SIR विवाद पर पटना में भाकपा माले का प्रदर्शन, CEC पर गंभीर आरोप

| BY

Ajit Kumar

बिहार
पटना में SIR के विरोध में भाकपा माले के प्रदर्शन में संदीप सौरभ और पार्टी कार्यकर्ता

संदीप सौरभ ने ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी और SIR रोकने की मांग की, माले ने चुनाव रद्द करने की भी मांग उठाई

तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना, 26 सितंबर 2026: विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर बिहार में राजनीतिक विरोध लगातार तेज हो रहा है. शनिवार को राष्ट्रव्यापी आह्वान के तहत भाकपा माले ने पटना के जीपीओ गोलंबर पर प्रदर्शन किया. पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी, SIR को निलंबित करने और पुनरीक्षण के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए नामों को बहाल करने की मांग की.

भाकपा माले ने इसके साथ ही SIR के बाद हुए चुनावों को रद्द करने, निर्वाचन आयोग की स्वतंत्र एवं लोकतांत्रिक कार्यप्रणाली बहाल करने तथा चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की मौजूदा व्यवस्था में बदलाव की मांग भी उठाई.

गौरतलब है कि SIR को लेकर भाकपा माले पहले भी मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई और प्रक्रिया पर रोक की मांग कर चुकी है. 23 सितंबर को पार्टी ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग की मांग तथा SIR के बाद हुए चुनावों में नए सिरे से चुनाव कराने की मांग रखी थी.

Untitled Design 51 तीसरा पक्ष

संदीप सौरभ ने लगाए गंभीर आरोप

प्रदर्शन को संबोधित करते हुए पालीगंज विधायक और भाकपा माले नेता संदीप सौरभ ने SIR को असंवैधानिक और लोकतंत्र विरोधी बताया. प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार उन्होंने कहा कि भाकपा माले और विपक्ष लंबे समय से इसका विरोध करते रहे हैं और आंदोलन जारी रहेगा.

संदीप सौरभ ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की अविलंब गिरफ्तारी की मांग भी की है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार को चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी करनी थी, इसलिए नियमों में बदलाव कर ज्ञानेश कुमार को मुख्य चुनाव आयुक्त बनाया गया.

यह आरोप भाकपा माले का राजनीतिक दावा है. उपलब्ध सार्वजनिक रिपोर्टिंग में चुनाव आयोग ने SIR से जुड़े हालिया फैसलों को सर्वसम्मति से लिया गया बताया है.।

SIR के बाद हुए चुनाव रद्द करने की मांग

पूर्व विधायक गोपाल रविदास ने प्रदर्शन के दौरान SIR के बाद हुए सभी चुनाव रद्द करने की मांग की है.उनके अनुसार बड़ी संख्या में नागरिकों को मतदान प्रक्रिया से बाहर करके कराया गया चुनाव वैध नहीं माना जाना चाहिए.

प्रेस विज्ञप्ति में भाकपा माले ने दावा किया है कि 13 करोड़ नागरिकों को वोटिंग प्रक्रिया से बाहर किया गया है. हालांकि उपलब्ध रिपोर्टों में SIR के तहत विभिन्न राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की ड्राफ्ट मतदाता सूचियों से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने की जानकारी सामने आई है. एक रिपोर्ट के अनुसार 30 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में जारी ड्राफ्ट रोल में 13.37 करोड़ से अधिक नाम बाहर हुए थे. यह आंकड़ा ड्राफ्ट सूची में हटाए गए नामों का है; इसे सीधे तौर पर 13 करोड़ नागरिकों को स्थायी रूप से मतदान से वंचित कर दिया गया कहना अलग दावा होगा.

Untitled Design 52 तीसरा पक्ष

मतदाता सूची और चुनावी पारदर्शिता पर जोर

प्रदर्शन में शामिल नेताओं ने कहा कि मतदाता सूची की शुद्धता और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित करना निर्वाचन आयोग की जिम्मेदारी है. पार्टी ने मांग किया कि SIR के दौरान मतदाता सूची से बाहर किए गए लोगों के अधिकारों की रक्षा की जाए और पात्र मतदाताओं के नाम बहाल किए जाएं.

माले नेताओं ने कथित वोट चोरी के आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने और यदि किसी स्तर पर अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है.

चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति व्यवस्था बदलने की मांग

भाकपा माले ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की वर्तमान प्रणाली को समाप्त करने की भी मांग की है . पार्टी चाहती है कि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति करने वाली समिति में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को शामिल किया जाए.

पार्टी का तर्क है कि निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है और चुनाव आयोग से जुड़े निर्णयों तथा नियुक्ति प्रक्रिया में व्यापक पारदर्शिता होनी चाहिए.

SIR को लेकर राजनीतिक विवाद के बीच हाल के दिनों में चुनाव आयोग के कामकाज और मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका को लेकर विपक्षी दलों की ओर से लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं. वहीं आयोग की ओर से आंतरिक मतभेदों की चर्चाओं को सामान्य संस्थागत प्रक्रिया बताया गया है.

ये भी पढ़े :जमुई छात्रा मामले पर पटना यूनिवर्सिटी में आइसा का प्रदर्शन
ये भी पढ़े :मायावती ने PDA रथ पर उठाए सवाल, सपा की रणनीति पर निशाना

प्रदर्शन में ये नेता रहे मौजूद

पटना के जीपीओ गोलंबर पर हुए प्रदर्शन में भाकपा माले पोलित ब्यूरो सदस्य कॉमरेड अमर, पालीगंज विधायक संदीप सौरभ, पूर्व विधायक गोपाल रविदास, महानगर सचिव जितेंद्र कुमार, राज्य कमिटी सदस्य एसके शर्मा, रणविजय कुमार, मुकेश मुक्त, आइसा बिहार राज्य उपाध्यक्ष सबा आफरीन, ऐपवा नेत्री अनुराधा कुमारी, राखी मेहता, अनय मेहता और मुर्तजा अली सहित पार्टी के कई कार्यकर्ता मौजूद रहे.

SIR विवाद अब सिर्फ मतदाता सूची तक सीमित नहीं

पटना का यह प्रदर्शन दिखाता है कि SIR का मुद्दा अब केवल मतदाता सूची के पुनरीक्षण तक सीमित नहीं रहा है. इसके साथ निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता, चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति, मतदाताओं के अधिकार और चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता जैसे व्यापक सवाल भी राजनीतिक बहस का हिस्सा बन चुका हैं.

हालांकि, इन सवालों पर अलग-अलग राजनीतिक दलों और निर्वाचन आयोग के दावे अलग हैं. इसलिए मतदाता सूची में वास्तविक बदलाव, हटाए गए नामों की स्थिति, दावे-आपत्तियों के निपटारे और किसी चुनाव पर उसके वास्तविक प्रभाव को अलग-अलग तथ्यों के आधार पर देखना महत्वपूर्ण होगा.

निष्कर्ष

पटना में भाकपा माले ने SIR के खिलाफ अपना आंदोलन तेज करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त की गिरफ्तारी, मतदाता सूची से हटाए गए नामों की बहाली और SIR के बाद हुए चुनावों को रद्द करने जैसी मांगें उठाई हैं. आने वाले दिनों में SIR से जुड़े दावे, निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया और राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं इस विवाद की दिशा तय करने वाले प्रमुख मुद्दे रहेंगे.

Trending news

Leave a Comment