दीपंकर भट्टाचार्य के नेतृत्व में विधायक आवास से गांधी मैदान तक निकलेगा जनसैलाब
तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना, 31 अगस्त 2025:बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज है. वोटर अधिकार की मांग को लेकर 1 सितंबर को पटना की सड़कों पर जनसैलाब उमड़ने वाला है. इस दिन INDIA गठबंधन के आह्वान पर आयोजित ‘वोटर अधिकार यात्रा’ में भाकपा-माले की बड़ी भागीदारी रहने वाली है.पार्टी ने पटना में अपनी तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया है और कार्यकर्ता जोश में हैं.
पार्टी महासचिव का. दीपंकर भट्टाचार्य स्वयं इस विशेष मार्च की अगुवाई करेंगे, जो सुबह 9 बजे वीरचंद पटेल पथ स्थित विधायक आवास से शुरू होकर डाकबंगला चौराहा होते हुए गांधी मैदान पहुंचेगा.यहीं से सुबह 11 बजे ‘वोटर अधिकार यात्रा’ का केंद्रीय मार्च शुरू होगा.
पूरे शहर में चला जनसंपर्क अभियान
31 अगस्त को भाकपा-माले और इससे जुड़े संगठनों ने पटना के कोने-कोने में जनसंपर्क अभियान चलाया. प्रचार वाहन के जरिए कुर्जी, दीघा, राजा बाजार, आशियाना, कंकड़बाग, चांगर, एनआईटी मोड़, सब्जीबाग, लालबाग, न्यू मार्केट, बोरिंग रोड और स्टेशन जैसे इलाकों में अभियान की गूंज सुनाई दी.
गली-गली में मच गया शोर, वोट चोर गद्दी छोड़” जैसे नारों ने माहौल को गर्मा दिया.इस प्रचार अभियान की अगुवाई महानगर सचिव जितेन्द्र कुमार, युवा नेता पुनीत पाठक, फुटपाथ दुकानदार नेता शहजादे आलम, जसम के प्रमोद यादव और राजन ने की.
नुक्कड़ सभा में जनता से जुड़ी बातें
शाम को पटना जंक्शन पर आयोजित नुक्कड़ सभा में भाकपा-माले विधायक का. महानंद सिंह, एआइपीएफ के संयोजक कमलेश शर्मा और ऐक्टू के रणविजय कुमार ने सभा को संबोधित किया.
का. महानंद सिंह ने कहा,एसआईआर के नाम पर जो खेल हो रहा है.वह बिहार की जनता के साथ धोखा है.अब जनता चुप नहीं बैठेगी. कल पटना की सड़कों पर जनाक्रोश साफ दिखाई देगा.
कमलेश शर्मा ने इस आंदोलन को बदलाव की दस्तक बताते हुए कहा, यह सिर्फ एक यात्रा नहीं, बल्कि बिहार में एक नई सुबह की शुरुआत है. जनता ने इस बार बदलाव का मन बना लिया है. भाजपा-जदयू की कुर्सी डगमगाने लगी है.
सभा का संचालन युवा नेता पुनीत कुमार ने किया। बड़ी संख्या में फुटपाथ दुकानदार और आम नागरिक इस सभा में शामिल हुए और वक्ताओं की बातों को गंभीरता से सुना.
क्या है ‘वोटर अधिकार यात्रा’?
‘वोटर अधिकार यात्रा’ INDIA गठबंधन की एक प्रमुख पहल है, जिसका उद्देश्य बिहार सहित देशभर में वोटर डेटा से छेड़छाड़ और मतदाता सूची में गड़बड़ी जैसे मुद्दों को उजागर करना है. भाकपा-माले इसे जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा की लड़ाई मान रही है.
नज़रें अब 1 सितंबर पर टिकी हैं, जब पटना की सड़कों पर हजारों की संख्या में लोग उतरेंगे और अपने लोकतांत्रिक अधिकारों की गूंज पूरे राज्य में फैलाएंगे.

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