पटना में SIR के खिलाफ आइसा का राजभवन मार्च, कई छात्र हिरासत में

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Ajit Kumar

बिहार
पटना में SIR के खिलाफ आइसा के राजभवन मार्च के दौरान छात्र-नौजवानों का प्रदर्शन

ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR रद्द करने की मांग पर सैकड़ों छात्र-नौजवानों ने निकाला मार्च, डाकबंगला चौराहे पर सभा और धरना दिया

तीसरा पक्ष ब्यूरो, पटना | 13 अक्टूबर 2026:बिहार की राजधानी पटना में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) ने मंगलवार को राजभवन मार्च निकाला.संगठन की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, मार्च में सैकड़ों छात्र-छात्राओं और नौजवानों ने हिस्सा लिया. प्रदर्शनकारियों ने SIR की प्रक्रिया रद्द करने, मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू करने और आंदोलनरत छात्रों पर पुलिस कार्रवाई बंद करने की मांग उठाई.

मार्च के दौरान पुलिस ने कई स्थानों पर बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश की.आइसा के अनुसार, JPO गोलंबर के पास पुलिस ने कई छात्र-नौजवानों को हिरासत में ले लिया.इसके बावजूद प्रदर्शनकारी डाकबंगला चौराहे तक पहुंचे, जहां भारी बैरिकेडिंग के कारण मार्च आगे नहीं बढ़ सका. इसके बाद वहां सभा और धरना आयोजित किया गया.

JPO गोलंबर पर पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया

आइसा बिहार के आह्वान पर आयोजित इस मार्च का नेतृत्व संगठन के राज्य अध्यक्ष कॉमरेड धनंजय, राज्य सचिव कॉमरेड दीपंकर और राज्य उपाध्यक्ष कॉमरेड सबा आफ़रीन ने किया. मार्च में आइसा बिहार की उपाध्यक्ष मनीषा, सोनू फ़रनाज़, विकास, अनूप, नीतू और लोकेश सहित राज्य संयुक्त सचिव अदिति, कौशिक, जयशंकर, पावेल, नीतीश और अनीश शामिल हुए.

पटना विश्वविद्यालय के छात्र आदर्श, मोनू, विवेक आनंद सुंदर, भव्या और भरत समेत बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने भी मार्च में भागीदारी की. पालीगंज के विधायक डॉ. संदीप सौरभ और RYA के राज्य सचिव शिवप्रकाश रंजन भी प्रदर्शन में शामिल हुए.

संगठन की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, मार्च को रोकने के लिए पटना में जगह-जगह बैरिकेडिंग की गई और कई सड़कों को बंद किया गया.इसके बावजूद प्रदर्शनकारी गांधी मैदान के गेट नंबर 10 से आगे बढ़े. JPO गोलंबर पर पुलिस ने कई लोगों को हिरासत में ले लिया.

आइसा ने हिरासत में लिए गए साथियों में तारिक अनवर, मयंक कुमार, जयशंकर पंडित, अनीश कुशवाहा, सोनू कुशवाहा, रिक्की खान, कन्हैया कुमार, जतिन कुमार, मोनू कुमार, हेमंत कुमार और राजा यादव के नाम बताए हैं.इन लोगों की हिरासत और उनकी वर्तमान स्थिति के संबंध में स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है.

डाकबंगला चौराहे पर सभा, SIR रद्द करने की मांग

JPO गोलंबर पर कार्रवाई के बाद भी प्रदर्शनकारी आगे बढ़ते हुए डाकबंगला चौराहे तक पहुंचे. वहां भारी बैरिकेडिंग लगाकर मार्च को रोक दिया गया.इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने सभा और धरना देकर अपनी मांगें उठाईं.

प्रदर्शन के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई, SIR की प्रक्रिया रद्द करने और आंदोलन में शामिल छात्रों पर कथित दमन बंद करने की मांग की गई.

आइसा का कहना है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के नाम पर बड़ी संख्या में नागरिकों के नाम काटे जाने को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं.संगठन ने निर्वाचन प्रक्रिया की पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकारों को लेकर चिंता जताई. साथ ही, उसने आरोप लगाया कि इन सवालों का जवाब देने के बजाय प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस बल और बैरिकेडिंग का इस्तेमाल किया जा रहा है.

हालांकि, मतदाता सूची से नाम हटाए जाने की संख्या, उसके कारणों और प्रक्रिया से जुड़े आरोपों का स्वतंत्र सत्यापन इस प्रेस विज्ञप्ति में उपलब्ध जानकारी के आधार पर नहीं किया जा सकता.

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क्या है SIR को लेकर आइसा की मुख्य आपत्ति?

SIR यानी Special Intensive Revision, मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण है.इसका उद्देश्य निर्धारित निर्वाचन नियमों के तहत मतदाता सूची की जांच और उसे अद्यतन करना है. ऐसी प्रक्रिया में पात्र मतदाताओं के नाम सही ढंग से दर्ज रहना और अपात्र प्रविष्टियों की पहचान करना महत्वपूर्ण होता है.

आइसा की आपत्ति इस प्रक्रिया की निष्पक्षता, मतदाताओं के नाम हटाए जाने से जुड़ी आशंकाओं और निर्वाचन व्यवस्था की जवाबदेही को लेकर है.संगठन का मानना है कि मतदाता सूची में किसी भी तरह की गड़बड़ी पात्र नागरिकों के मतदान के अधिकार को प्रभावित कर सकती है.

इस मुद्दे पर निष्पक्ष आकलन के लिए यह देखना आवश्यक है कि किन परिस्थितियों में नाम हटाए गए, प्रभावित मतदाताओं को आपत्ति दर्ज कराने का अवसर मिला या नहीं और निर्वाचन अधिकारियों ने शिकायतों पर क्या कार्रवाई की.मतदाता सूची से नाम हटने की हर घटना को स्वतः गलत मानना उचित नहीं होगा, लेकिन पात्र मतदाताओं के नाम छूटने की शिकायतों की जांच और उनका समाधान भी जरूरी है.

ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और कानूनी कार्रवाई की मांग

प्रदर्शन के माध्यम से आइसा ने अपनी मांगें दोहराते हुए कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार तत्काल इस्तीफा दें और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की जाए. संगठन ने SIR की प्रक्रिया रद्द करने तथा लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए आवाज उठाने वाले छात्रों पर कार्रवाई बंद करने की भी मांग की.

आइसा ने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र और नागरिकों के मताधिकार की रक्षा के लिए उसका आंदोलन आगे भी जारी रहेगा.

पटना में हुए इस मार्च के दौरान हिरासत, पुलिस बैरिकेडिंग और डाकबंगला चौराहे पर आयोजित धरने ने SIR को लेकर जारी राजनीतिक और लोकतांत्रिक बहस को फिर सामने ला दिया है. इस विवाद के समाधान के लिए निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर पारदर्शी जानकारी, शिकायतों की निष्पक्ष जांच और सभी पक्षों को अपनी बात रखने का अवसर देना महत्वपूर्ण होगा.

निष्कर्ष

आइसा का राजभवन मार्च SIR की प्रक्रिया और मतदाता अधिकारों को लेकर संगठन के विरोध का हिस्सा था। अब इस मामले में प्रदर्शनकारियों की हिरासत से जुड़ी स्थिति, उठाई गई मांगों पर संबंधित अधिकारियों की प्रतिक्रिया और मतदाता सूची संबंधी शिकायतों के निपटारे पर आगे की नजर रहेगी.

स्रोत: आइसा बिहार की 13 अक्टूबर 2026 की प्रेस विज्ञप्ति। प्रदर्शन, हिरासत और आरोपों से संबंधित विवरण संगठन द्वारा जारी जानकारी पर आधारित हैं.

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