संत कबीर जयंती 2025: पीएम मोदी ने दी श्रद्धांजलि, एकता का संदेश

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Ajit Kumar

भारत
संत कबीर जयंती 2025: पीएम मोदी ने दी श्रद्धांजलि, एकता का संदेश

सामाजिक समरसता के प्रणेता को नमन

तीसरा पक्ष ब्यूरो ,नई दिल्ली, 11 जून: आज संत कबीर दास की जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके सामाजिक समरसता के प्रति योगदान को याद किया. पीएम मोदी ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर पोस्ट करते हुए कहा कि संत कबीर के दोहों में शब्दों की सरलता के साथ-साथ भावनाओं की गहराई है, जो आज भी भारतीय जनमानस को प्रेरित करती है.

संत कबीर का सामाजिक योगदान

15वीं सदी के महान कवि और समाज सुधारक संत कबीर दास ने अपने दोहों और उपदेशों के माध्यम से समाज में व्याप्त अंधविश्वास, जातिगत भेदभाव और धार्मिक पाखंड का विरोध किया.उनकी शिक्षाएं निर्गुण भक्ति और मानवता पर केंद्रित थीं, जो हिंदू और इस्लाम दोनों धर्मों के बीच समन्वय स्थापित करती थीं.कबीर के दोहे आज भी प्रासंगिक हैं, जो समाज में एकता और भाईचारे का संदेश देते हैं.

पीएम मोदी ने अपने संदेश में कहा, “सामाजिक समरसता के प्रति आजीवन समर्पित रहे संत कबीरदास जी को उनकी जयंती पर मेरा कोटि-कोटि नमन.समाज में फैली कुरीतियों को दूर करने में उनके योगदान को हमेशा श्रद्धापूर्वक स्मरण किया जाएगा याद किया जायेगा.

कबीर के दोहों की प्रासंगिकता

संत कबीर के दोहे सरल भाषा में गहन दार्शनिक विचारों को व्यक्त करते हैं. उदाहरण के लिए, उनका प्रसिद्ध दोहा:

जाति न पूछो साधु की, पूछ लीजिए ज्ञान.
मोल करो तलवार का, पड़ा रहन दो म्यान.

यह दोहा सामाजिक समानता और ज्ञान के महत्व को रेखांकित करता है.कबीर की शिक्षाएं न केवल भक्ति आंदोलन को नई दिशा दीं, बल्कि सामाजिक सुधार के लिए भी प्रेरणा बनीं.

संत कबीर जयंती का महत्व

हर साल ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा को संत कबीर जयंती मनाई जाती है. इस दिन देशभर में विभिन्न आयोजन किए जाते हैं, जिनमें कबीर के दोहों का पाठ, भजन-कीर्तन और सामाजिक एकता पर चर्चा शामिल होती है. कबीरपंथी समुदाय इस दिन को विशेष उत्साह के साथ मनाता है, क्योंकि वे कबीर को अवतारी पुरुष मानते हैं.

पीएम मोदी का सामाजिक समरसता पर जोर

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में कबीर की शिक्षाओं को आज के समय में लागू करने की आवश्यकता पर बल दिया. उन्होंने कहा कि कबीर के विचार समाज में एकता और सद्भाव को बढ़ावा देने के लिए आज भी प्रासंगिक हैं. इससे पहले भी पीएम मोदी ने मगहर में संत कबीर की निर्वाण स्थली का दौरा किया था और उनकी शिक्षाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए कई पहल की हैं.

संत कबीर जयंती 2025 के अवसर पर देशभर में लोग उनके दोहों और शिक्षाओं को याद कर सामाजिक समरसता को मजबूत करने का संकल्प ले रहे हैं.

स्रोत: पीएम नरेंद्र मोदी का आधिकारिक एक्स हैंडल, अन्य समाचार स्रोत

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