भाजपा की गाली-गलौज वाली राजनीति पर एजाज अहमद की तीखी प्रतिक्रिया

| BY

Ajit Kumar

बिहार
भाजपा की गाली-गलौज वाली राजनीति पर एजाज अहमद की तीखी प्रतिक्रिया

बिहार जनता अब जान चुका है भाजपा कि असली चेहरा!

तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना, 30 अगस्त 2025: बिहार प्रदेश राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रवक्ता एजाज अहमद ने भारतीय जनता पार्टी (भा.ज.पा.) द्वारा आज आयोजित किए गए मौन धरने पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है. एजाज ने भाजपा के नेताओं के गाली-गलौज और अपसंस्कृति से भरी भाषा पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि भाजपा की राजनीति अब पूरी तरह से गालियों और अपमान की भाषा पर आधारित हो गई है.यह बयान न केवल भाजपा के आचरण की कड़ी आलोचना है, बल्कि इससे बिहार और देशभर में भाजपा के तंत्र के असली चेहरे को उजागर करता है.

भाजपा की गाली-गलौज वाली राजनीति पर एजाज अहमद की तीखी प्रतिक्रिया

भाजपा की, गाली-गलौज की भाषा: एजाज का गंभीर आरोप

एजाज अहमद ने भाजपा नेताओं पर हमला करते हुए कहा है कि, भा.ज.पा. की पहचान हमेशा से गाली-गलौज और अपसंस्कृति वाली भाषा से रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हालिया भाषण, जिसमें उन्होंने विपक्षी नेताओं के खिलाफ अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया, यही प्रमाण है. डीएनए की बात करना, राहुल गांधी और सोनिया गांधी को अपमानित करना, ममता बनर्जी को ‘दीदी’ और ‘दीदी’ कहकर ताना मारना, यह भाजपा के नेताओं की नकारात्मक राजनीति का हिस्सा बन चुका है.

उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की भाषा से केवल राजनीतिक विमर्श को ही नुकसान नहीं होता, बल्कि इससे समाज में एक घृणा और वैमनस्य की भावना भी फैलती है. जो देश के लोकतंत्र के लिए खतरनाक साबित हो सकती है.

जब भाजपा चुप रही: विधानसभा में हुए अपमान को लेकर एजाज की प्रतिक्रिया

एजाज अहमद ने बिहार विधानसभा के अंदर भाजपा विधायक जनक सिंह द्वारा तेजस्वी यादव की मां और बहन को गालियाँ दिए जाने का भी उदाहरण दिया.उन्होंने कहा कि, जब भाजपा के विधायक ने बिहार विधानसभा में खुलेआम गालियाँ दीं, तो भाजपा के किसी नेता ने इसका विरोध नहीं किया.इस चुप्पी ने स्पष्ट कर दिया कि भाजपा का असली चेहरा यही है – गाली-गलौज और असंस्कृति.

उनका कहना था कि भाजपा के नेताओं द्वारा इस मुद्दे पर खामोशी अख्तियार करना यह दर्शाता है कि पार्टी खुद इसी तरह की राजनीति में लिप्त है.जो समाज में नफरत और अपमान फैलाने के अलावा कुछ नहीं करती.

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भाजपा का ‘गाली डिक्शनरी’ और दिलीप जायसवाल की धमकी

एजाज ने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल के बयान की भी कड़ी आलोचना की है . जिसमें उन्होंने कहा था कि उनके पास गालियों का डिक्शनरी है और वे राहुल गांधी को 50 से अधिक ऐसी गालियाँ देंगे, जो आज तक किसी ने नहीं सुनी है. एजाज ने कहा,यह केवल एक धमकी नहीं, बल्कि भाजपा की मानसिकता को दर्शाता है.क्या यही उनकी राजनीति का आधार है? क्या यही उनका राजनीतिक शिष्टाचार है? भाजपा अब सिर्फ अपमान और गाली-गलौज की राजनीति कर रही है.

स बयान को उन्होंने गंभीर चिंता का विषय बताते हुए कहा कि भाजपा नेताओं की भाषा के स्तर ने भारतीय राजनीति को गिरा दिया है.

गाली-गलौज से मिली सफलता का भाजपा का आत्ममंथन

एजाज ने भाजपा के दोनों डिप्टी सीएम के बयान पर भी सवाल उठाए, जिन्होंने खुलेआम कहा था कि उनकी पहचान गाली-गलौज से बनी है और यही कारण है कि वे राजनीति में सफल हो पाए हैं. एजाज ने कहा कि,यह भाजपा के नेताओं की मानसिकता को दर्शाता है. क्या गाली देना, अपमान करना और समाज में नफरत फैलाना ही राजनीति की सफलता का पैमाना बन गया है? अगर यही राजनीति का मूल्य बन चुका है.तो फिर भाजपा के नेताओं को अपने नैतिक सिद्धांतों पर पुनः विचार करना चाहिए.

उन्होंने यह भी जोड़ा कि ऐसे बयानों से भाजपा का हर नेता अपनी पार्टी की छवि को और खराब कर रहा है.और इसका असर केवल पार्टी पर नहीं, बल्कि पूरे देश की राजनीति पर पड़ता है.

राजद की अपील: सकारात्मक और सम्मानजनक राजनीति की जरूरत

एजाज अहमद ने अंत में भाजपा से अपील की कि वह इस तरह की गाली-गलौज की राजनीति से बाहर निकले और सकारात्मक, विकासात्मक दृष्टिकोण अपनाए.उन्होंने कहा कि,हम भाजपा से अपील करते हैं कि वह अपने आचरण को सुधारें. बिहार और देश की जनता ऐसी नफरत भरी राजनीति को नकार चुकी है. हमें ऐसे नेतृत्व की आवश्यकता है जो समाज में सौहार्द और भाईचारे को बढ़ावा दे, न कि जो केवल विवाद और अपमान फैलाए.

निष्कर्ष

एजाज अहमद के बयान से यह स्पष्ट होता है कि भाजपा की राजनीति का मूल भाषा और संस्कार से बहुत दूर है. यदि इस तरह की भाषा का प्रचार-प्रसार होता रहेगा.तो यह न केवल लोकतंत्र के लिए हानिकारक होगा. बल्कि समाज को भी और अधिक विभाजित करेगा. भाजपा को अपनी राजनीति की दिशा पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता है.

राष्ट्रीय जनता दल की ओर से यह संदेश स्पष्ट है: गाली-गलौज से राजनीति नहीं की जा सकती, और न ही इसे स्वीकार किया जा सकता है.
यह लेख बिहार की राजनीति में भाजपा के खिलाफ उठते सवालों को और तीव्र बनाता है.एजाज अहमद के ताजे बयान से भाजपा की गाली-गलौज वाली राजनीति पर सवाल उठते हैं, जो सरकार और प्रशासन के लिए एक कड़ी चुनौती साबित हो सकती है.

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