तीसरा व्यक्ति कौन? राहुल गांधी के सवाल पर राजद ने चुनाव आयोग को घेरा
तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना, 18 सितम्बर 2025: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा चुनाव आयोग पर लगाए गए आरोपों ने देश की राजनीति में हलचल मचा दिया है . इन आरोपों को राजद ने बेहद गंभीर बताते हुए चुनाव आयोग से तत्काल और पारदर्शी स्पष्टीकरण देने की मांग किया है.
राजद के प्रदेश प्रवक्ता चित्तरंजन गगन ने कहा कि राहुल गांधी ने बेहद अहम मुद्दा उठाया है, जिस पर पूरे देश की नज़रें टिकी हुई हैं.उन्होंने पूछा कि आखिरकार वह ‘तीसरा व्यक्ति’ कौन है जो सेंट्रलाइज्ड तरीके से सॉफ़्टवेयर के ज़रिए मतदाताओं के नाम डिलीट कर रहा है? क्या यह किसी संगठित षड्यंत्र का हिस्सा है?
गगन ने कहा कि यह मामला किसी एक क्षेत्र या राज्य तक सीमित नहीं है बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठाता है. यदि सॉफ़्टवेयर आधारित छेड़छाड़ करके मतदाता सूची में नाम गायब किए जा रहे हैं, तो यह लोकतंत्र की जड़ों को कमजोर करने वाला मामला है.
चुनाव आयोग को देना होगा जवाब
राजद प्रवक्ता का कहना है कि लोकतंत्र में चुनाव आयोग सबसे महत्वपूर्ण और निष्पक्ष संस्था है.लेकिन यदि उस पर ऐसे सवाल उठते हैं और वह चुप रहता है, तो लोगों के मन में संदेह और गहरा हो जाता है
.गगन ने कहा की, चुनाव आयोग को सार्वजनिक रूप से बताना चाहिए कि मतदाताओं के नाम डिलीट करने के पीछे कौन लोग हैं.और यह किस सॉफ़्टवेयर के माध्यम से हो रहा है.अगर आयोग इस पर चुप्पी साधता है तो यह पूरे चुनावी तंत्र की पारदर्शिता पर काला धब्बा होगा.
भाजपा की भूमिका पर भी उठे सवाल
चित्तरंजन गगन ने यह भी सवाल खड़ा किया है कि आखिर राहुल गांधी के आरोपों का जवाब देने के लिए भाजपा क्यों सामने आई? उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने तो चुनाव आयोग से जवाब मांगा था, न कि भाजपा से.फिर भाजपा और उसके नेता इतनी बेचैनी क्यों दिखा रहे हैं?
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उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा का यह रवैया संदेह को और गहरा करता है.यदि भाजपा का इन आरोपों से कोई लेना-देना नहीं है, तो उन्हें चुप रहकर चुनाव आयोग को जवाब देने देना चाहिए.
लोकतंत्र में पारदर्शिता ही सबसे बड़ी ताकत
गगन ने कहा कि लोकतंत्र का आधार विश्वास और पारदर्शिता है.यदि आम मतदाता को यह भरोसा ही न रहे कि उसका वोट सुरक्षित है या सही जगह दर्ज हो रहा है, तो पूरा लोकतांत्रिक ढांचा सवालों के घेरे में आ जाएगा.उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि इस मामले पर चुनाव आयोग ने जल्द स्पष्टीकरण नहीं दिया, तो विपक्षी दल बड़े आंदोलन का रास्ता अपना सकते हैं.
विपक्ष की एकजुटता बढ़ने की संभावना
विशेषज्ञों का मानना है कि राहुल गांधी द्वारा उठाए गए इस मुद्दे से विपक्षी एकजुटता को नई ताकत मिल सकती है.राजद समेत कई दल इस मामले को जन-जन तक ले जाने की तैयारी में जुट सकते हैं.चुनावी वर्ष में यह विवाद भाजपा और चुनाव आयोग दोनों के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है.
निष्कर्ष
राहुल गांधी द्वारा उठाए गए सवालों ने चुनावी प्रक्रिया पर एक बड़ी बहस छेड़ दिया है.राजद ने इसे लोकतंत्र की रक्षा से जुड़ा मामला बताया है और चुनाव आयोग से पारदर्शी स्पष्टीकरण की मांग की है. अब देखना यह होगा कि चुनाव आयोग इन गंभीर सवालों का जवाब कैसे देता है और भाजपा की भूमिका इस पूरे विवाद में कितनी उजागर होती है.

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