छात्र–युवा आंदोलन की ऐतिहासिक जीत, मुकदमों की वापसी तक संघर्ष जारी

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Ajit Kumar

बिहार
पटना में छात्र-युवा आंदोलन पर संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते आइसा और आरवाईए के नेता

आइसा और आरवाईए ने 30 जुलाई को राज्यव्यापी विरोध दिवस और पालीगंज में चक्का जाम का किया ऐलान

तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना, 26 जुलाई 2026: हालिया छात्र–युवा आंदोलन के बाद बिहार की राजनीति और छात्र संगठनों की सक्रियता एक नए चरण में पहुंच गई है. ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) और इंकलाबी नौजवान सभा (RYA) ने सरकार द्वारा आंदोलन से जुड़ी कुछ मांगों को स्वीकार किए जाने को छात्र-युवा एकजुटता की ऐतिहासिक जीत बताया है. हालांकि संगठनों का कहना है कि आंदोलन अभी समाप्त नहीं हुआ है.जब तक आंदोलनकारियों पर दर्ज सभी मुकदमे पूरी तरह वापस नहीं लिए जाते और गिरफ्तार नेताओं एवं छात्रों को रिहा नहीं किया जाता, तब तक संघर्ष जारी रहेगा.

पटना में आयोजित संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में छात्र नेताओं ने सरकार पर समझौते के बावजूद दमनात्मक कार्रवाई जारी रखने का आरोप लगाया है और आगामी दिनों के आंदोलनात्मक कार्यक्रमों की घोषणा कि है .

सरकार पर वादाखिलाफी और दमन का आरोप

संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए RYA के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजीत कुमार सिंह, शिवप्रकाश रंजन, जेएनयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष नीतीश कुमार, सबीर कुमार सहित कई छात्र नेताओं ने कहा कि सरकार ने बातचीत के दौरान आंदोलनकारियों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने का आश्वासन दिया था. इसके बावजूद विभिन्न जिलों में पुलिस कार्रवाई जारी है, जिससे सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल खड़ा होता हैं.

नेताओं का आरोप है कि आंदोलन शांतिपूर्ण ढंग से चलाया गया, लेकिन उसके बाद पुलिस ने कई स्थानों पर छात्र नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दिया है.

नेताओं के घरों पर छापेमारी का आरोप

छात्र संगठनों ने दावा किया है कि बिहार बंद के बाद सिवान, छपरा सहित कई जिलों में पुलिस ने छात्र नेताओं और भाकपा-माले से जुड़े कार्यकर्ताओं के घरों पर छापेमारी किया है .

वक्ताओं ने कहा कि पूर्व विधायक अमरजीत कुशवाहा सहित आइसा और आरवाईए के स्थानीय नेताओं के घरों पर पुलिस की कार्रवाई लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन है. उनका कहना है कि यदि सरकार ने समझौता किया था तो फिर इस प्रकार की कार्रवाई उचित नहीं माना जा सकता है.

गिरफ्तार नेताओं और छात्रों की रिहाई की मांग

संवाददाता सम्मेलन में पुलिस हिरासत में लिए गए सभी नेताओं और छात्रों की बिना शर्त तत्काल रिहाई की मांग दोहराई गई.

संगठनों ने जिन प्रमुख लोगों का उल्लेख किया, उनमें शामिल हैं—

विधायक संदीप सौरभ
धनंजय (राज्य अध्यक्ष, आइसा)
दीपकर मिश्र (राज्य सचिव, आइसा)
सबा आफरीन (राज्य उपाध्यक्ष, आइसा)
कुमार दिव्यम (छात्र नेता)

इसके अलावा आंदोलन के समर्थन में सामने आए राजद नेता तेज प्रताप यादव और विधायक गौतम कृष्ण की गिरफ्तारी की भी आलोचना की गई.

छात्र नेताओं ने आरोप लगाया कि एक ओर सरकार वार्ता करती है और दूसरी ओर लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराने वाले नेताओं और छात्रों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करती है.उनके अनुसार यह लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है.

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आंदोलन समाप्त नहीं, अगला चरण शुरू

आइसा और आरवाईए ने स्पष्ट किया है कि यह संघर्ष केवल कुछ मांगों तक सीमित नहीं है बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों और छात्र हितों से जुड़ा व्यापक आंदोलन है.

संगठनों का कहना है कि यदि सरकार मुकदमे वापस लेने और गिरफ्तार लोगों की रिहाई के अपने आश्वासन को लागू नहीं करती है तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा.

27 जुलाई से नेहा बोरा का बिहार दौरा

आंदोलन के अगले चरण के तहत आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा 27 जुलाई से दो दिवसीय बिहार दौरे पर रहेंगी.

दौरे के दौरान उनका कार्यक्रम निम्नलिखित रहेगा—

जेल में बंद छात्र नेताओं और आंदोलनकारियों से मुलाकात.
लाठीचार्ज में घायल छात्रों का हालचाल जानना.
विभिन्न विश्वविद्यालयों और छात्र संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक.
आगामी आंदोलन की रणनीति पर छात्रों के साथ संवाद.

संगठनों का कहना है कि यह दौरा आंदोलन को आगे की दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.

30 जुलाई को पूरे बिहार में विरोध दिवस

छात्र संगठनों ने 30 जुलाई को पूरे बिहार में राज्यव्यापी विरोध दिवस मनाने की घोषणा की है.

इसी दिन पालीगंज विधानसभा क्षेत्र में चक्का जाम का भी कार्यक्रम प्रस्तावित किया गया है. संगठनों का कहना है कि यह प्रदर्शन पुलिस कार्रवाई, गिरफ्तारियों और मुकदमों के विरोध में आयोजित किया जाएगा.

नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने शीघ्र कार्रवाई नहीं की तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा.

छात्र आंदोलन का राजनीतिक और सामाजिक महत्व

हालिया घटनाक्रम ने एक बार फिर यह स्पष्ट किया है कि छात्र आंदोलन केवल शैक्षणिक मांगों तक सीमित नहीं रह गया है. यह अब लोकतांत्रिक अधिकारों, प्रशासनिक जवाबदेही और नागरिक स्वतंत्रताओं जैसे व्यापक मुद्दों से भी जुड़ता दिखाई दे रहा है.

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में सरकार और छात्र संगठनों के बीच संवाद तथा प्रशासनिक निर्णय इस पूरे आंदोलन की दिशा तय करेंगे. वहीं छात्र संगठन अपनी घोषित रणनीति के अनुसार आंदोलन को जारी रखने की बात कह रहे हैं.

निष्कर्ष

आइसा और आरवाईए ने हालिया घटनाक्रम को छात्र-युवा एकजुटता की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है, लेकिन उनका कहना है कि मुकदमों की वापसी, गिरफ्तार नेताओं एवं छात्रों की रिहाई और सरकार द्वारा किए गए आश्वासनों के पूर्ण क्रियान्वयन तक संघर्ष जारी रहेगा.अब 27 जुलाई से शुरू होने वाला नेहा बोरा का बिहार दौरा और 30 जुलाई का राज्यव्यापी विरोध दिवस इस आंदोलन के अगले चरण की दिशा तय करने वाले महत्वपूर्ण कार्यक्रम माना जा रहा है.

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