विशेष सर्वेक्षण कर्मियों की बहाली को लेकर बवाल, विपक्ष ने सरकार को घेरा
तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना, 12 सितम्बर 2025 –राजधानी पटना में विशेष सर्वेक्षण संविदाकर्मियों (7480) पर हुए पुलिस लाठीचार्ज ने बिहार की सियासत को गरमा दिया है. संविदाकर्मी लंबे समय से अपनी बहाली और सेवा स्थायित्व की मांग कर रहे थे, लेकिन जब वे भाजपा प्रदेश कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर रहे थे, तभी पुलिस ने उन पर बल प्रयोग किया.लाठीचार्ज की घटना में कई कर्मी घायल हुए, जिसके बाद विपक्षी दलों ने इसे “तानाशाही रवैया” बताते हुए सरकार पर सीधा हमला बोला है.
माले ने घटना को बताया लोकतंत्र पर हमला
भाकपा (माले) राज्य सचिव कुणाल ने इस घटना की कड़ी निंदा की है.उन्होंने कहा कि भाजपा-जदयू सरकार नौजवानों को रोजगार देने के बजाय उनकी नौकरी छीन रही है. जब युवा अपनी मांगों के समर्थन में सड़क पर उतरते हैं, तो उन पर लाठियाँ बरसाई जाती हैं. यह केवल संविदाकर्मियों पर हमला नहीं है, बल्कि पूरे लोकतंत्र और युवाओं की आकांक्षाओं पर प्रहार है.
कुणाल ने आरोप लगाया कि सरकार में इतनी राजनीतिक इच्छाशक्ति नहीं है कि वह आंदोलनरत युवाओं से संवाद कर सके. “बातचीत करने का साहस इस सरकार में नहीं है, इसलिए वह पुलिसिया दमन और उत्पीड़न का रास्ता अपनाती है.
पाँच सूत्री मांगों पर अड़ी है लड़ाई
संविदाकर्मी संगठन ने अपनी पाँच सूत्री मांगों को सरकार के सामने रखा है.इनमें प्रमुख हैं:
बर्खास्तगी का आदेश तुरंत वापस लिया जाए.
सभी संविदाकर्मियों की बहाली सुनिश्चित की जाए.
सेवाओं को स्थायी स्वरूप दिया जाए.
उचित वेतनमान और भत्तों की गारंटी मिले.
भविष्य की भर्ती प्रक्रिया में संविदाकर्मियों को प्राथमिकता दी जाए.
माले ने सरकार से अपील की है कि इन मांगों को अविलंब स्वीकार किया जाए, क्योंकि यह सिर्फ संविदाकर्मियों का सवाल नहीं, बल्कि बिहार के हजारों परिवारों का जीवन और भविष्य इससे जुड़ा है.
भाजपा-जदयू सरकार पर विपक्ष का तीखा हमला
घटना के बाद विपक्षी दलों ने इसे चुनावी मुद्दा बनाने का संकेत दिया है.राजद और कांग्रेस ने भी कहा कि सरकार युवाओं को लगातार धोखा दे रही है.विपक्ष का कहना है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री समेत पूरी सरकार बेरोजगारों को केवल वादे करती है, लेकिन जब वे हक मांगते हैं, तो लाठीचार्ज करवा दिया जाता है.
माले के नेताओं ने स्पष्ट कहा है कि आने वाले दिनों में यह आंदोलन और तेज होगा.बिहार के युवा इस तानाशाही रवैये का मुंहतोड़ जवाब देंगे.कुणाल ने चेतावनी दी.
ये भी पढ़े :तेजस्वी यादव 16 सितंबर से करेंगे बिहार अधिकार यात्रा की शुरुआत
ये भी पढ़े :अखिलेश यादव का मोदी सरकार पर हमला: विदेश नीति में लगातार असफलताओं पर उठाए सवाल
रोजगार पर लगातार सवाल
बिहार में रोजगार का सवाल पिछले कई वर्षों से राजनीतिक बहस का मुख्य मुद्दा बना हुआ है.राज्य सरकार बार-बार नई योजनाओं और भर्ती की घोषणाएं करती है, लेकिन संविदा पर नियुक्त कर्मचारियों का स्थायीकरण अब भी अधर में लटका हुआ है.
विशेष सर्वेक्षण कर्मियों की बहाली को लेकर भी सरकार ने पहले सकारात्मक संकेत दिए थे, लेकिन हालिया बर्खास्तगी आदेश ने युवाओं में भारी असंतोष पैदा कर दिया है.
सरकार पर भरोसा घटता हुआ
सामाजिक-राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सरकार ने समय रहते इस मसले का समाधान नहीं किया, तो आने वाले चुनावों में इसका गंभीर असर देखने को मिल सकता है. संविदाकर्मी वर्ग सिर्फ खुद तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके परिवार और समाज का बड़ा हिस्सा भी इस असंतोष से प्रभावित होगा.
आंदोलन और तेज होने की संभावना
लाठीचार्ज की घटना के बाद संविदाकर्मियों का गुस्सा और भड़क गया है. उन्होंने ऐलान किया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक वे आंदोलन जारी रखेंगे.वहीं माले और अन्य विपक्षी दल इस आंदोलन को समर्थन देने की बात कर चुके हैं.
निष्कर्ष
पटना में विशेष सर्वेक्षण संविदाकर्मियों पर हुआ लाठीचार्ज केवल एक प्रशासनिक कार्रवाई भर नहीं है, बल्कि यह बिहार की राजनीति में एक बड़ा मुद्दा बन चुका है. एक ओर सरकार पर युवाओं से वादाखिलाफी का आरोप लग रहा है, तो दूसरी ओर विपक्ष इस घटना को “लोकतंत्र पर हमला” बताकर राजनीतिक दबाव बढ़ा रहा है.
अब देखना यह होगा कि सरकार अपनी कठोर छवि बदलते हुए संवाद और समाधान का रास्ता अपनाती है या फिर यह आंदोलन आने वाले महीनों में बिहार की सियासत को और गर्माने वाला साबित होगा.

I am a blogger and social media influencer. I have about 5 years experience in digital media and news blogging.



















