क्या बिहार अब नागपुर से चलेगा?
जनता की सरकार या संघ की शाखा?
तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना, 19 जून : भाकपा-माले के महासचिव कॉ. दीपंकर भट्टाचार्य ने बिहार में आरएसएस (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) की कथित भूमिका को लेकर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने कहा है कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाले मौजूदा दौर में संविधान की धज्जियाँ उड़ाते हुए देश में एक ‘सुपर सरकार’ के तौर पर संघ का वर्चस्व कायम किया जा रहा है, और बिहार भी इससे अछूता नहीं रह गया है.
बिहार में संघ कोटा से नियुक्तियाँ:दीपंकर
दीपंकर भट्टाचार्य ने जेडीयू नेता और मंत्री अशोक चौधरी द्वारा अपने दामाद को बिहार धार्मिक न्यास परिषद में आरएसएस कोटे से नियुक्त किए जाने की बात स्वीकारने को गंभीर बताया.उन्होंने कहा की यह किसी एक व्यक्ति की नियुक्ति भर नहीं, बल्कि यह साफ इशारा है कि बिहार की सरकार और आरएसएस के बीच गहरा सांठगांठ है. यह लोकतंत्र और संविधान के लिए अत्यंत खतरनाक संकेत है.
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उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार की प्रशासनिक व्यवस्था अब ‘संघ के कोटे’ से संचालित हो रही है, न कि जनता के प्रतिनिधियों के द्वारा.उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से जवाब मांगते हुए कहा की क्या अब बिहार में नियुक्तियाँ नागपुर (आरएसएस मुख्यालय) की सिफारिशों पर होंगी? क्या सरकारी बोर्ड और संस्थान संघ की शाखा बन चुके हैं?
सरकार आरएसएस के एजेंडे पर:माले
भाकपा-माले नेता ने यह भी सवाल उठाया कि क्या इस प्रकार की स्वीकारोक्ति संविधानिक संस्थाओं पर संघ के बढ़ते प्रभाव को वैधता प्रदान कर रही है.उन्होंने कहा की अगर सरकार आरएसएस के एजेंडे पर काम कर रही है, तो यह सीधा संविधान के खिलाफ है.जनता को यह जानने का हक है कि सरकार लोकतंत्र के तहत चल रही है या फिर किसी सांप्रदायिक संगठन के इशारे पर.
दीपंकर भट्टाचार्य ने चेतावनी दी कि अगर इस प्रवृत्ति को नहीं रोका गया, तो यह देश को एक धार्मिक राष्ट्र की ओर ले जाएगा, जहां संविधान और जनहित की जगह विचारधारात्मक नियंत्रण हावी रहेगा.
इस मुद्दे पर बिहार की राजनीति में एक बार फिर गरमाहट आ गई है. विपक्ष ने नीतीश कुमार से इस मामले में सार्वजनिक स्पष्टीकरण की मांग की है.

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