संविदाकर्मियों की बहाली की लड़ाई में आइसा भी मैदान में
तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना, 12 सितंबर 2025 – बिहार में 7480 बर्खास्त विशेष सर्वेक्षण संविदाकर्मी अपनी बहाली और पांच सूत्री मांगों को लेकर लगातार आंदोलनरत हैं. शुक्रवार को इस आंदोलन को अखिल भारतीय छात्र संघ (आइसा) ने खुला समर्थन देते हुए राज्य सरकार पर कड़ा प्रहार किया.

गर्दनीबाग में आंदोलनकारियों के बीच पहुँचे आइसा राज्य सह सचिव कुमार दिव्यम ने कहा कि,एनडीए अब नेशनल डंडा एलायंस बन चुका है.नौकरी देने का वादा करने वाली सरकार आज युवाओं की नौकरी छीन रही है और उन्हें लाठियों से पिटवा रही है.
लाठीचार्ज की निंदा
आइसा नेताओं ने कहा कि प्रदर्शनकारी संविदाकर्मियों पर लाठीचार्ज पूरी तरह निंदनीय है. उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार यदि तत्काल बर्खास्त कर्मियों को बहाल नहीं करती और उनकी जायज़ मांगों पर विचार नहीं करती, तो आंदोलन को और बड़े पैमाने पर चलाया जाएगा.
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पांच सूत्री प्रमुख मांगें
संविदाकर्मियों की ओर से जो मांगे उठाई गई हैं, उनमें शामिल हैं.
सेवा अवधि 60 वर्ष तक नियमित करना.
स्थायी नियुक्ति हेतु प्रतिवर्ष 5 अंक की अधिमानता देना.
मानदेय में वृद्धि करना.
पूर्व के समझौते को लागू करना.
ESIC की सुविधा और EPF में की गई कटौती के बराबर सरकारी अंशदान जमा करना.
नौकरी छीनने वाली सरकार
आइसा नेताओं ने आरोप लगाया कि नीतीश सरकार नौजवानों को रोजगार देने का दावा करती है.लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है. सरकार युवाओं को रोजगार देने की बजाय उनकी नौकरी छीन रही है और आंदोलन की आवाज़ दबाने के लिए दमनकारी कदम उठा रही है.
आइसा के राज्य नेताओं ने कहा कि जब तक संविदाकर्मियों की बहाली नहीं होती और उनकी पांच सूत्री मांगों को पूरा नहीं किया जाता, तब तक संघर्ष जारी रहेगा.

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