद कर जिंदा जलाए जाने का मामला सामने आया है.आरोप है कि छात्रा पर किरोसिन छिड़ककर उसे आग के हवाले कर दिया गया और स्कूल का दरवाज़ा बाहर से बंद कर दिया गया. यह भयावह वारदात शिक्षा व्यवस्था की पोल खोलने के साथ-साथ बेटियों की सुरक्षा को लेकर कई अहम सवाल खड़े करती है.
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जब छात्रा की चीखें सुनाई दीं. तब स्थानीय लोग दौड़कर स्कूल पहुंचे और जबरन दरवाज़ा तोड़ा. लेकिन तब तक वह छात्रा काफी गंभीर रूप से झुलस चुकी थी काफी जल चुकी थी . उसे तत्काल PMCH ले जाया गया. परंतु इलाज शुरू होने से पहले ही उसने दम तोड़ चुकी थी या कहे तो दुनियां छोड़ चुकी थी.
बेटी बचाओ’ का नारा बना मज़ाक?
घटना के बाद इलाके में आक्रोश का माहौल है.समाजिक संगठनों और वामपंथी दलों ने इस घटना को सरकार की विफलता बताया है. ऑल इंडिया प्रोग्रेसिव वूमेन्स एसोसिएशन (AIPWA) की महासचिव का. मीना तिवारी, इनक़लाबी नौजवान सभा के नेता विनय कुमार, पटना महानगर के सचिव जितेंद्र कुमार और स्थानीय कार्यकर्ता मुर्तजा अली ने पीड़िता के घर पहुंचकर परिजनों से मुलाकात की और न्याय का आश्वासन दिया.
मीना तिवारी ने सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि,जब राजधानी के बीचोंबीच एक बच्ची को स्कूल में जला दिया जाता है. और सरकार मूकदर्शक बनी रहती है. तो यह शासन की संवेदनहीनता का प्रतीक है. बेटी बचाओ जैसे नारे खोखले साबित हो रहे हैं.
पहले से कर रहा था अश्लील हरकतें, स्कूल प्रशासन रहा मौन
छात्रा की सहेलियों ने चौंकाने वाला खुलासा किया है. उन्होंने बताया कि आरोपी शिक्षक अनिल कुमार स्कूल में पहले से ही छात्राओं के साथ अभद्र व्यवहार करता रहा है. मृतक छात्रा भी कई बार इसकी शिकायत कर चुकी थी. लेकिन स्कूल प्रबंधन ने कोई कार्रवाई नहीं की. सवाल उठता है कि क्या यह हत्या ऐसे ही आपराधिक मानसिकता का नतीजा है. जिसे समय रहते रोका जा सकता था?
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भाकपा(माले) की मांग: दोषियों को तुरंत गिरफ़्तार करो
भाकपा(माले) ने इस घटना को नृशंस हत्या करार देते हुए राज्य सरकार से मांग किया है कि आरोपी शिक्षक अनिल कुमार को तत्काल गिरफ़्तार किया जाए. साथ ही, स्कूल के प्रधानाचार्य और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों पर भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए जिन्होंने पहले की शिकायतों को नजरअंदाज किया.
सवाल केवल एक बच्ची की मौत का नहीं, पूरे समाज की चुप्पी का है
यह घटना केवल एक छात्रा की हत्या नहीं है. बल्कि पूरे समाज और व्यवस्था की खामोशी की परिणति है. जब शिक्षकों जैसी जिम्मेदार भूमिका में बैठे लोग अपराधी बन जाएं और संस्थान अपराध पर पर्दा डालते रहें. तब समाज को खुद से पूछना होगा – क्या हम सुरक्षित भविष्य की ओर बढ़ रहे हैं. या चुप्पी के अंधेरे में लहूलुहान होती उम्मीदों को देख रहे हैं?
भाकपा(माले) और स्थानीय सामाजिक संगठनों ने पटना के नागरिकों से अपील किया है कि वे बेटियों की सुरक्षा और न्याय के लिए आगे आएं. यह केवल एक परिवार का दर्द नहीं है – यह पूरे समाज के जमीर की परीक्षा है.
निष्कर्ष
शिक्षा का स्थान जहां बच्चों के सपने आकार लेते हैं. वही जब डर और हिंसा का अड्डा बन जाए, तो यह केवल एक संस्था की विफलता नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था की पराजय होती है. पटना की यह घटना चेतावनी है – समाज को अब और देर नहीं करनी चाहिए.

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