Gen Z से Gen Alpha तक: बदलती पीढ़ियां और शिक्षा के सवाल
तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना : भारत में शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर युवाओं की सक्रियता लगातार बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है. पिछले कुछ वर्षों में जहां Gen Z ने परीक्षा प्रणाली, पेपर लीक, रोजगार और शिक्षा व्यवस्था में सुधार जैसे बड़े मुद्दों को लेकर आवाज बुलंद की, वहीं अब Generation Alpha के स्कूली बच्चे अपने स्कूलों में बिजली, पानी, शिक्षक, शौचालय और पढ़ाई के बेहतर माहौल जैसी बुनियादी सुविधाओं की मांग करते नजर आ रहे हैं.
इसी बीच कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत की एक सोशल मीडिया पोस्ट ने इस बहस को नया राजनीतिक आयाम दे दिया है.उन्होंने सवाल उठाया कि यदि पहले Gen Z को लेकर विवादित टिप्पणी की गई थी, तो अब शिक्षा के लिए प्रदर्शन कर रहे छोटे बच्चों को किस नजर से देखा जाएगा. इस टिप्पणी के केंद्र में बीजेपी सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत का वर्ष 2026 का चर्चित Generation Gutter बयान भी फिर चर्चा में आ गया.
क्या था Generation Gutter विवाद?
जुलाई 2026 में कंगना रनौत ने अपनी Instagram Stories के माध्यम से कुछ छात्र प्रदर्शनों और सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो पर प्रतिक्रिया दिया था . उन्होंने कुछ युवाओं के व्यवहार, भाषा और प्रदर्शन के तौर-तरीकों की आलोचना करते हुए Generation Gutter शब्द का इस्तेमाल किया था.
कंगना का कहना था कि कुछ युवा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर अश्लील भाषा, अनुशासनहीनता और गैर-जिम्मेदार व्यवहार को सामान्य बना रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे कुछ लोग पढ़ाई या आत्मनिर्भरता की बजाय सोशल मीडिया संस्कृति को बढ़ावा दे रहे हैं.
हालांकि इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली है. कई युवाओं, कंटेंट क्रिएटर्स और सार्वजनिक हस्तियों ने इसे पूरी युवा पीढ़ी का सामान्यीकरण बताते हुए आलोचना की. बाद में कंगना ने स्पष्टीकरण दिया कि उनका उद्देश्य पूरी Gen Z पीढ़ी को निशाना बनाना नहीं था, बल्कि केवल उन लोगों की आलोचना करना था जो उनके अनुसार अनुचित व्यवहार को बढ़ावा दे रहे थे.
सुप्रिया श्रीनेत ने उठाया नया सवाल
हाल ही में कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने X पर एक पोस्ट साझा करते हुए लिखा कि अब Gen Z के बाद Gen Alpha भी शिक्षा के अधिकार और स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं के लिए आवाज उठा रही है.
उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में पूछा कि यदि पहले Gen Z को Generation Gutter कहा गया था, तो अब स्कूलों में पंखा, पानी और शिक्षक की मांग करने वाले इन बच्चों को क्या कहा जाएगा. साथ ही उन्होंने शिक्षा के मुद्दे पर केंद्र और राज्य सरकारों की प्राथमिकताओं पर भी सवाल उठाए.
यह राजनीतिक प्रतिक्रिया ऐसे समय में सामने आई है जब विभिन्न राज्यों में स्कूली बच्चों के प्रदर्शन की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा हैं.
Gen Z के प्रदर्शन किन मुद्दों पर केंद्रित थे?
Gen Z से जुड़े अधिकांश आंदोलन उच्च शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं और रोजगार से संबंधित रहे हैं.पिछले कुछ वर्षों में पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं में देरी, बेरोजगारी और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता जैसे मुद्दों पर देशभर में कई प्रदर्शन हुआ था.
दिल्ली के जंतर-मंतर सहित कई स्थानों पर छात्रों और युवाओं ने परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग किया था . सोशल मीडिया ने इन आंदोलनों को व्यापक पहचान दिलाई. हालांकि कुछ प्रदर्शनों के दौरान इस्तेमाल हुई भाषा और वायरल वीडियो को लेकर भी विवाद पैदा हुआ, जिसके बाद सार्वजनिक बहस और तेज हो गई.

अब Gen Alpha क्यों कर रही है प्रदर्शन?
अब तस्वीर कुछ अलग है.इस बार प्रदर्शन कर रहे बच्चे प्रतियोगी परीक्षाओं या रोजगार की नहीं, बल्कि अपने स्कूलों में न्यूनतम सुविधाओं की मांग कर रहे हैं.
उत्तर प्रदेश, राजस्थान और बिहार सहित कई राज्यों में सरकारी विद्यालयों के छात्रों ने बिजली, स्वच्छ पेयजल, पंखे, पर्याप्त शिक्षक, डेस्क-बेंच और साफ शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं की मांग उठाई है.
उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले के सर्वोदय इंटर कॉलेज, किशनपुर में छात्रों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर स्कूल में बिजली, पंखे और पीने के पानी की व्यवस्था सुधारने की मांग की है.इस प्रदर्शन की विशेषता यह रही कि छात्रों ने AI की मदद से तैयार किए गए पोस्टर और प्लेकार्ड का भी उपयोग किया.
प्रदर्शन के बाद स्थानीय शिक्षा अधिकारियों ने बिजली व्यवस्था सुधारने, कक्षाओं में पंखे लगाने, वायरिंग ठीक कराने, डेस्क-बेंच उपलब्ध कराने और RO वाटर कूलर लगाने जैसे कदम उठाने का आश्वासन दिया.
राजस्थान के जालोर सहित कई जिलों में भी शिक्षक की कमी, खराब भवन, शौचालय और अन्य बुनियादी सुविधाओं को लेकर छात्रों ने धरना और विरोध प्रदर्शन किया. बिहार के कुछ सरकारी विद्यालयों से भी इसी प्रकार की मांगें सामने आई हैं.
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शिक्षा का अधिकार केवल कानून नहीं, व्यवहारिक व्यवस्था भी
भारत में शिक्षा का अधिकार कानून बच्चों को विद्यालय तक पहुंच सुनिश्चित करता है, लेकिन गुणवत्तापूर्ण शिक्षा केवल प्रवेश दिलाने से पूरी नहीं होती.यदि स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक, सुरक्षित भवन, स्वच्छ शौचालय, पीने का पानी, बिजली और पढ़ाई के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध न हो, तो शिक्षा का उद्देश्य अधूरा रह जाता है.
शिक्षा विशेषज्ञ लंबे समय से यह कहते रहे हैं कि सरकारी विद्यालयों में केवल नामांकन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है. सीखने का वातावरण, शिक्षकों की उपलब्धता और बुनियादी संसाधन भी समान रूप से आवश्यक हैं.
विभिन्न शिक्षा सर्वेक्षणों और UDISE+ जैसे आंकड़ों में समय-समय पर कई विद्यालयों में शिक्षक की कमी, एकल शिक्षक व्यवस्था तथा बुनियादी सुविधाओं के अभाव जैसी चुनौतियों का उल्लेख किया जाता रहा है. ऐसे में जब छोटे बच्चे स्वयं इन समस्याओं को लेकर आवाज उठाते हैं, तो यह प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है.
डिजिटल दौर में बदल रही है नई पीढ़ी की आवाज
Gen Z और Gen Alpha दोनों की एक समान विशेषता यह है कि ये डिजिटल दुनिया से गहराई से जुड़े हुए हैं. जहां Gen Z ने सोशल मीडिया, रील्स और ऑनलाइन अभियानों के माध्यम से अपनी बात रखी, वहीं Gen Alpha के बच्चे भी AI आधारित पोस्टर, डिजिटल सामग्री और वायरल वीडियो के जरिए अपनी मांगों को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा रहे हैं.
इससे यह स्पष्ट होता है कि नई पीढ़ियां केवल तकनीक का उपभोग नहीं कर रहीं, बल्कि उसे अपनी आवाज को प्रभावी बनाने के साधन के रूप में भी इस्तेमाल कर रही हैं.
निष्कर्ष
Gen Z और Gen Alpha के आंदोलनों के मुद्दे अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन दोनों के केंद्र में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने की अपेक्षा दिखाई देती है.एक पीढ़ी उच्च शिक्षा, पारदर्शिता और रोजगार की बात कर रही है, जबकि दूसरी अपने स्कूल में पंखा, पानी, शिक्षक और सम्मानजनक पढ़ाई का वातावरण मांग रही है.
राजनीतिक बयान और सोशल मीडिया विवाद सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा हो सकते हैं, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यही है कि क्या देश के हर बच्चे को ऐसी शिक्षा व्यवस्था मिल रही है, जिसमें उसे अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए सड़क पर उतरना न पड़े.यदि छोटे बच्चों को भी पढ़ाई की मूलभूत सुविधाओं के लिए प्रदर्शन करना पड़ रहा है, तो यह केवल राजनीतिक बहस का विषय नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था के सामने खड़ी एक गंभीर चुनौती है.
स्रोत: सोशल मीडिया पोस्ट (X), सार्वजनिक बयान, मीडिया रिपोर्ट्स और संबंधित सरकारी/शैक्षणिक अधिकारियों द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के आधार पर

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