211 नए डिग्री कॉलेजों में उर्दू-मैथिली समेत 5 विषयों पर प्रोफेसर नियुक्ति की मांग

| BY

Ajit Kumar

बिहार
211 नए डिग्री कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर नियुक्ति की मांग करते तेजस्वी यादव

तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर पद सृजन, अधिसूचना और नियमित भर्ती प्रक्रिया जल्द शुरू करने की मांग की

तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना : बिहार में 211 नए डिग्री कॉलेजों में शिक्षण व्यवस्था और विषयवार शिक्षकों की उपलब्धता को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है. राष्ट्रीय जनता दल के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर उर्दू, फारसी, अरबी, मैथिली और संस्कृत विषयों के असिस्टेंट प्रोफेसरों के पदों का निर्धारण एवं नियुक्ति प्रक्रिया शीघ्र शुरू करने की मांग की है.

तेजस्वी यादव के पत्र के अनुसार, इन नए महाविद्यालयों में ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के विद्यार्थी उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं. ऐसे में संबंधित विषयों के शिक्षकों की उपलब्धता को शिक्षण व्यवस्था के लिए जरूरी बताया गया है.

211 नए कॉलेजों में पहले से शुरू हो चुकी है पढ़ाई

बिहार में 211 नए राजकीय डिग्री कॉलेजों को राज्य के उन प्रखंडों तक उच्च शिक्षा पहुंचाने की पहल के तौर पर शुरू किया गया है, जहां डिग्री कॉलेजों की उपलब्धता नहीं थी.जून 2026 में सरकार ने इन कॉलेजों में शैक्षणिक गतिविधियां शुरू करने की तैयारी की थी और बाद में 15 जुलाई से इन संस्थानों में स्नातक स्तर की पढ़ाई शुरू किए जाने की जानकारी सामने आई.

राज्यपाल सचिवालय की वेबसाइट पर भी 211 नए डिग्री कॉलेजों से संबंधित प्रशासनिक और शिक्षक नियुक्ति से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध हैं. 10 अगस्त 2026 की एक अधिसूचना में इन कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसरों की संविदा नियुक्ति के लिए विश्वविद्यालयवार, विषयवार और कॉलेजवार आवंटन का उल्लेख किया गया है.

ऐसे में अब बहस का एक महत्वपूर्ण हिस्सा यह है कि शुरुआती शिक्षण व्यवस्था के साथ-साथ अलग-अलग विषयों के लिए नियमित और पर्याप्त शिक्षक पदों की संरचना किस तरह तय की जाए.

तेजस्वी यादव ने रखीं चार प्रमुख मांगें

तेजस्वी यादव के मुख्यमंत्री को लिखे पत्र के मुताबिक उनकी प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं ,

211 नए डिग्री कॉलेजों में उर्दू, फारसी, अरबी, मैथिली और संस्कृत विषयों के लिए आवश्यकता के अनुसार विषयवार असिस्टेंट प्रोफेसर पदों का निर्धारण और स्वीकृति की जाए.
स्वीकृत पदों के संबंध में तत्काल आधिकारिक अधिसूचना जारी की जाए, जिससे नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ सके.
स्वीकृत पदों पर असिस्टेंट प्रोफेसरों की नियमित नियुक्ति के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाए और उसे पारदर्शी तथा समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए.
नियमित नियुक्ति होने तक विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए अंतरिम शिक्षण व्यवस्था सुनिश्चित की जाए.

इन मांगों की पुष्टि आज प्रकाशित रिपोर्टों में भी हुई है, जिनमें तेजस्वी यादव के पत्र और चार प्रमुख मांगों का उल्लेख किया गया है.

विषयवार शिक्षकों का सवाल क्यों महत्वपूर्ण है?

नए कॉलेज खोलने का उद्देश्य केवल संस्थान स्थापित करना नहीं, बल्कि वहां नियमित और प्रभावी शिक्षण व्यवस्था उपलब्ध कराना भी है.खास तौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में नए कॉलेजों की स्थापना का सीधा संबंध स्थानीय विद्यार्थियों की उच्च शिक्षा तक पहुंच से है.

इसी संदर्भ में उर्दू, फारसी, अरबी, मैथिली और संस्कृत जैसे विषयों के लिए अलग-अलग शिक्षक पदों की जरूरत का सवाल सामने आया है.

अगस्त 2026 में 211 नए कॉलेजों में उर्दू, दर्शनशास्त्र, संस्कृत और मैथिली जैसे विषयों के पदों को लेकर शोधार्थियों की ओर से भी मांग उठने की खबरें सामने आई थीं.शोधार्थियों के प्रतिनिधिमंडल ने उपमुख्यमंत्री से मुलाकात कर इन विषयों के लिए पद सृजन की मांग की थी.

इससे स्पष्ट है कि विषयवार शिक्षक पदों का मुद्दा केवल अब उठी राजनीतिक मांग तक सीमित नहीं है, बल्कि नए कॉलेजों की अकादमिक संरचना को लेकर पहले से चर्चा का विषय रहा है.

ये भी पढ़े :बिहार में गरीबों के वास-आवास का मुद्दा, 2 अक्टूबर को महाजुटान
ये भी पढ़े :तेजस्वी का बड़ा आरोप, बिहार-बंगाल में फिर चुनाव की मांग

अब आगे क्या होगा?

तेजस्वी यादव की मांग का अगला चरण सरकार और उच्च शिक्षा विभाग की ओर से कार्रवाई से जुड़ा होगा. इसमें यह तय करना होगा कि किन कॉलेजों में किन विषयों की आवश्यकता है, कितने पद स्वीकृत किए जाएं और उन पदों को किस प्रक्रिया के तहत भरा जाए.

राज्यपाल सचिवालय के रिकॉर्ड से यह भी स्पष्ट है कि 211 नए कॉलेजों के लिए शिक्षक व्यवस्था को लेकर प्रक्रिया पहले से चल रही है.इसलिए वर्तमान मांग का प्रमुख बिंदु विशेष विषयों के लिए पद निर्धारण, आधिकारिक अधिसूचना और नियुक्ति प्रक्रिया को आगे बढ़ाना है.

निष्कर्ष

211 नए डिग्री कॉलेज बिहार में उच्च शिक्षा के विस्तार से जुड़ी बड़ी पहल हैं. अब इन संस्थानों में पढ़ाई शुरू होने के बाद शिक्षकों की पर्याप्त उपलब्धता और विषयवार अकादमिक व्यवस्था महत्वपूर्ण मुद्दा बन गई है.

तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री से उर्दू, फारसी, अरबी, मैथिली और संस्कृत के असिस्टेंट प्रोफेसरों के पद निर्धारित करने, अधिसूचना जारी करने और नियमित नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने की मांग की है. आगे सरकार इस मांग पर क्या निर्णय लेती है और इन विषयों के लिए कितने पद स्वीकृत होते हैं, यह इस पूरे मामले का अगला महत्वपूर्ण चरण होगा.

स्रोत: राष्ट्रीय जनता दल द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति/तेजस्वी प्रसाद यादव का मुख्यमंत्री को पत्र; संबंधित तथ्य सार्वजनिक समाचार रिपोर्टों और बिहार राजभवन के उपलब्ध रिकॉर्ड से मिलान किए गए हैं.

Trending news

Leave a Comment