पटना विश्वविद्यालय को केंद्रीय दर्जा दिलाने की जंग तेज: आइसा का बिगुल

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Ajit Kumar

बिहार
पटना विश्वविद्यालय को केंद्रीय दर्जा दिलाने की जंग तेज: आइसा का बिगुल

केंद्रीय दर्जा हक है, एहसान नहीं – आइसा

तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना,20 सितंबर 2025– पटना विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा दिलाने की मांग अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है.राजधानी पटना की सड़कों पर आज छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों ने मिलकर जोरदार मार्च किया है.विश्वविद्यालय परिसर से कारगिल चौक तक निकला यह जुलूस सिर्फ एक मांग नहीं बल्कि बिहार की शिक्षा व्यवस्था को बचाने का ऐलान था. इस आंदोलन में छात्र संगठन आइसा की सक्रिय भागीदारी ने माहौल को और भी धारदार बना दिया.

केंद्रीय दर्जा हक है, एहसान नहीं – आइसा

केंद्रीय दर्जा हक है, एहसान नहीं – आइसा

आइसा राज्य सह सचिव कुमार दिव्यम ने स्पष्ट कहा कि पटना विश्वविद्यालय का केंद्रीय दर्जा कोई कृपा नहीं बल्कि इसका ऐतिहासिक हक है. उन्होंने ऐलान किया कि यह लड़ाई अब केवल नारे तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि चरणबद्ध आंदोलन से पूरे राज्य को झकझोर देगी.

नीतीश सरकार पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप

आइसा नेताओं ने बिहार सरकार को घेरा. राज्य उपाध्यक्ष नीरज यादव और आशीष साह ने कहा कि जब सत्ता से बाहर थे तब नीतीश कुमार खुद केंद्रीय दर्जे की मांग उठाते थे, लेकिन आज जब वे कुर्सी पर हैं तो इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए हैं. उनका तंज था – सरकार का यह मौन बिहार की शिक्षा व्यवस्था के लिए खतरनाक है.

संसाधनों के अभाव में जर्जर हो रहा है विश्वविद्यालय

छात्र नेताओं का कहना था कि लगातार बजट और संसाधनों की कमी से पटना विश्वविद्यालय अपनी चमक खोता जा रहा है. कभी भारत का प्रतिष्ठित संस्थान कहलाने वाला यह विश्वविद्यालय आज ढांचागत संकट, शिक्षकों की कमी और शोध कार्यों में गिरावट से जूझ रहा है.

केंद्रीय दर्जा ही विश्वविद्यालय को बचाने का रास्ता”

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि अगर अब भी कदम नहीं उठाए गए तो पटना विश्वविद्यालय का भविष्य और खराब होगा. उनका मानना है कि केंद्रीय दर्जा मिलने से न केवल संसाधन आएंगे बल्कि शोध, शिक्षण और बुनियादी ढांचे को भी नई ऊर्जा मिलेगी.

शिक्षा बचाने की जंग में उतरे छात्र-शिक्षक-कर्मचारी

मार्च में नीतीश कुमार, आदर्श गुप्ता, अनिरुद्ध समेत दर्जनों आइसा कार्यकर्ता शामिल रहे.सभी ने संकल्प लिया कि यह आंदोलन सिर्फ पटना विश्वविद्यालय तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि बिहार की उच्च शिक्षा को बचाने की राज्यव्यापी मुहिम बनेगा.

आइसा का साफ संदेश है – केंद्रीय दर्जे की जंग सिर्फ पटना विश्वविद्यालय की नहीं, बल्कि बिहार के भविष्य की लड़ाई है.

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