Gen Z की आकांक्षाओं, रोजगार संकट, शिक्षा और बदलती राजनीति पर विश्लेषण
तीसरा पक्ष आलेख, पटना:भारत की नई पीढ़ी के सामने आज के समय में सबसे बड़ा सवाल केवल यह नहीं है कि उसे भविष्य में क्या बनना है, बल्कि यह भी है कि क्या देश की व्यवस्था उसके सपनों और आकांक्षाओं के अनुरूप अवसर पैदा कर पा रही है? इंटरनेट, सोशल मीडिया, डिजिटल शिक्षा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में पली-बढ़ी Gen Z पारंपरिक सोच से अलग तरीके से अपने भविष्य को देख रहा है. उसके लिए नौकरी जरूरी है, लेकिन नौकरी के साथ सम्मान, आर्थिक सुरक्षा, सीखने का अवसर, बेहतर कार्य-जीवन संतुलन और अपनी आवाज रखने की स्वतंत्रता भी बहुत महत्वपूर्ण है.
Gen Z की परिभाषा अलग-अलग संस्थाओं के अनुसार थोड़ी बदल सकता है. आम तौर पर इसे 1990 के दशक के अंत से 2010 के शुरुआती वर्षों के बीच जन्मी पीढ़ी के रूप में देखा जाता है. हालांकि Deloitte के 2026 सर्वेक्षण में केवल वयस्क Gen Z उत्तरदाताओं को शामिल किया गया है. इसलिए किसी एक जन्म-वर्ष सीमा को पूरी पीढ़ी पर लागू करना उचित नहीं होगा.
रोजगार: डिग्री के बाद नौकरी कहां है?
भारत की युवा पीढ़ी की सबसे बड़ी चिंता रोजगार की रहती है. पिछले कुछ दशकों में उच्च शिक्षा तक युवाओं की पहुंच तेजी से बढ़ा है, लेकिन शिक्षा से रोजगार तक पहुंचने का रास्ता अब भी आसान नहीं है बहुत मुश्किल है. State of Working India 2026 के अनुसार 15-29 आयु वर्ग के युवाओं में उच्च शिक्षा का विस्तार हुआ है, लेकिन ग्रेजुएट युवाओं के लिए रोजगार हासिल करना अभी भी बड़ी चुनौती बना हुआ है. रिपोर्ट के अनुसार 15-25 आयु वर्ग के ग्रेजुएट्स में बेरोजगारी करीब 40 प्रतिशत और 25-29 आयु वर्ग में करीब 20 प्रतिशत रहा है.
यह आंकड़ा केवल बेरोजगारी की समस्या नहीं दिखाता, बल्कि एक बड़े education-to-employment gap की ओर भी इशारा भी करता है. यानी युवा कॉलेज और विश्वविद्यालय तक पहुंच रहा हैं, डिग्री तो हासिल कर रहा हैं, लेकिन उनकी शिक्षा और उपलब्ध नौकरियों के बीच पर्याप्त मेल नहीं बन पा रहा है.
यही कारण है कि आज की युवा पीढ़ी केवल, कोई भी नौकरी, नहीं चाहती.वह ऐसी नौकरी चाहती है जिसमें उसकी योग्यता का इस्तेमाल हो, आय अपेक्षाकृत स्थिर हो और आगे बढ़ने की संभावना भी मौजूद हो.
State of Working India 2026 यह भी बताता है कि भारत का युवा कार्यबल कृषि से निकलकर उद्योग और सेवा क्षेत्र की ओर बढ़ रहा है .साथ ही, युवा आबादी के लिए आने वाले वर्षों में पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण रोजगार पैदा करना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत का demographic dividend 2030 के बाद अपने चरम से आगे बढ़ने लगेगा.
Gen Z के लिए पैसा जरूरी है, लेकिन सिर्फ पैसा पर्याप्त नहीं
युवा पीढ़ी को लेकर यह धारणा अक्सर बनाई जाती है कि Gen Z केवल आरामदायक जीवन और तेज करियर चाहती है. लेकिन उपलब्ध सर्वेक्षण इससे कहीं अधिक जटिल तस्वीर पेश करता हैं.
Deloitte के 2026 Global Gen Z and Millennial Survey के भारतीय आंकड़ों के अनुसार 99 प्रतिशत Gen Z उत्तरदाताओं ने कहा कि काम में उद्देश्य यानी purpose होना नौकरी से संतुष्टि के लिए महत्वपूर्ण है. वहीं 93 प्रतिशत भारतीय Gen Z उत्तरदाताओं ने बताया कि वे अपने रोजमर्रा के काम में AI का इस्तेमाल करता हैं.
इससे स्पष्ट है कि युवा आर्थिक सुरक्षा के साथ ऐसा काम भी चाहता हैं जिससे उन्हें लगे कि वे कुछ सार्थक कर रहे हैं. वे केवल वेतन को सफलता का अंतिम पैमाना नहीं मानते है.
वित्तीय दबाव भी उनकी प्राथमिकताओं को प्रभावित कर रहा है. Deloitte के 2026 सर्वेक्षण में भारत के 54 प्रतिशत Gen Z उत्तरदाताओं ने बताया कि वित्तीय बाधाओं के कारण उन्होंने जीवन के बड़े फैसलों को टाला है. इसका मतलब है कि रोजगार का सवाल केवल नौकरी मिलने तक सीमित नहीं है; इसका संबंध घर खरीदने, परिवार बनाने, बचत करने और स्वतंत्र जीवन जीने की क्षमता से भी है.
शिक्षा में बदलाव: डिग्री से ज्यादा कौशल की मांग
आज का युवा यह सवाल पूछ रहा है कि डिग्री के बाद नौकरी के लिए फिर अलग से कौशल क्यों सीखना पड़ता है?
Deloitte के 2025 सर्वेक्षण में भारत के 94 प्रतिशत Gen Z उत्तरदाताओं ने career growth के लिए on-the-job learning को उपयोगी बताया था.वहीं 85 प्रतिशत भारतीय Gen Z और millennials ने बताया था कि वे काम में GenAI का इस्तेमाल कर रहे हैं.
2026 के आंकड़े AI के उपयोग को और आगे बढ़ता हुआ दिखाता हैं.भारतीय Gen Z में AI का इस्तेमाल केवल कंटेंट बनाने या डेटा विश्लेषण तक सीमित नहीं है; युवा इसका इस्तेमाल learning and development, career guidance और काम से जुड़े तनाव को संभालने के लिए भी कर रहा हैं.
इस बदलाव से शिक्षा व्यवस्था के सामने एक नई चुनौती भी खड़ा होता है.आने वाले समय में केवल परीक्षा पास कराने वाली शिक्षा पर्याप्त नहीं होगी. विद्यार्थियों को समस्या समाधान, संचार, डिजिटल कौशल, AI literacy, वित्तीय समझ और वास्तविक कार्य अनुभव से जोड़ना होगा.
युवा यह भी चाहते हैं कि प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता हो. परीक्षा में गड़बड़ी या पेपर लीक की खबर केवल एक परीक्षा को प्रभावित नहीं करती; इससे उस पूरी व्यवस्था पर भरोसा कमजोर होता है जिसके लिए विद्यार्थी वर्षों तक तैयारी करते हैं.
राजनीति से दूरी नहीं, राजनीति से जवाबदेही की मांग
यह कहना गलत होगा कि नई पीढ़ी राजनीति में रुचि नहीं रखती है . वास्तव में सोशल मीडिया ने युवाओं को राजनीतिक बहस में पहले से कहीं अधिक सक्रिय बना दिया है.
आज कोई युवा किसी राजनीतिक नेता का भाषण सुनने के लिए केवल रैली में जाने पर निर्भर नहीं है. वह कुछ सेकंड में भाषण का वीडियो देख सकता है, आंकड़ों की जांच कर सकता है, दूसरे देशों की नीतियों से तुलना कर सकता है और अपनी प्रतिक्रिया सार्वजनिक कर सकता है.
यही डिजिटल बदलाव राजनीति के सामने नई चुनौती भी पैदा करता है. युवा केवल घोषणा नहीं सुनना चाहता; वह पूछता है—उस घोषणा का परिणाम क्या हुआ?
रोजगार कितना बढ़ा?
भर्ती परीक्षा कब हुई?
परीक्षा कितनी पारदर्शी रही?
शिक्षा की गुणवत्ता में कितना सुधार हुआ?
महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर कितने बढ़े?
युवा उद्यमियों को कितनी वास्तविक मदद मिली?
यानी राजनीति में युवाओं की अपेक्षा अब केवल प्रतिनिधित्व तक सीमित नहीं है. वे performance और accountability भी चाहते हैं.
2026 में युवाओं से जुड़े विरोध प्रदर्शनों और शिक्षा व रोजगार से जुड़े सवालों ने इस बदलाव को राष्ट्रीय बहस का विषय बनाया है. Reuters की रिपोर्टिंग के अनुसार हालिया छात्र आंदोलनों ने परीक्षा व्यवस्था, रोजगार और शिक्षा के अवसरों को लेकर युवाओं की बेचैनी को सामने रखा है .
सोशल मीडिया बना नई राजनीतिक आवाज
Gen Z की राजनीतिक शक्ति का एक बड़ा हिस्सा सोशल मीडिया से आता है. यह पीढ़ी पारंपरिक राजनीतिक संगठन का हिस्सा बने बिना भी किसी मुद्दे को राष्ट्रीय चर्चा में ला सकता है.
एक पोस्ट, वीडियो, मीम या हैशटैग कुछ ही घंटों में लाखों लोगों तक पहुंच सकता है.इसका सकारात्मक पक्ष यह है कि युवाओं को अपनी बात रखने के लिए किसी बड़े मंच की अनिवार्यता नहीं रहा,लेकिन इसके साथ misinformation, राजनीतिक ध्रुवीकरण और अधूरी जानकारी का खतरा भी बढ़ा है.
इसलिए डिजिटल नागरिकता भी नई पीढ़ी की महत्वपूर्ण जरूरत बन गया है.सवाल केवल यह नहीं है कि युवा कितनी तेजी से सूचना प्राप्त करता हैं, बल्कि यह भी है कि वे सूचना की सत्यता की जांच कैसे करता हैं.
AI के दौर में नौकरी का भविष्य
Artificial Intelligence युवाओं के लिए अवसर भी है और चिंता भी.
एक तरफ AI नए प्रकार के काम, डिजिटल सेवाएं, ऑटोमेशन और उद्यमिता के अवसर पैदा कर सकता है.दूसरी तरफ कुछ पारंपरिक कार्यों की प्रकृति बदल सकती है. Deloitte के भारतीय सर्वेक्षण में Gen Z के बीच AI का व्यापक इस्तेमाल यह दिखाता है कि युवा तकनीकी बदलाव से पीछे हटने के बजाय उसे अपनाने की कोशिश कर रहा हैं.
इसलिए भविष्य की रोजगार नीति का लक्ष्य केवल अधिक नौकरियां पैदा करना नहीं होना चाहिए.लक्ष्य यह भी होना चाहिए कि युवाओं को बदलती अर्थव्यवस्था के लिए लगातार तैयार किया जाए.
स्किलिंग को एक बार की ट्रेनिंग के बजाय lifelong learning का हिस्सा बनाना होगा.
ग्रामीण और छोटे शहरों के युवाओं की अलग चुनौती
भारत की युवा कहानी केवल महानगरों की कहानी नहीं है.छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं के लिए समस्या कई स्तरों पर मौजूद है.
उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, डिजिटल संसाधन, करियर मार्गदर्शन, उद्योग से जुड़ी ट्रेनिंग और स्थानीय रोजगार के अवसरों की कमी का सामना करना पड़ सकता है.दूसरी ओर बेहतर अवसरों की तलाश में बड़ी संख्या में युवा दूसरे राज्यों और शहरों की ओर पलायन करता हैं.
State of Working India 2026 के अनुसार युवा migration भारत के श्रम बाजार में क्षेत्रीय असंतुलन को कम करने में भूमिका निभाता है. युवा आबादी वाले अपेक्षाकृत गरीब राज्यों से श्रमिक दूसरे क्षेत्रों में जाते हैं, जबकि अधिक समृद्ध और वृद्ध होती आबादी वाले राज्यों में युवा श्रमिकों की मांग बढ़ रहा है.
इसलिए युवाओं की समस्या का समाधान केवल महानगरों में अवसर पैदा करके नहीं होगा. छोटे शहरों में भी उद्योग, डिजिटल सेवाएं, शिक्षा, स्वास्थ्य और उद्यमिता का मजबूत आधार बनाना होगा.
ये भी पढ़े : Gen Z की जीत: शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से युवाओं ने लोकतंत्र में लिखी जवाबदेही की नई कहानी
ये भी पढ़े : Please Save My Future — नन्हीं आँखों में छिपा भविष्य का डर
महिलाएं, पर्यावरण और बेहतर जीवन की आकांक्षा
नई पीढ़ी के सवाल रोजगार और राजनीति से आगे भी जाता हैं.युवा महिलाएं शिक्षा और रोजगार में अधिक अवसर चाहती हैं और युवा पीढ़ी का एक हिस्सा पर्यावरण तथा टिकाऊ विकास को भी महत्वपूर्ण मानता है.
Deloitte के सर्वेक्षणों में well-being और work-life balance लगातार महत्वपूर्ण विषयों के रूप में सामने आते हैं. इसका अर्थ है कि युवा आर्थिक विकास चाहता हैं, लेकिन ऐसा विकास नहीं जिसमें लगातार तनाव, असुरक्षा और जीवन की गुणवत्ता की कीमत चुकाना पड़े.
यह बदलाव कंपनियों और सरकार दोनों के लिए महत्वपूर्ण संकेत है. भविष्य की अर्थव्यवस्था में productivity के साथ employee well-being, flexible learning और सुरक्षित कार्य वातावरण भी महत्वपूर्ण होंगे.
सरकार और नीति-निर्माताओं के सामने क्या रास्ता है?
भारत की नई पीढ़ी की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए कुछ बुनियादी बदलाव जरूरी हैं.
पहला, रोजगार की मात्रा के साथ रोजगार की गुणवत्ता पर ध्यान देना होगा.केवल काम उपलब्ध होना पर्याप्त नहीं है; स्थिर आय, सामाजिक सुरक्षा और कौशल के अनुरूप अवसर भी जरूरी हैं.
दूसरा, शिक्षा और उद्योग के बीच दूरी कम करनी होगी. विश्वविद्यालयों, ITI, कौशल संस्थानों और कंपनियों के बीच मजबूत apprenticeship और practical training व्यवस्था विकसित की जा सकती है.
तीसरा, प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता मजबूत करना होगा.परीक्षा प्रक्रिया में तकनीक, पारदर्शिता और जवाबदेही का इस्तेमाल बढ़ाना जरूरी है.
चौथा, युवाओं के लिए entrepreneurship ecosystem को मजबूत करना होगा. केवल startup की बात करने से काम नहीं चलेगा; छोटे उद्यमों के लिए आसान ऋण, बाजार, mentorship और डिजिटल infrastructure भी चाहिए.
पांचवां, युवाओं की आवाज को नीति निर्माण में वास्तविक स्थान देना होगा.युवा संवाद केवल कार्यक्रम या फोटो तक सीमित न रहकर policy feedback का माध्यम बनना चाहिए.
निष्कर्ष: सवाल सिर्फ युवाओं का नहीं, भारत के भविष्य का है
भारत की नई पीढ़ी को केवल युवा आबादी कहकर उसकी आकांक्षाओं को समझा नहीं जा सकता है.यह ऐसी पीढ़ी है जिसने इंटरनेट के माध्यम से दुनिया को करीब से देखा है और इसलिए वह अपने देश में भी बेहतर अवसर, पारदर्शिता और जवाबदेही की उम्मीद करता है.
उसके सवाल स्पष्ट हैं,पढ़ाई के बाद रोजगार कहां है? मेहनत के बाद अवसर कितना निष्पक्ष है? राजनीति में वादों से आगे परिणाम कब दिखेंगे? और तकनीकी बदलाव के दौर में हमारा भविष्य कितना सुरक्षित है?
भारत के लिए यह चुनौती उतनी ही बड़ी है जितना बड़ा अवसर. State of Working India 2026 के अनुसार देश अपने demographic dividend के महत्वपूर्ण दौर के करीब है और 2030 के बाद working-age population की हिस्सेदारी घटने की दिशा में बढ़ सकती है. इसलिए अगले कुछ वर्ष केवल आर्थिक वृद्धि के लिए नहीं, बल्कि युवाओं को productive और dignified employment से जोड़ने के लिए निर्णायक होंगे.
नई पीढ़ी केवल शिकायत नहीं कर रही है. वह सीख रही है, AI अपना रही है, सवाल पूछ रही है, राजनीति पर नजर रख रही है और अपने भविष्य के लिए नए रास्ते तलाश रही है.
अब असली परीक्षा युवाओं की नहीं, व्यवस्था की है—क्या भारत उनकी आकांक्षाओं को अवसर में बदल पाएगा?
यही सवाल आने वाले दशक की राजनीति, अर्थव्यवस्था और सामाजिक दिशा को तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.
समाचार स्रोत: Deloitte Global Gen Z & Millennial Survey 2026, State of Working India 2026 और Reuters की रिपोर्टिंग में उपलब्ध तथ्यों के आधार पर

I am a blogger and social media influencer. I have about 5 years experience in digital media and news blogging.


















