ज्ञानेश कुमार पर RJD का हमला, Form 6 के Annexure-D पर सवाल

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Ajit Kumar

बिहार
Annexure-D विवाद पर RJD प्रवक्ता चित्तरंजन गगन का बयान

चित्तरंजन गगन ने फैसले को संविधान-विरोधी बताते हुए CEC के पद पर बने रहने पर सवाल उठाए

तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना, 1 अक्टूबर 2026: राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के प्रदेश प्रवक्ता चित्तरंजन गगन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं.उन्होंने आरोप लगाया कि नए मतदाताओं के पंजीकरण से जुड़े Form 6 के साथ Annexure-D की अतिरिक्त व्यवस्था संविधान और कानून के अनुरूप नहीं थी और इसका असर खासकर पहली बार मतदान करने वाले युवाओं पर पड़ सकता था.

गगन ने कहा कि Annexure-D को लेकर विवाद सामने आने और चुनाव आयोग द्वारा इसे उन राज्यों में हटाए जाने के बाद, जहां SIR की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका पर सवाल उठना स्वाभाविक है.हालांकि, चुनाव आयोग ने इस पूरे विवाद में यह स्पष्ट किया था कि Form 6 में स्वयं कोई बदलाव नहीं किया गया था, चित्तरंजन गगन ने फैसले को संविधान-विरोधी बताते हुए CEC के पद पर बने रहने पर सवाल उठाए
बल्कि SIR के तहत उसके साथ एक अतिरिक्त घोषणा-पत्र यानी Annexure-D जोड़ा गया था.

Annexure-D को लेकर क्या था विवाद?

Form 6 का इस्तेमाल पहली बार मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए किया जाता है. विवाद उस अतिरिक्त घोषणा-पत्र को लेकर हुआ, जिसमें नए मतदाताओं से उनके माता-पिता या दादा-दादी के पुराने मतदाता रिकॉर्ड से संबंधित जानकारी मांगी जा रही थी.

सितंबर 2026 में इस व्यवस्था को लेकर चुनाव आयोग के भीतर भी आपत्तियों की खबरें सामने आईं.रिपोर्टों के अनुसार दो चुनाव आयुक्तों ने अतिरिक्त घोषणा-पत्र की वैधानिकता और उसे लागू करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे. दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने कहा था कि मूल Form 6 में कोई संशोधन नहीं किया गया और Annexure-D को SIR के निर्देशों के तहत अलग घोषणा के रूप में लागू किया गया था.

अब क्या फैसला हुआ?

30 सितंबर को चुनाव आयोग ने उन राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में ऑनलाइन Form 6 से SIR से जुड़ी अतिरिक्त घोषणा को हटा दिया, जहां मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है. रिपोर्टों के मुताबिक, SIR जारी रहने वाले क्षेत्रों में यह अतिरिक्त घोषणा अभी अलग स्थिति में लागू रह सकती है.

यही फैसला अब राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है.

RJD नेता चित्तरंजन गगन का तर्क है कि यदि Annexure-D को हटाना पड़ा, तो इसके लागू किए जाने की वैधानिकता और निर्णय लेने की प्रक्रिया की समीक्षा होनी चाहिए. उन्होंने इसी आधार पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के पद पर बने रहने को लेकर सवाल उठाया है.

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RJD ने लगाया Gen-Z के अधिकारों को प्रभावित करने का आरोप

चित्तरंजन गगन ने आरोप लगाया कि Annexure-D की व्यवस्था का उद्देश्य 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके Gen-Z मतदाताओं को मतदाता सूची में शामिल होने से रोकना था. उन्होंने इसे एक गंभीर राजनीतिक और संवैधानिक मुद्दा बताया.

यह ध्यान रखना जरूरी है कि Gen-Z को मतदान के अधिकार से वंचित करने की साजिश RJD प्रवक्ता का आरोप है, स्थापित तथ्य नहीं.उपलब्ध रिपोर्टों में चुनाव आयोग ने Annexure-D को SIR प्रक्रिया से जुड़ी अतिरिक्त घोषणा बताया था और यह भी कहा था कि इसका उद्देश्य अतिरिक्त दस्तावेजों की जरूरत को कम करना था.

Form 6 और Annexure-D में अंतर समझना जरूरी

इस विवाद को समझने के लिए Form 6 और Annexure-D के बीच अंतर महत्वपूर्ण है.

Form 6 नए मतदाता के रूप में नाम दर्ज कराने का निर्धारित वैधानिक आवेदन है.
Annexure-D SIR से जुड़ी अतिरिक्त घोषणा थी.
चुनाव आयोग का कहना था कि मूल Form 6 में बदलाव नहीं किया गया.
विवाद इस बात पर था कि अतिरिक्त घोषणा को किस कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत लागू किया जा सकता है.
अब SIR पूरी हो चुके क्षेत्रों में यह अतिरिक्त घोषणा ऑनलाइन Form 6 से हटाई गई है.

इसी अंतर के कारण इस मामले में Form 6 बदला गया और Form 6 के साथ अतिरिक्त घोषणा जोड़ी गई — दोनों दावों के बीच कानूनी और प्रशासनिक फर्क महत्वपूर्ण हो जाता है.

चुनाव आयोग की भूमिका पर उठ रहे सवाल

RJD ने इस घटनाक्रम को चुनाव आयोग की पारदर्शिता और संवैधानिक जवाबदेही से जोड़ते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त के पद पर सवाल उठाया है. गगन का कहना है कि यदि किसी संवैधानिक संस्था के महत्वपूर्ण निर्णय की वैधानिकता पर सवाल उठते हैं और बाद में उस व्यवस्था में बदलाव किया जाता है, तो निर्णय प्रक्रिया सार्वजनिक जांच के दायरे में आनी चाहिए.

दूसरी तरफ, चुनाव आयोग की ओर से पहले यह कहा गया था कि SIR से संबंधित अतिरिक्त घोषणा उसके निर्देशों के तहत लाई गई थी और आयोग ने इसे अपने अधिकारों के भीतर बताया था. इसलिए इस पूरे मामले में राजनीतिक आरोपों के साथ-साथ यह सवाल भी महत्वपूर्ण है कि संबंधित नियमों और वैधानिक प्रावधानों की अंतिम कानूनी व्याख्या क्या होगी.

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जंतर-मंतर की अपील भी चर्चा में

RJD के इस बयान की राजनीतिक पृष्ठभूमि में मतदाता सूची, SIR और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर विपक्षी दलों का व्यापक अभियान भी देखा जा रहा है. ऐसे में जंतर-मंतर पहुंचिए, मोदी-ज्ञानेश की वोट चोरी के खिलाफ जैसी राजनीतिक अपीलें अभियान का हिस्सा हैं.

हालांकि, वोट चोरी जैसे शब्दों को यहां राजनीतिक आरोप/नारे के रूप में देखना जरूरी है; इसे स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता.

निष्कर्ष

Form 6 और Annexure-D को लेकर विवाद अब केवल तकनीकी प्रक्रिया का विषय नहीं रह गया है. इसके केंद्र में नए मतदाताओं का पंजीकरण, SIR की प्रक्रिया, चुनाव आयोग के अधिकार और निर्णय लेने की पारदर्शिता जैसे महत्वपूर्ण सवाल हैं.

RJD प्रवक्ता चित्तरंजन गगन ने इसी घटनाक्रम के आधार पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के पद पर बने रहने पर सवाल उठाया है. दूसरी ओर, चुनाव आयोग का पक्ष यह रहा है कि मूल Form 6 में बदलाव नहीं किया गया था और Annexure-D को SIR के तहत अतिरिक्त घोषणा के रूप में लागू किया गया था.

आगे इस विवाद का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यही रहेगा कि Annexure-D लागू करने की कानूनी प्रक्रिया और उसे हटाने के फैसले की आधिकारिक व्याख्या क्या सामने आती है.

Source: RJD प्रदेश प्रवक्ता चित्तरंजन गगन का 1 अक्टूबर 2026 का प्रेस-वक्तव्य; संबंधित प्रक्रियात्मक घटनाक्रम पर ECI के स्पष्टीकरण और प्रकाशित रिपोर्टों के आधार पर संदर्भ जोड़ा गया है.

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