मंगनीलाल मंडल: तेजस्वी यादव का ‘पोलिटिकल मास्टरस्ट्रोक

| BY

kmSudha

बिहारतीसरा पक्ष आलेख
मंगनीलाल मंडल: तेजस्वी यादव का ‘पोलिटिकल मास्टरस्ट्रोक

मंडल की ताजपोशी से बदलेगा बिहार का सामाजिक-सियासी समीकरण?

तीसरा पक्ष डेस्क,पटना: बिहार की राजनीति में हर निर्णय सिर्फ एक पद या चेहरा नहीं होता — वह सामाजिक और राजनीतिक संतुलन की बिसात पर चला गया चाल भी होता है. राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता तेजस्वी यादव ने मंगनीलाल मंडल को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर ऐसी ही एक चाल चली है जिसे राजनीतिक विश्लेषक “मास्टरस्ट्रोक” कह रहे हैं.

यह निर्णय सिर्फ एक संगठनात्मक बदलाव नहीं, बल्कि एक स्पष्ट सामाजिक और रणनीतिक संदेश है — कि राजद आज भी सामाजिक न्याय की राजनीति का धुरी है, और उसका नेतृत्व यथार्थ में वंचितों को भागीदारी दे रहा है.

अतिपिछड़ों को नेतृत्व देकर राजद ने बदल दिया समीकरण

बिहार की राजनीति में दशकों से अगड़े-पिछड़े, दलित-मुस्लिम समीकरण का बोलबाला रहा है, लेकिन “अतिपिछड़ा वर्ग” को अब तक केवल वोट बैंक के तौर पर इस्तेमाल किया गया. तेजस्वी यादव ने इस वर्ग से मंगनीलाल मंडल को अध्यक्ष बनाकर एक ऐसा सियासी खालीपन भरा है, जिसे अब तक किसी भी दल ने गंभीरता से नहीं लिया था.

यह भी पढ़े :-जमाई आयोग से RSS कोटा तक: तेजस्वी का तीखा वार!
यह भी पढ़े :-माले नेताओं ने पीएम से पूछा — कहां है MSP, कहां है पानी?
यह भी पढ़े :-बिहार में RSS कोटा से सरकार? तेजस्वी यादव का आरोप

यह फैसला राजद को अतिपिछड़ों के बीच एक स्थायी और भरोसेमंद विकल्प के रूप में स्थापित कर सकता है — खासकर तब, जब बीजेपी और जेडीयू दोनों ही वर्गीय संतुलन को साधने की पुरानी शैली में उलझे हुए हैं.

संगठन में आरक्षण: नारे से नीति तक

तेजस्वी यादव का नेतृत्व सिर्फ रैलियों और नारों तक सीमित नहीं रहा है. उन्होंने राजद संगठन में दलितों और अतिपिछड़ों के लिए आरक्षण लागू कर एक ऐसी नीति अपनाई है, जिसे कोई अन्य राष्ट्रीय या क्षेत्रीय दल नहीं अपना सका.

यह मंगनीलाल मंडल की नियुक्ति उसी नीतिगत सोच का परिणाम है — जहां नेतृत्व वास्तविक प्रतिनिधित्व और भागीदारी पर आधारित है, न कि प्रतीकों और इवेंट्स पर.

2025 की तैयारी का संकेत

यह नियुक्ति 2025 के विधानसभा चुनावों के ठीक पहले की गई है. साफ है कि राजद अब संगठनात्मक रूप से मजबूत, वर्गीय रूप से संतुलित और नेतृत्व के स्तर पर समावेशी बनने की दिशा में पूरी तरह सक्रिय है.

तेजस्वी यादव का यह कदम भाजपा और जेडीयू के लिए भी चुनौतीपूर्ण बन सकता है, क्योंकि अब उन्हें केवल जातिगत नहीं, सामाजिक न्याय के आंतरिक मॉडल से मुकाबला करना होगा.

जगदानंद सिंह की विरासत को आगे ले जाने का प्रयास

85 वर्षीय निवर्तमान अध्यक्ष जगदानंद सिंह के अनुशासित और विचारशील कार्यकाल के बाद यह नियुक्ति संतुलन बनाए रखने का भी प्रयास है. तेजस्वी ने जहां संगठन में वरिष्ठता और अनुभव का सम्मान किया, वहीं युवा नेतृत्व को आगे लाकर बदलाव की दिशा भी बनाई.यह संतुलन ही राजनीति को गहराई देता है.

Trending news

Leave a Comment