Bihar Politics : चाचा-भतीजे की राहें अलग: पशुपति पारस और चिराग पासवान की सियासी जंग

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kmSudha

बिहार

रालोजपा प्रमुख पशुपति पारस ने एनडीए गठबंधन छोड़ा, बिहार विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा उलटफेर

तीसरा पक्ष ब्यूरो ,पटना : राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी (रालोजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री पशुपति कुमार पारस ने सोमवार (14 अप्रैल 2025) को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) से नाता तोड़ने की घोषणा की. यह फैसला बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से ठीक पहले आया है, जिससे राज्य की सियासत में हलचल मच गई है. पारस ने अपनी पार्टी के साथ मिलकर सभी 243 विधानसभा सीटों पर स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने की तैयारी शुरू कर दी है, साथ ही विपक्षी महागठबंधन के साथ संभावित गठबंधन के संकेत भी दिए हैं.

पशुपति पारस और चिराग पासवान की सियासी जंग

बिहार की सियासत में चाचा पशुपति पारस और भतीजे चिराग पासवान के बीच तल्खी अब खुलकर सामने आ रही है. कभी एक ही छत के नीचे लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) की विरासत को संभालने वाले ये दोनों नेता अब अलग-अलग रास्तों पर चल पड़े हैं. जहां चिराग पासवान राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के साथ मजबूती से खड़े हैं, वहीं पशुपति पारस ने एनडीए से नाता तोड़कर नई राह तलाशने का ऐलान किया है. बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले यह सियासी ड्रामा सूबे की राजनीति में नए समीकरण बना रहा है.

पारस और चिराग के बीच तनातनी सिर्फ सियासी नहीं, बल्कि पारिवारिक भी है. हाल ही में खगड़िया में रामविलास पासवान की पहली पत्नी राजकुमारी देवी के साथ संपत्ति विवाद ने सुर्खियां बटोरीं. चिराग ने चाचा पर उनकी मां को घर से बेदखल करने का आरोप लगाया, जबकि पारस ने इसे सियासी साजिश करार दिया. पारस ने चिराग पर पलटवार करते हुए खगड़िया से दिल्ली तक संपत्ति के बंटवारे की मांग उठाई.

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पारस का एनडीए से मोहभंग होने की वजह

पारस ने पटना में बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर आयोजित ‘संकल्प महासम्मेलन’ में यह ऐलान किया. उन्होंने एनडीए पर अपनी पार्टी के साथ ‘अन्याय’ और ‘अपमान’ का आरोप लगाया, खासकर यह दावा किया कि उनकी पार्टी को दलित-केंद्रित होने के कारण उपेक्षित किया गया. पारस ने कहा, “2014 से हम एनडीए के वफादार सहयोगी रहे, लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में हमारी पार्टी के साथ नाइंसाफी हुई. एनडीए की बैठकों में बीजेपी और जदयू नेताओं ने हमें ‘पांच पांडव’ की चर्चा में शामिल नहीं किया.”उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर भी निशाना साधा और उनकी सरकार को ‘दलित-विरोधी’ और ‘भ्रष्ट’ करार दिया. पारस ने दावा किया कि उन्होंने बिहार के 22 जिलों का दौरा किया है और जनता नई सरकार चाहती है.

राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी (रालोजपा) के अध्यक्ष पशुपति पारस ने नीतीश कुमार की अगुवाई वाली एनडीए सरकार पर जमकर हमला बोला. उन्होंने सरकार को दलित विरोधी करार देते हुए कहा, “मैं 2014 से एनडीए का वफादार सहयोगी रहा, लेकिन लोकसभा चुनाव में मेरी पार्टी के साथ अन्याय हुआ। पिछले कुछ महीनों में बीजेपी और जेडीयू ने हमें पूरी तरह नजरअंदाज किया। अब हमारा एनडीए से कोई नाता नहीं.” पारस ने संकेत दिया कि वह इंडिया गठबंधन के साथ बातचीत कर सकते हैं, बशर्ते उन्हें “उचित सम्मान” मिले.

पारस ने बिहार की सभी 243 विधानसभा सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी शुरू कर दी है. उनकी पार्टी ने गांव-गांव जाकर संगठन को मजबूत करने का अभियान छेड़ा है. कुछ सूत्रों का कहना है कि पारस अपने बेटे यश राज को भी अलौली सीट से मैदान में उतार सकते हैं.

चिराग का एनडीए पर भरोसा

दूसरी ओर, केंद्रीय मंत्री और लोजपा (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान एनडीए के साथ अपनी स्थिति मजबूत कर चुके हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में उनकी पार्टी ने बिहार में दी गई पांचों सीटों पर जीत हासिल की, जिससे उनका कद बीजेपी के सामने बढ़ गया. चिराग ने चाचा के एनडीए छोड़ने की अटकलों पर तंज कसते हुए कहा, “अलग तो वही होता है जो साथ हो. वह एनडीए में थे ही कब? न लोकसभा चुनाव में, न विधानसभा की तैयारियों में उनकी कोई हिस्सेदारी थी.”

चिराग ने बिहार में एनडीए की एकजुटता पर जोर देते हुए कहा कि वह नीतीश कुमार और बीजेपी के साथ मिलकर 2025 के चुनाव में विपक्ष को करारा जवाब देंगे. उन्होंने यह भी दावा किया कि बिहार की जनता अब उनके साथ है, क्योंकि वह अपने पिता रामविलास पासवान की विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं.

बिहार की सियासत पर असर

चाचा-भतीजे की यह जंग बिहार की सियासत को नए मोड़ पर ले जा रही है. पासवान समुदाय, जो बिहार की आबादी का करीब 6% है, दोनों नेताओं के बीच बंटा हुआ दिख रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि चिराग का जनाधार, खासकर युवाओं और शहरी मतदाताओं में, पारस की तुलना में मजबूत है. वहीं, पारस ग्रामीण इलाकों में अपनी पकड़ बनाने की कोशिश कर रहे हैं.

पारस के एनडीए छोड़ने से इंडिया गठबंधन को फायदा हो सकता है, लेकिन आरजेडी और कांग्रेस अभी तक उन्हें खुलकर गले लगाने से हिचक रहे हैं. दूसरी ओर, चिराग की एनडीए में मजबूत स्थिति नीतीश और बीजेपी के लिए राहत की बात है, लेकिन पारस की बगावत कुछ सीटों पर नुकसान पहुंचा सकती है.

क्या कहती है जनता ?

बिहार के हाजीपुर और खगड़िया जैसे इलाकों में जनता की राय बंटी हुई है. कुछ लोग चिराग को रामविलास की असली विरासत का वारिस मानते हैं, तो कुछ पारस के अनुभव को तरजीह देते हैं. एक स्थानीय मतदाता ने कहा, “चिराग में जोश है .

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