कांग्रेस की CWC बैठक: जनता की नजर में क्या है?
तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना,24 सितंबर 2025 भाजपा प्रदेश प्रवक्ता व पूर्व विधायक प्रेम रंजन पटेल ने कांग्रेस की पहली CWC बैठक को लेकर प्रेस बयान जारी किया है.उनका कहना है कि यह बैठक केवल सियासी अस्तित्व बचाने और गठबंधन में दबाव बनाने की कवायद है.
पटेल ने बताया कि बिहार की जनता जान चुकी है कि कांग्रेस का कोई ठोस जनाधार अब नहीं बचा है. ऐसे में CWC जैसी बैठकों का कोई वास्तविक प्रभाव नहीं पड़ता.
राहुल गांधी की “वोट अधिकार यात्रा”: क्या था असली मकसद?
पटेल ने यह भी स्पष्ट किया कि राहुल गांधी की “वोट अधिकार यात्रा” भी केवल गठबंधन में हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए की गई थी.
जनता के मुद्दों को पीछे रखा गया.
केवल सियासी दबाव और दिखावा का उद्देश्य था.
बिहार की जनता अब ऐसी यात्राओं को केवल सियासी नाटक मानती है.
बिहार में घटता कांग्रेस जनाधार
विश्लेषकों के अनुसार, कांग्रेस का जनाधार लगातार सिकुड़ रहा है.
महागठबंधन में शामिल होने के बावजूद कांग्रेस अपनी राजनीतिक प्रभावशीलता साबित नहीं कर पा रही.
पटेल के अनुसार, आज कांग्रेस बोझ बन चुकी है.
विकास, गरीब और किसान के मुद्दों पर कोई ठोस कदम नहीं.
जनता बैठकों और यात्राओं को केवल दिखावे के तौर पर देख रही है.
CWC बैठक: जनता के मुद्दों की लड़ाई या सियासी सौदेबाज़ी?
पटेल ने स्पष्ट किया कि:
बैठक का उद्देश्य सियासी दबाव और अस्तित्व बचाना है.
जनता के वास्तविक मुद्दे बैठक में शामिल नहीं हैं.
कांग्रेस महागठबंधन में सिर्फ दबाव और हिस्सेदारी दिखाने तक सीमित है.
इस स्थिति में यह साफ है कि CWC बैठक और राहुल गांधी की यात्रा केवल सियासी रणनीति का हिस्सा हैं, न कि जनता के हित की लड़ाई.
जनता का संदेश: कांग्रेस को क्या समझना चाहिए?
बिहार की जनता ने अपने व्यवहार और प्रतिक्रियाओं से स्पष्ट किया है:
कांग्रेस की रणनीतियाँ अब काम नहीं कर रही.
बैठकों और यात्राओं का कोई वास्तविक असर नहीं.
जनता अब सिर्फ दिखावे को नहीं अपनाएगी.
पटेल के अनुसार, कांग्रेस को अपने जनाधार को मजबूत करने और विकास मुद्दों पर काम करने की आवश्यकता है.
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निष्कर्ष: बिहार में कांग्रेस का राजनीतिक अस्तित्व
भाजपा प्रदेश प्रवक्ता प्रेम रंजन पटेल ने कहा कि कांग्रेस की CWC बैठक केवल महागठबंधन में दबाव बनाने और सीटों की सौदेबाज़ी की कवायद है.
जनता ने कांग्रेस को नकार दिया है.
बैठकों और यात्राओं का असर अब नहीं हो रहा.
बिहार में कांग्रेस का प्रभाव लगातार घट रहा है.
इसलिए बिहार की राजनीति में कांग्रेस अब केवल दिखावे और सियासी दबाव तक सीमित है, और जनता के वास्तविक मुद्दों से दूर है.

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